scriptLawyers working in state courts got leave from black coat | प्रदेश की अदालतों में काम कर रहे वकीलों के काले कोट से मिली छुट्टी | Patrika News

प्रदेश की अदालतों में काम कर रहे वकीलों के काले कोट से मिली छुट्टी

निचली अदालतों को मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नहीं मिलेगी राहत

भोपाल

Published: April 09, 2022 04:27:01 pm

भोपाल. प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ने से लोग घरों में कैद हो गए हैं। गर्मी में काले रंग के कपड़े पहनने से और ज्यादा गर्मी महसूस होती है। गर्मी के मौसम को देखते हुए मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने अधिवक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अब प्रदेश की अदालतों में वकीलों को काले कोट पहनकर जाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

lawyers_working_in_state_courts_got_leave_from_black_coat.png

हालांकि यह छूट केवल गर्मी के सीजन तक ही रहेगी यानि 15 अप्रैल से लेकर 15 जुलाई तक काले कोर्ट से मुक्ति मिल जाएगी। इस अवधि में वकीलों के यूनीफॉर्म में बदलाव करते हुए काला कोट पहनने से छूट दे दी गई है। मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने प्रदेश की निचली अदालतों में वकालत करने वाले वकीलों को काले कोट के बिना पैरवी करने की छूट दी है। इसके लिए समय भी तय कर दिया गया है। अब हाई कोर्ट के छोड़कर सभी निचली अदालतों में 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक यूनीफॉर्म में काला कोट पहनना अनिवार्यता नहीं होगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर पीठ में कोट पहनना अनिवार्य ही रहेगा। मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक बार कौंसिल ऑफ इंडिया के चैप्टर IV PART 6 RULE 4 के तहत गर्मियों में वकीलों को कोट पहनने की अनिवार्यता से छूट देने का प्रावधान है। इसी नियम के आधार पर प्रदेश की निचली अदालतों में काम कर रहे वकीलों को राहत दी गई है।

मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक 15 अप्रैल से 15 जुलाई की अवधि में वकील सफेद शर्ट और काली/सफेद/धारी वाली/ग्रे रंग की पेंट और एडवोकेट बैंड पहनकर अपना काम कर सकेंगे। केवल काले कोर्ट की अनिवार्यता नहीं होगी। प्रदेश में गर्मी की सीजन शुरू होते ही तापमान 44 डिग्री को पार कर गया है ऐसे में राज्य के कई जिलों और तहसीलों के अधिवक्ता संघों ने राज्य परिषद से कोट की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की थी। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि जिला और तहसील के अधिवक्ता संघों के पास पर्याप्त स्थान नहीं होता है। और वकील अपना अधिकतर काम खुले परिसर में या कोर्ट के बाहर बैठ कर करते हैं। इस वजह से बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियम के तहत कोट पहनने से राहत दी जाए।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

17 जनवरी 2023 तक 4 राशियों पर रहेगी 'शनि' की कृपा दृष्टि, जानें क्या मिलेगा लाभज्योतिष अनुसार घर में इस यंत्र को लगाने से व्यापार-नौकरी में जबरदस्त तरक्की मिलने की है मान्यतासूर्य-मंगल बैक-टू-बैक बदलेंगे राशि, जानें किन राशि वालों की होगी चांदी ही चांदीससुराल को स्वर्ग बनाकर रखती हैं इन 3 नाम वाली लड़कियां, मां लक्ष्मी का मानी जाती हैं रूपबंद हो गए 1, 2, 5 और 10 रुपए के सिक्के, लोग परेशान, अब क्या करें'दिलजले' के लिए अजय देवगन नहीं ये थे पहली पसंद, एक्टर ने दाढ़ी कटवाने की शर्त पर छोड़ी थी फिल्ममेष से मीन तक ये 4 राशियां होती हैं सबसे भाग्यशाली, जानें इनके बारे में खास बातेंरत्न ज्योतिष: इस लग्न या राशि के लोगों के लिए वरदान साबित होता है मोती रत्न, चमक उठती है किस्मत

बड़ी खबरें

मुस्लिम पक्षकार क्यों चाहते हैं 1991 एक्ट को लागू कराना, क्या कनेक्शन है काशी की ज्ञानवापी मस्जिद और शिवलिंग...मॉब लिंचिंग : भीड़ ने युवक को पुलिस के सामने पीट पीटकर मार डाला, दूसरी पत्नी से मिलने पहुंचा थादिल्ली के अशोक विहार के बैंक्वेट हॉल में लगी आग, 10 दमकल मौके पर मौजूदभारत में पेट्रोल अमेरिका, चीन, पाकिस्तान और श्रीलंका से भी महंगाकर्नाटक के राज्यपाल ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक को दी मंजूरी, इस कानून को लागू करने वाला 9वां राज्य बनाSwayamvar Mika Di Vohti : सिंगर मीका का जोधपुर में हो रहा स्वयंवर, भाई दिलर मेहंदी व कॉमेडियन कपिल शर्मा सहित कई सितारे आएIPL 2022 MI vs SRH Live Updates : हैदराबाद ने मुंबई को दिया 194 रनों का लक्ष्यहिमाचल प्रदेश: सीएम जयराम ने किया एलान, पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले की जांच करेगी CBI
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.