जेलों में कैदियों को नहीं मिल पा रहा इलाज, मानवाधिकार आयोग ने जताई नाराजगी

आयोग ने कहा- जेल के अस्पतालों को सिविल अस्पताल की तर्ज पर करें अपग्रेड, इससे पहले भी कई बार की जा चुकी हैं अनुशंसाएं

By: Radhyshyam dangi

Published: 24 Dec 2019, 02:44 PM IST

भोपाल. जेलों में बंदियों की मौतों पर मानव अधिकार आयोग हर साल एक दर्जन से ज्यादा अनुशंसाएं करता है, लेकिन जेल विभाग के अधिकारी इन्हें मानते ही नहीं। ऐसे में आयोग खुद को असहाय महसूस करने लगता है। आयोग के जिम्मेदारों का तर्क है कि कैदियों की मौतों पर सहायता राशि देने के मामले की अनुशंसाओं का पालन नहीं किया जाता है। जबकि व्यवस्था से जुड़ी अनुशंसाओं का पालन कर लिया जाता है। हाल ही में आयोग ने एक बार फिर जेल में इलाज की सुविधा और व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर चिंता जाहिर की है।
भोपाल केंद्रीय जेल में 17 अप्रैल 2018 को मोहम्मद अनवर पिता मोहम्मत छोटे खां की अचानक तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। जेल अधीक्षक ने इसकी जांच रिपोर्ट आयोग को दी, जिसमें बताया कि तबीयत बिगडऩे पर उसे हमीदिया रेफर किया गया, जहां उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस पर मानव अधिकार आयोग ने सख्त लहजे में जिम्मेदारों को कहा कि जेलों में चिकित्सा सुविधा इतनी दुरुस्त नहीं है कि वहां कैदियों का इलाज हो सके। आयोग ने कहा कि केंद्रीय जेलों में विशेषकर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, व रीवा जहां कैदियों की संख्या अधिक है, वहां जेल चिकित्सालयों में डॉक्टरों, स्वीकृत स्टाफ की व्यवस्था पुख्ता रखी जाए। इसमें पैरामेडिकल स्टाफ टेक्नीशियन और अन्य संसाधनों की समीक्षा की जाए। साथ ही कहा कि इन जेलों के चिकित्सालयों को कम से कम सिविल अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समकक्ष बनाया जाए ताकि कैदियों को अच्छा इलाज मिल सके। मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जैन का कहना है कि जेलों की सुविधा के मामले में आयोग की अनुशंसाओं का पालन कर लिया जाता है, लेकिन सहायता राशि देने के मामले में पालन कम होता है।

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