कार्तिक पूर्णिमा पर मनेगी देवताओं की दिवाली, इसी दिन त्रिपुरारी कहलाए थे भोलेनाथ, भोपाल से उज्जैन-होशंगाबाद जाएंगे भक्त

जानें पूजन-विधि और धार्मिक महत्व, तीर्थ स्थलों पर पहुंचेंगे श्रद्धालु, सरोवरों में होगा दीपदान

भोपाल. कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मंगलवार को राजधानी समेत पूरे प्रदेश में श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसी के साथ पवित्र कार्तिक माह का समापन होगा। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर स्नान करेंगे और दान पुण्य करेंगे। राजधानी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु होशंगाबाद में नर्मदा स्नान के लिए पहुंचेंगे। वहीं उज्जैन सहित अन्य तीर्थ स्थलों पर भी लोग पहुंचेंगे। कार्तिक माह में जिन श्रद्धालुओं ने व्रत सहित अन्य संकल्प लिए थे, उसका परायण भी होगा। घरों में भी सत्यनारायण व्रत कथा, विशेष पूजा अर्चना सहित धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। वहीं शाम को अनेक श्रद्धालु शीतलदास की बगिया, शाहपुरा तालाब सहित अन्य स्थानों पर पहुंचकर दीपदान करेंगे। इस पर्व पर दीपदान का बेहद खास महत्व होता है।
पंडित सत्यनारायण भार्गव के अनुसार, यह पर्व देव दिवाली के रूप में मनाया जाता है। साथ ही इसे कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का ब्रह्म सरोवर में अवतरण हुआ था। वहीं इसी तिथि को भगवान भोलेनाथ ने प्रदोष काल में अद्र्धनारीश्वर के स्वरूप में त्रिपुरासुर का वध किया था। इसके बाद भगवान विष्णु ने भगवान शिव को त्रिपुरारी नाम दिया। पुराणों के अनुसार, इसी तिथि को देवताओं ने काशी पहुंचकर दिवाली (दीपावली) मनाई थी। इसलिए पूर्णिमा पर दीपदान करना शुभ माना गया है।

भगवान ने लिया था मत्स्य अवतार
पंडित राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि भगवान विष्णु ने धर्म, वेदों की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें।

दान का फल हो जाता है दोगुना
माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किए गए दान का फल दोगुना हो जाता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, पापों का नाश होता है।

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IMAGE CREDIT: patrika

शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि
पूर्णिमा तिथि को सूर्योदय से लेकर देर रात तक अपने आप में शुभ मुहूर्त रहता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा को किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती हैं। कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि तो स्वयं भगवान विष्णु जी का प्रिय दिन माना जाता है। इसलिए इस दिन उपवास और पूजा करने से अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होने साथ ही साधक विष्णु धाम का अधिकारी बन जाता है।
इस दिन प्रयास करें कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी नदी, सरोबर या घर में ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। सोलह प्रकार (षोड्षोपचार विधि) के पदार्थों से भगवान विष्णु का विधि-विधान से श्रद्धा पूर्वक पूजन करें। इस दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ अनिवार्य रूप से करें। भगवान विष्णु के इस मंत्र का उच्चारण या जप 108 बार जरूर करें।
ऊं नमो स्तवन अनंताय सहस्त्र मूर्तये, सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
सहस्त्र नाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्त्रकोटि युग धारिणे नम:।।
इस दिन घर में श्री सत्यनारायण कथा एवं हवन भी करना चाहिए। सूर्यास्त के समय समय किसी मंदिर में दीपदान करें और गरीबों को फल या मिठाई बांटे।

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रविकांत दीक्षित
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