एमपी में एक साल में 31 हजार 944 बच्चों की मौत, अकेले भोपाल में हर दिन 5 की मौत

राजधानी भोपाल में साल 2019 में 1818 बच्चों की मौत हुई है।

By: Pawan Tiwari

Updated: 07 Jan 2020, 09:17 AM IST

भोपाल. कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद देशभर के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन मध्यप्रदेश में चौकाने वाला खुलासा हुआ है। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में साल भर में करीब 31 हजार 944 बच्चों की मौत हुई है। उससे भी बड़ा चौकाने वाला खुलासा ये हैं कि राजधानी भोपाल में साल 2019 में 1818 बच्चों की मौत हुई है। यानि की हर दिन जिले में पांच बच्चों की मौत हो रही है।

राजधानी भोपाल के अस्पताल की हालत खराब
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी अस्पतालों की स्थिति खराब है। हर साल नवजात बच्चों की मौतों में वृद्धि हो रही है। प्रदेश में औसतन 25 हजार बच्चों की मौत हो रही है। वहीं, इसके साथ-साथ प्रदेश में प्रसूताओं की मौत में भी वृद्धि हुई है। 2018-2019 में प्रदेश भर में करीब 2003 प्रसूताओं की मृत्यु हुई है।

हमीदिया में 22 फीसदी बच्चों की मौत
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पतालों में एक हमीदिया अस्पताल में हर साल करीब 22 फीसदी बच्चों की मौत हो रही है। हमीदिया अस्पताल के शिशु रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ ज्योत्सना श्रीवास्तव के अनुसार, हमारे यहां हर साल करीब 4 हजार बच्चे भर्ती होते हैं। इसमें 22 फीसदी बच्चों की मौत हो जाती है। एनसीसीयू में ऑक्यूपेंसी रेट कुछ महीनों में बढ़ जाता है। इसकी वजह है कि ग्रामीण अंचलों से रेफर किए गए बच्चों को आखिरी वक्त पर हमारे पास आते हैं।

ये हैं आंकड़ें

साल प्रदेश में बच्चों की मौत भोपाल में बच्चों की मौत
2018-19 31944 1818
2017-18 27560 1029
2016-17 22003 1398
2015-16 23152 1230
2014-15 23634 449

मध्यप्रदेश में प्रसूताओं की मौत

साल प्रदेश में प्रसूताओं की मौत भोपाल में प्रसूताओं की मौत
2018-19 2003 177
2017-18 1897 135
2016-17 1391 108
2015-16 1612 128
2014-15 1449 81

बच्चे नहीं मना पाते हैं पांचवा जन्मदिन

  • प्रदेश में जन्म लेने वाले प्रति हजार नवजातों में से 32 बच्चे एक महीने भी जीवित नहीं रहते हैं।
  • 55 बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन नहीं मना पाते हैं। दे के 21 बड़े राज्यों में यह मृत्यु दर का सबसे बड़ा आकड़ा है।

नीति आयोग ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो रिपोर्ट जारी की है उसमें मध्यप्रदेश के आंकड़े खराब हैं। स्वास्थ्य से जुड़े 23 इंडिकेटर्स के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में मध्यप्रदेश 17वें स्थान पर है।

Pawan Tiwari
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