scriptKen Betwa link project approved in Modi cabinet | मोदी कैबिनेट में दी केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को मंजूरी | Patrika News

मोदी कैबिनेट में दी केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को मंजूरी

केन बेतवा नदियों को जोड़ने वाली इस परियोजना पर 44,605 करोड़ रुपये होंगे खर्च, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

भोपाल

Published: December 08, 2021 05:05:24 pm

भोपाल. केन बेतवा नदियों को जोड़ने वाली परियोजना 44,605 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी। इस परियोजना के तहत 8 वर्ष में पूरा किया जाएगा। इस राष्ट्रीय परियोजना में केंद्र सरकार का योगदान 90% होगा। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना को मंजूरी दे दी गई है।

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इस परियोजना से 103 मेगावॉट पन बिजली और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा पैदा होगी, इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिये केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण (KBLPA) नामक विशेष प्रयोजन संस्था बनाई जायेगी। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के छतरपुर, पन्ना और टीकमगढ़ तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा और झांसी के सूखे से ग्रस्त एवं पानी की कमी वाले क्षेत्रों में 10.62 लाख हेक्टेयर रकबे को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। परियोजना 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिये नहर को जोड़ा जायेगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना की कुल लागत 44,605 करोड़ रुपये का अनुमान किया गया है, जो 2020-21 की कीमतों के आधार पर है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने परियोजना के लिये केंद्रीय समर्थन के रूप में 39,317 करोड़ रुपये, सहायक अनुदान के रूप में 36,290 करोड़ रुपये और ऋण के रूप में 3,027 करोड़ रुपये की धनराशि को मंजूर किया है। यह परियोजना भारत में नदियों को आपस में जोड़ने की अन्य परियोजनाओं का भी मार्ग प्रशस्त करेगी तथा विश्व के सामने हमारी बुद्धिमत्ता और दृष्टिकोण का भी परिचय देगी।

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27 मेगावॉट सौर ऊर्जा पैदा होगी
इस परियोजना के तहत 103 मेगावॉट पन बिजली और 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा पैदा होगी। परियोजना को उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी के साथ आठ वर्षों में पूरा किया जाएगा।इसमें केन का पानी बेतवा नदी में भेजा जायेगा। यह दाऊधाम बांध के निर्माण तथा दोनों नदियों से नहर को जोड़ने, लोअर उर परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स परियोजना के जरिये पूरा किया जायेगा। परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर रकबे की वार्षिक सिंचाई हो सकेगी, लगभग 62 लाख की आबादी को पीने का पानी मिलेगा।

यह परियोजना पानी की कमी से जूझते मध्यप्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी और रायसेन तथा उत्तरप्रदेश के बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर को बहुत लाभ होगा। ये इलाका बुंदेलखंड के नाम से जाना जाता है जो मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश राज्यों में फैला है।

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