मैपिंग से 5000 एकड़ से अधिक बढ़ सकता है केरवा का वन क्षेत्र

केवल चंदनपुरा में ही 466 एकड़ का रकबा निजी स्वामित्व में, मैपिंग में अधिकतर हिस्सा घोषित हो सकता है वन क्षेत्र

भोपाल. एनजीटी की सेंट्रल जोन बैंच ने केरवा और कलियासोत इलाके के जंगलों की मैपिंग करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश एमओईएफ (मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट एंड फॉरेस्ट ) की रिपोर्ट के आधार पर दिए गए है। प्रदेश के वन विभाग को तीन महीने में मैपिंग पूरी करना है। जानकारों का कहना है कि यदि यह काम सटीक तरीके से हुआ तो केरवा वन क्षेत्र के क्षेत्रफल में 5000 एकड़ से ज्यादा की वृद्धि हो जाएगी वहीं इससे इस इलाके में चल रही कई तरह की अवैध गैन वनीय गतिविधियों पर रोक भी लग जाएगी।

यह कहते हैं आंकड़े
अभी तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चंदनपुरा इलाके का कुल रकबा 1198 हेक्टेयर का है, इसमें 468 हेक्टेयर भूमि निजी स्वामित्व की जबकि 730 एकड़ शासकीय रकबा है। 466 हेक्टेयर के निजी रकबे वाले बड़े हिस्से में वन क्षेत्र आच्छादित है, लेकिन इस क्षेत्र में रहवासी और व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं। केरवा के वन क्षेत्र के अंदर तो इलाका पूरी तरह वन से आच्छादित है, लेकिन इसका भी बड़ा रकबा निजी निजी भूमि के रूप में दर्ज है, जिसमें व्यवसायिक गतिविधियां हो रही हैं।

पेड़ों की संख्या ज्यादा इसलिए वन क्षेत्र
सुप्रीम कोर्ट वर्षा बर्मन केस के फैसले में स्पष्ट कह चुका है कि जमीन चाहे किसी भी मद की हो लेकिन यदि खसरे पर किसी भी तरह के जंगल शब्द का उल्लेख है उसे वन माना जाएगा। यहां तक कि किसी जगह में बड़े इलाके में पेड़ों का घनत्व देखकर ही वन होना लगे तो भी वह जगह वन माना जाएगा। यहां सभी अवैध माने जाएंगे। केरवा-कलियासोत के बीच जंगल के क्षेत्र में भी बिना अनुमति ऐसे ही निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। जबकि फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट के अनुसार वन क्षेत्र में बिना अनुमति कोई भी गैर वनीय गतिविधि नहीं की जा सकती है।

एनजीटी ने बहुत बड़ा निर्णय दिया है जिसमें केरवा-कलियासोत के पूरे वन क्षेत्र की मैपिंग के निर्देश ही नहीं बल्कि इस तरह की जमीन को वन भूमि में लेकर पूरे इलाके में घना पौधरोपण कराने के हैं। इस क्षेत्र में यदि वन विभाग सही तरीके से मैपिंग करता है तो पांच हजार एकड़ से अधिक जमीन यहां बढ़ेगी।
राशिद नूर खान, केरवा-कलियासोत मामले में याचिकाकर्ता

Sumeet Pandey Desk
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