पैराशूट से उतरे नेता: कभी फेल हुए तो कभी पास

पैराशूट से उतरे नेता: कभी फेल हुए तो कभी पास

Deepesh Tiwari | Publish: Oct, 14 2018 09:04:39 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

किसी को बैठे-बैठे मिला टिकट, कोई दिल्ली से 'उतरा'...

भोपाल। प्रदेश में पैराशूट लैंडिंग करने वाले कई नेता सफल हुए तो कई असफलता के बाद हाशिए पर पहुंच गए। इनमें मंत्री नारायण सिंह कुशवाह भी पैराशूट से उतरे थे, उन्हें चौंकाने वाले अंदाज में टिकट मिला था।

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भोजपुर में पैराशूट लैंडिंग कर हार का स्वाद चख चुके हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जो पैराशूट नेता को स्थानीय और पार्टीगत फार्मूलों के आधार पर जीत-हार सुनिश्चित कराते हैं।
पढ़ें रोचक किस्से...

...जब हारे सुरेश पचौरी
2013 के चुनाव में पैराशूट लैंडिंग की बात करें तो बड़ा उदाहरण सुरेश पचौरी का है। वे भोजपुर सीट से चुनाव लड़कर भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र पटवा से हार गए थे। राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय मंत्री रहने के बावजूद पचौरी विधानसभा में नहीं जीत पाए। इसका कारण भोजपुर की जनता से पचौरी की दूरी रही।

अचानक आया फोन
मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को 2003 में पहली बार टिकट मिला। वे अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी अनूप मिश्रा ने फोन कर कहा कि ग्वालियर-दक्षिण से चुनाव लडऩा है। वे लड़े और कांग्रेस नेता भगवानसिंह यादव को हराया। तब, कुशवाह टिकट दावेदारों में भी शुमार नहीं थे। इसके बाद से कुशवाह लगातार जीत रहे हैं।

चाहा यहां, तो टिकट मिला वहां
छतरपुर की बिजावर सीट से विधायक पुष्पेंद्रनाथ पाठक को इच्छा के विरुद्ध दूसरी सीट से टिकट मिला था। उन्होंने 2013 में महाराजपुर से टिकट मांगा, लेकिन पार्टी ने मानवेंद्र को उम्मीदवार बना दिया। इससे नाराज होकर पाठक ने वरिष्ठ नेताओं के पुतले तक जलाए। बाद में पार्टी ने उन्हें बिजावर से प्रत्याशी बनाया और वे जीते।

कानाफूसी
अर्जुन के सारथी बने दिग्विजय...
पू र्व मुख्यमंत्री इन दिनों अर्जुन के सारथी बने हुए हैं। बुदनी के किसान नेता अर्जुन आर्य का राजनीतिक मार्ग सारथी और गुरु बनकर दिग्विजय सिंह ने प्रशस्त किया है।

दिग्विजय सिंह जब अर्जुन से चुपचाप जेल में मिलने गए थे, तभी से माना जा रहा था कि उनके दिमाग में कुछ चल रहा है। अर्जुन को दिग्विजय ने कांग्रेस में शामिल करवाया लेकिन वे खुद पर्दे के पीछे रहे। कमलनाथ ने सदस्यता दिलवाई पर कार्यक्रम में दिग्विजय शामिल नहीं हुए।

माना जा रहा अर्जुन आर्य को बुदनी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ उम्मीदवार बनाकर उतारा जाएगा। यानी दिग्गी राजा ने सारथी बनकर अर्जुन को राजनीति के कुरुक्षेत्र में उतार ही दिया।

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