scriptKnow what are the challenges for CM Shivraj Singh | ब्रांड शिवराज की मजबूत कैम्पेनिंग, दिल्ली को दिया संदेश, जानें सीएम के लिए अब क्या है चुनौतियां | Patrika News

ब्रांड शिवराज की मजबूत कैम्पेनिंग, दिल्ली को दिया संदेश, जानें सीएम के लिए अब क्या है चुनौतियां

सियासी पारी के लिए नया बूस्टअप डोज

भोपाल

Updated: March 29, 2022 08:17:02 am

भोपाल. पचमढ़ी में दो दिवसीय कैबिनेट चिंतन-मंथन बैठक के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति एक बार फिर नया मोड़ ले रही है। इस बैठक के जरिए सीएम शिवराज सिंह ने मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक ब्रांड शिवराज का संदेश दिया है। उनकी आगामी सियासी पारी के लिए यह नया बूस्टअप डोज जैसा है। चिंतन-मंथन के कई मायने निकाले गए हैं। इससे शिवराज ने एक बार फिर प्रदेश के फैसलों में संदेश दिया कि वे समन्वय व सामूहिक मंथन के जरिए निर्णयों को लागू करते हैं। दूसरी ओर साफ कर दिया है कि प्रदेश में सत्ता के सूत्र पूरी तरह उनके हाथ हैं। हालांकि उनके समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं हैं। अब 8 अप्रेल को एक बार फिर कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मैराथन बैठक करेंगे। इसमें प्रशासनिक प्राथमिकताएं तय होंगी।
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सियासी पारी के लिए नया बूस्टअप डोज
दिल्ली तक संदेश
शिवराज ने संदेश दिया है कि वे हर निर्णय समन्वय व सामूहिकता से करते हैं। कैबिनेट सब-कमेटियों से पहले ही विभिन्न योजनाओं के सुधार का खाका तैयार कर लिया था। प्रेजेंटेशन, सुझाव व मंथन के बाद कैबिनेट की मुहर के साथ ऐलान किया। यह भी संदेश दिया कि वे समन्वय में अब भी उनकी कोई जोड़ नहीं है।
प्रदेश में यह लाइन
सीएम ने मैराथन बैठक से साफ कर दिया कि प्रदेश में उनकी ही चलनी है। बार-बार उनके हटने की अफवाहों को लगाम लगाकर संदेश दिया कि उनके हाथ ही सत्ता के सूत्र रहेंगे। निगम-मंडल में, संगठन में भी और नियुक्तियां होनी हैं। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें हैं। ऐसे में सीएम ने साफ कर दिया कि उनकी लाइन पर ही सभी को चलना होगा।
मैसेजिंग की जरूरत
उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सियासी असर मप्र में दिख रहे हैं। दो साल में बार-बार शिवराज के खिलाफ पार्टी में कई अटकलें चलीं। कुर्सी पर भी खतरा बताया गया, इसलिए शीर्ष नेतृत्व से लाइन मिलने के बाद सीएम ने दो साल पूरे होने पर अफसरों को साफ कहा कि सरकार हमारे हिसाब से ही चलेगी। फिर कैबिनेट मंथन रख लिया।
अब आगे ये चुनौतियां
शिवराज के सामने दो साल चुनौतियों से भरे हैं। पार्टी के विरोध को संभालने के साथ ही सियासी पारी को बढ़ाना होगा। इस साल नगरीय निकाय, पंचायत चुनाव भी होने हैं। उनमें परफॉर्मेंस बेहतर रखनी होगी। सर्विस डिलीवरी सिस्टम में सुधार चुनौती है। यूपी मॉडल के जो नुस्खे प्रदेश में अपनाए जा रहे हैं।

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