लॉकडाउन में ट्रकों के पहिए थमने से 4 हजार करोड़ का नुकसान

10 लाख की रोजी रोटी पर संकट

दो महीने से थमे हैं 50 हजार ट्रकों के पहिए

 

By: Arun Tiwari

Updated: 14 Jun 2020, 05:58 PM IST

भोपाल : लॉकडाउन भले ही अनलॉक में बदल गया हो लेकिन प्रदेश के 50 हजार ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। इन ट्रकों के सहारे ही रोजमर्रा की बुनियादी आवश्यकताओं से लेकर सुख सुविधा के साधनों का परिवहन होता है। दो महीने के लॉकडाउन से इस परिवहन पर चार हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इन ट्रकों के परिवहन काम से 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। ड्रायवर से लेकर क्लीनर तक और मैकेनिक से लेकर मजदूरों तक की रोजी रोटी इस काम से ही जुटती आई है। अब इन लोगों पर भी रोजी पर भी संकट आन पड़ा है। इन ट्रक ऑपरेटरों को एक और समस्या आ गई है। कोरोना के चलते ड्रायवर घर छोड़कर लंबी दूरी पर ट्रक ले जाने को तैयार नहीं हैं। वहीं जब फैक्टरियों में उत्पादन नहीं हुआ तो फिर ट्रकों के परिवहन का सामान भी नहीं मिल पा रहा है। ट्रक ऑपरेटरों ने सरकार से छह महीने का रोड टैक्स माफ करने की गुहार लगाई है।

एक ट्रक पर करीब 4 लाख का कारोबार :
एक ट्रक के परिवहन से करीब तीन से चार लाख रुपए की आमदनी होती है। इसमें 80-90 हजार रुपए बैंक की किश्त चली जाती है। डेढ़ लाख रुपए का डीजल लग जाता है। इसके अलावा ट्रक के टायर और उसके मेंटनेंस का खर्च होता है। ट्रक के ड्रायवर, क्लीनर और लेबर का वेतन जाता है। इस तरह एक ट्रक ऑपरेटर को एक महीने में 10 से 15 हजार रुपए महीने की शुद्ध बचत हो पाती है।

इन कामों में हेाता है ट्रकों का उपयोग :
- पेट्रोलियम उत्पादों यानी डीजल,पेट्रोल,एलपीजी का परिवहन
- सड़कों के लिए डामर का परिवहन
- गरीबों के लिए कैरोसिन का परिवहन
- गेहंू, दाल, चावल समेत सभी तरह के अनाजों का परिवहन
- गुड़, शकर, गन्ना का परिवहन
- लोहा,सीमेंट,रेत, गिट्टी समेत मकान निर्माण सामग्री का परिवहन
- बड़े-बड़े स्टोर्स से लेकर छोटी दुकानों तक माल पहुुंचाना
- छोटी-बड़ी फैक्टरियों के माल की सप्लाई
- ऑटोमोबाइल सेक्टर में साइकिल से लेकर मोटरसाइकिल,कार,ट्रैक्टर का परिवहन
- प्लास्टिक का सामान, कुर्सियां, पानी की टंकी समेत अन्य सामानों की सप्लाई

ट्रक परिवहन से जुड़े ये लोग :
ट्रकों परिवहन में ड्रायवर, क्लीनर, मजदूर के साथ ही अन्य लोग भी जुड़े होते हैं। लोडिंग-अनलोडिंग का काम भी इन्हीं से जुड़ा होता है। टायर रिमोल्डिंग और मैकेनिक का पूरा काम ट्रकों पर आधारित होता है। इसके अलावा ट्रक बनाने से लेकर उसके स्पेयर पाट्र्स और डीजल का पूरा पहिया इन ट्रकों के पहिए चलने से ही जुड़ा होता है।

ट्रक ऑपरेटरों की सरकार से मांगें :
- छह महीनों का रोड टैक्स, गुड्स टैक्स, नेशनल परमिट टैक्स माफ किया जाए
- आरटीओ और पुलिस की अवैध वसूली रोकी जाए
- इंश्योरेंस और बैंक किश्त में भी राहत प्रदान की जाए

वर्जन :
ट्रक ऑपरेटर करीब तीन महीने से बहुत बुरी दशा से गुजर रहे हैं। लाखों लोगों पर रोजी रोटी का संकट आ गया है। सरकार हमारी तरफ भी ध्यान दे। छह महीने का सभी तरह का टैक्स माफ किया जाए। - नरेंदर सिंह पांधे प्रदेश अध्यक्ष, ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन -

Arun Tiwari Reporting
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