scriptKashmiri Pandits took many years to bear the heat | गर्मी से हो गई बुजुर्गों की मौत, ये तपन सहन करने में लगे कई साल | Patrika News

गर्मी से हो गई बुजुर्गों की मौत, ये तपन सहन करने में लगे कई साल

जम्मू कश्मीर का तापमान भयंकर ठंडा रहता है, वहां कई बार पारा माइनस में भी पहुंच जाता है, हम लोगों को वहां रहने की आदत थी, लेकिन जब वहां की परेशानियां झेलना मुश्किल हो गया तो हम भोपाल आ गए.

भोपाल

Published: April 23, 2022 01:53:10 pm

भोपाल. जम्मू कश्मीर का तापमान भयंकर ठंडा रहता है, वहां कई बार पारा माइनस में भी पहुंच जाता है, हम लोगों को वहां रहने की आदत थी, लेकिन जब वहां की परेशानियां झेलना मुश्किल हो गया तो हम भोपाल आ गए, चूंकि वहां हमेशा ठंड रहती थी और यहां भयंकर गर्मी, ऐसे में हमें यहां के वातावरण में ढलना काफी मुश्किल हो गया, इतनी गर्मी में रहना हमारी आदत नहीं थी, इस कारण हमारे कई बुजुर्गों की मौत हो गई थी, ये कहना था कश्मीरी पंडित दया शंकर का, उन्होंने बताया कि कश्मीरी पंडितों को पलायन के बाद यहां के मौसम के अनुसार ढलने में काफी समय बीत गया।

गर्मी से हो गई बुजुर्गों की मौत, ये तपन सहन करने में लगे कई साल
गर्मी से हो गई बुजुर्गों की मौत, ये तपन सहन करने में लगे कई साल


दरअसल शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अमित शाह भोपाल आए थे, उनके रोड शो के दौरान भोपाल में सालों से रह रहे कश्मीरी पंडित उनका स्वागत करने के लिए पहुंचे, यहां आए पंडित दया शंकर ने बताया कि धारा 376 लगने के बाद वहां की स्थिति काफी दर्दनाक हो गई थी, लोगों को काम धंधा और रोजगार नहीं मिलता था, जमीन जायदाद को लेकर भी परेशानी बढ़ गई थी, ऐसे में भविष्य को देखते हुए कई परिवारों ने वहां से निकलना ही ठीक समझा था, हम भी वहां से निकल आए थे, यहां आने पर शुरूआत में तो हमें भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि यहां के ट्रेंप्रेचर और वहां के टेंप्रेचर में जमीन आसमान का अंतर है।

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पंडित ने भीड़ से अलग आकर बताया कि हमारा अकेला परिवार ही यहां नहीं है, बल्कि उस समय करीब 150 से अधिक परिवार यहां आए थे, अब सभी का परिवार भी बढ़ रहा है, इस कारण कश्मीरी पंडितों के भोपाल में करीब 200 से अधिक घर हो चुके हैं, उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1989 और 1990 के बीच कई परिवार यहां सहित मध्यप्रदेश के कई शहरों में पहुंचे थे और आज भी वहीं रह रहे हैं। इस बार भोपाल सहित मध्यप्रदेश में काफी अधिक गर्मी है, लेकिन अब जम्मू कश्मीर से आए सैंकड़ों परिवारों को भी गर्मी सहन करने की आदत पड़ गई है, इसलिए उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हमें यहां के वातावरण के अनुसार ढलने में करीब तीन से चार साल लग गए थे।

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