विधानसभा में गूंजा अवैध खनन और खाद का मुद्दा, मंत्री को देना पड़ा जवाब

मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र, चौथे दिन गर्माए अवैध खनन और खाद में घोटाले के मुद्दे...।

By: Manish Gite

Published: 25 Feb 2021, 12:48 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। अवैध खनन और खाद घोटाले का मामला भी उठा। इस पर खनन मंत्री को जवाब देना पड़ा। प्रश्नकाल में यह मुद्दा उठाया गया था। इसके अलावा चिटफंड कंपनियों के मामले में भी सरकार को घेरने के लिए विपक्ष कोशिश कर रहा है। वहीं पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने सीधी बस हादसे पर चर्चा की मांग उठाई।

ग्वालियर में चल रहा अवैध खनन

ग्वालियर क्षेत्र में भी अवैध खदान का मामला कांग्रेस के विधायक लाखन सिंह यादव ने सदन में उठाया। यादव का आरोप था कि यह खदान स्वीकृत नहीं हैं, इसके बावजूद भी माफिया यहां से रेत निकालकर ले जा रहे हैं। इसकी सूचना 15 बार कलेक्टर को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। लाखन सिंह यादव के प्रश्न के जवाब में खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो कार्रवाई की गई है उसमें 8 प्रकरण दर्ज बनाए गए हैं और 4 पोकलेन मशीनें जब्त हुई हैं। यादव ने कहा कि वसई में स्वीकृत रेत खदान में रेत नहीं है, इसकी आड़ लेकर आसपास के गांव से रेत ले जा रहे हैं। इस प्रश्न का मंत्री ने जवाब नहीं दिया। कांग्रेस विधायक विजय लक्ष्मी साधो ने भी कहा कि मध्यप्रदेश में अवैध टोकन देकर हो रहा है अवैध खनन और परिवहन। हंगामे के कारण सदन तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

नीमच-मंदसौर में हेराफेरी का मामला उठा

अवैध उत्खनन के साथ ही नीमच और मंदसौर में ट्रांसपोर्टरों की ओर से खाद को सोसायटी तक पहुंचाने में हो रही हेराफेरी का मुद्दा उठाया गया। इस मुद्दा को उठाते हुए भाजपा के विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया आरोप लगाया कि वेयरहाउस में चौकीदार का बेटा ही ठेकेदार है, उसी ने यह हेराफेरी की है। इसके जवाब में सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने कहा कि इस मामले में चौकीदार की संल्पित्तता भी सामने आ गई है। ट्रांसपोर्टर और चौकीदार ने मिलकर चार करोड़ 63 लाख की हेराफेरी की है। इस मामले में थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। भदौरिया ने कहा कि आरोपियों से वसूली की भी कार्रवाई भी की जा रही है। उनकी संपत्ति कुर्क करने की भी तैयारी की जाएगी। शासन स्तर पर जांच दल का भी गठन किया जा रहा है। इसमें सोसायटी के महाप्रबंधक शामिल पाए जाते हैं तो उनको भी हटाकर तीन माह में जांच पूरी की जाएगी।

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