हिंदी बोलते हैं तो लगता है संगीत गूंज रहा

विश्व रंग में विश्वभर के साहित्यकारों ने हिंदी भाषा की स्थिति पर किया विमर्श

भोपाल. साहित्य एवं कला महोत्सव विश्व रंग के अंतिम दिन रविवार को मिंटो हॉल के प्रेमचंद सभागार में विश्व में हिंदी - विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण की वर्तमान स्थिति विषय पर सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रवासी हिंदी पुस्तक का अतिथियों ने विमोचन किया।
सत्र को डॉ. लिउडमिला (मास्को), डॉ. तत्याना ओरांसकया (जर्मनी), डॉ. उपुल रंजीत (श्रीलंका), डॉ. श्रपसिमे नेर्सिस्यान (अर्मेनिया), डॉ. दरीगा कोकोएवा (कजाकिस्तान) ने संबोधित किया। अध्यक्षता इजरायल के साहित्यकार डॉ. गेनादी श्लोम्पोर व संचालन प्रो. वीके वर्मा ने किया।
डॉ. दरीगा ने कहा कि भारत के लगभग ढाई हजार विद्यार्थी कजाकिस्तान में पढ़ाई करते हैं और कजाकिस्तान से हर वर्ष 20 विद्यार्थी भारत में हिंदी और भारतीय भाषाओं के अध्ययन के लिए आते हैं, जिन्हें छात्रवृत्ति भारतीय संस्कृति परिषद प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि कजाकिस्तान में हिंदी दिवस और अन्य उत्सव धूमधाम से मनाए जाते हैं। मैंने दो पुस्तकें हिंदू धर्म का इतिहास तथा भारतीय भाषा का परिचय हाल ही में लिखी हैं। हम कजाकिस्तान में फिल्मों के माध्यम से भाषा और संस्कृति को सीख रहे हैं। हिंदी भारत की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की भाषा है।
कवियत्री एवं अनुवादक ऋपसिमे ने कहा कि विश्व रंग जैसे आयोजन दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करते हैं। अर्मेनिया में पहली बार वर्ष 2003 में मानविकी संकाय की स्थापना हुई, लेकिन अफसोस कि अब वह बंद हो चुका है। जिससे मैं अध्यापन का छोड़कर अनुवादक का कार्य कर रही हूं।

बॉलीवुड की जो भाषा छात्रों के लिए लाभदायक
साहित्यकार और प्राध्यापक डॉ. रंजीत ने बताया कि श्रीलंका के पांच विवि में हिंदी भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है। हिंदी का विस्तार रंगकर्म, सिनेमा, संगीत और साहित्य के माध्यम से हुआ है। डॉ. गेनादी श्लोम्पोर ने कहा कि हिंदी बोलते हैं, तो लगता है जैसे संगीत गूंज रहा हो। हमारे विभाग में स्नातक की उपाधि तीन साल के बाद मिल जाती है, लेकिन भाषा का अध्ययन दो साल तक अनिवार्य है। इन दो सालों के अंदर छात्र इतनी हिंदी सीख लेते हैं कि यदि स्वयं आगे बढऩा चाहें, तो उनके पास एक अच्छा आधार होता है। तीसरे साल में हिन्दू धर्म नामक कोर्स की भी बड़ी मांग होती है। यह हिंदू धर्म को लेकर टीवी, समाचार और अन्य कार्यक्रमों पर आधारित है। इसी साल थर्ड ईयर के पहले सत्र में छात्रों ने फिल्म उद्योग का अध्ययन करने में हाथ आजमाना चाहा। बॉलीवुड की जो भाषा है, वो छात्रों के लिए बड़ी लाभदायक साबित होती है। फिल्में एक दर्पण के तरह समाज के जीवन और आधुनिक भाषा की स्थिति दर्शाती है।

Pradeep Kumar Sharma
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned