साध्वी को उतारने के पीछे बीजेपी का ये 'एंगल', जिसमें उलझ सकती है कांग्रेस!

साध्वी को उतारने के पीछे बीजेपी का ये 'एंगल', जिसमें उलझ सकती है कांग्रेस!

Pawan Tiwari | Publish: Apr, 17 2019 04:45:11 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 04:53:58 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

साध्वी को उतारने के पीछे बीजेपी का ये 'एंगल', जिसमें उलझ सकती है कांग्रेस!

भोपाल. लोकसभा चुनाव 2019 में मध्यप्रदेश के भोपाल सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह उम्मीदवार हैं। वहीं, दिग्विजय को घेरने के लिए भाजपा ने मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उतारा है। ऐसे में कई सवाल लोगों के मन में कौंध रहे हैं कि आखिरी 16 साल बाद चुनावी मैदान में उतरे दिग्विजय सिंह के खिलाफ बीजेपी ने किस एंगल के तहत साध्वी को उम्मीदवार बनाना चाहती है। वहीं, साध्वी प्रज्ञा कहती हैं कि मैं मुकाबला के लिए तैयार हूं।

2019 चुनाव की शुरुआत के साथ ही कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र की एक रैली में हिंदू आतंकवाद का मुद्दा उठाया था। इस मुद्दे का जिक्र हम इसलिए यहां कर रहे हैं कि 'हिंदू आतंकवाद' शब्द का नाता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से जुड़ा हुआ है। इस शब्द का जनक दिग्विजय सिंह को ही माना जाता है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर 2008 मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी रही हैं। 2018 में एनआईए कोर्ट ने उन्हें सबूतों के आभाव में बरी कर दिया था।

ऐसे में बीजेपी इस मुद्दे के जरिए भोपाल में वोटों का ध्रुवीकरण चाहती है। क्योंकि बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह हिंदुत्व के चेहरे के रूप में उभरी हैं। दिग्विजय सिंह पर हिंदू आतंकवाद से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताने का विवाद जुड़ा हुआ है। जिसे भोपाल में फिर से बीजेपी भुनाने की कोशिश कर सकती है।

वहीं, अगर हिंदू आतंकवाद के मुद्दे को उठाकर दिग्विजय, साध्वी को घेरने की कोशिश करेंगे तो भोपाल ही नहीं पूरे देश में फिर से बीजेपी को कांग्रेस के खिलाफ मुद्दा मिल सकता है। ऐसे में साध्वी प्रज्ञा जिन वजहों से विवादों में रही हैं, उन पर घेरने से दिग्विजय सिंह भी बचेंगे। क्योंकि साध्वी प्रज्ञा के विवादित पहलुओं को छेड़ना कांग्रेस को ही भारी पड़ सकता है।

अगर भोपाल की बात करें तो बीजेपी लगातार 1989 के बाद से इस सीट पर जीतती आ रही है। 1984 में अंतिम बार इस सीट से कांग्रेस से के एन प्रधान चुनाव जीते थे।

कौन हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
राष्ट्रीय फलक पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं जब उनका नाम 2008 में मालेगांव ब्लास्ट से जुड़ा। उसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। 9 साल बाद जब जमानत पर वो बाहर आईं तो कहा था कि कांग्रेस की सरकार ने उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी हैं। साथ ही उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। प्रज्ञा 2007 में आरएसएस के प्रचारक रहे सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थी। बाद में उस मामले में भी बरी हो गई। वह मध्यप्रदेश की भिंड की रहने वाली हैं। उनका सूरत में भी आश्रम है।

2003 के बाद चुनाव लड़ रहे हैं दिग्विजय
भोपाल में प्रज्ञा के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में 16 साल बाद उतरे हैं। 1993 से लेकर 2003 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने 2003 के बाद कभी भी विधानसभा और लोकसभा का कोई चुनाव नहीं लड़ा।

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