अब चुनाव में इनके बीच होगी जंग

अब चुनाव में इनके बीच होगी जंग

Amit Mishra | Publish: Nov, 11 2018 08:32:31 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

राजधानी की सात और भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों का लेखा-जोखा.....

भोपाल। विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा-कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों के चेहरे जनता के सामने रखे हैं। एक महीने से चल रही रायशुमारी, शक्ति प्रदर्शन, नेताओं की सक्रियता व लोकप्रियता जैसे मुद्दों पर विचार के बाद पार्टियों ने विपक्षियों का आकलन कर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। हर प्रत्याशी के पास सिपहसालार, रणनीतिज्ञों की टीम के साथ ताकत-कमजोरी है।


जनता के दरबार में होने वाले महामुकाबला के लिए सभी प्रत्याशियों ने कमर कस ली है।अपनी और विरोधी की ताकत-कमजोरी को परखने के बाद क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर प्रत्याशियों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के तीर बरसाने की तैयारी कर ली है। इन सबके बीच महामुकाबले को तैयार भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों का फैसला जनता 28 नवंबर को करेगी।

जनिए प्रत्याशियों की ताकत और कमजोरी को...

हुजूर विधानसभा क्षेत्र...

कोलार एवं संत हिरदाराम नगर में जलसंकट। गांधीनगर, कोलार में अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम। कलियोसोत नदी में अतिक्रमण। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की
जर्जर स्थिति।


रामेश्वर शर्मा, भाजपा
ताकत

2013 में रेकॉर्ड मतों से जीते थे। कर्मश्री संस्था के जरिये लोगों से जुड़ाव।क्षेत्र में पार्टी के पार्षदों का दखल। मजबूत संगठन का मिलेगा लाभ। संत हिरदाराम नगर में मर्जर समस्या का हल निकलने का मिलेगा लाभ।

कमजोरी
पार्टी के नेताओं का विरोध। ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर पकड़। मीना समाज में नाराजगी। कार्यकर्ताओं, कर्मचारियों-अधिकारियों को डराने एवं धमकाने वाले नेता की छवि।कोलार में विकास कार्य में भेदभाव अतिक्रमण को बढ़ावा देने के आरोप।

 

नरेश ज्ञानचंदानी, कांग्रेस
ताकत

संत हिरदाराम नगर में सिंधी समाज का जाना-पहचाना चेहरा। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता। मोतीलाल वोरा और दिग्विजय सिंह का मिला साथ।मिलनसार व्यक्तित्व। व्यापारी वर्ग, रियल स्टेट कारोबारियों में अच्छी पकड़।

कमजोरी
पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर पकड़। ग्रामीणों के लिए नया चेहरा। क्षेत्र में संगठन का कमजोर होना। कोलार क्षेत्र से दूरी।

 

नरेला विधानसभा क्षेत्र....

आपराधिक गतिविधियों का ग्राफ लगातार बढऩा। महिलाओं में असुरक्षा का भाव। क्षेत्र में अतिक्रमण पर अंकुश नहीं। कई क्षेत्रों में नर्मदा जलप्रदाय अभी तक नहीं हो पाया है। बारिश में नाले बनते हैं मुसीबत।

विश्वास सारंग, भाजपा

ताकत
दो बार से क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व संगठन और युवा कार्यकर्ताओं का साथ।क्षेत्र में सतत संपर्क, हर छोटे-बड़े कार्यक्रमों में मौजूदगी।अल्पसंख्यक वर्ग में पैठ। संबल योजना का सबसे अधिक लाभ दिलवाया। समाज के सभी वर्गो में संपर्क।

कमजोरी
क्षेत्र में आपराधिक तत्वों को संरक्षण देने की छवि। अपराध का बढ़ता ग्राफ। एक समान विकास नहीं करवा पाना। कई क्षेत्रोंं में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचना। पार्टी के पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप।
अतिक्रण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना।

 

महेंद्र सिंह चौहान, कांग्रेस
ताकत
पार्टी का पुराना चेहरा। क्षेत्र में अच्छी पकड़। युवाओं की टीम का साथ। भ्रष्टाचार और जर्जर सड़कों के खिलाफ प्रदर्शन एवं चुनरी यात्रा से जीवंत संपर्क।क्षेत्रीय मुद्दों की बेहतर समझ। क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों में उपस्थिति बनाए रखने के लिए सजग।


कमजोरी

नरेला से पहली बार चुनावी मैदान में। 2013 में बुदनी से चुनाव लड़े थे। इस क्षेत्र से टिकट के दावेदारों से सहयोग नहीं मिलने की आशंका।क्षेत्र के मतदाताओं को अपने पक्ष में लाना बड़ी चुनौती। त्क्षत्र में अपेक्षाकृत कमजोर संगठन।

 

द. पश्चिम विधानसभा क्षेत्र....

झुग्गी बस्तियों के विस्थापन में देरी। स्मार्ट सिटी के नाम पर शासकीय आवासों का टूटना। बड़ी आबादी को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलना। नेहरू नगर, कोटरा, न्यू मार्केट आदि क्षेत्रों में अतिक्रमण का बढ़ता दायरा।


उमाशंकर गुप्ता, भाजपा

ताकत
तीन बार से विधायक। महापौर रहे चुके हैं। इस बार चौथी बार मैदान में।क्षेत्र में भाजपा के कार्यकर्ताओं और संघ के लोगों का नेटवर्क। वल्लभ नगर, भीम नगर जैसी बस्तियों में विकास कार्य करवाए। आम जनता से सीधा संवाद।

 

कमजोरी
पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोप।
टीटी नगर में हरियाली उजडऩे और शासकीय आवास तोड़े जाने से कर्मचारी वर्ग में नाराजगी।काटजू अस्पताल के कायाकल्प मे देरी। न्यू मार्केट के आसपास अतिक्रमण हटाने में नाकामी।

 

पीसी शर्मा, कांग्रेस
ताकत
जनता से सीधा संपर्क। सहज उपलब्धता। जनसमस्याओं के निराकरण के लिए आंदोलनों में सक्रिय। मजबूत संगठन व टीम। इंजीनियर होने से निर्माण कार्यों की बेहतर जानकारी। क्षेत्र में कांग्रेस के छह पार्षद होने से तकरीबन हर वार्ड में पकड़।

कमजोरी

तीसरी बार चुनाव मैदान में। एक बार जीते तो दो बार हारे। भीम नगर, दुर्गा नगर, वल्लभ नगर आदि बस्तियों में कमजोर पकड़। मध्य से तैयारी थी, पर दक्षिण-पश्चिम से टिकट मिला। क्षेत्र में पार्टी के नेताओं का असहयोग।

मध्य विधानसभा क्षेत्र....

क्षेत्र में अतिक्रमण बड़ी समस्या है। फुटपाथ पर दुकानें लगाई जा रही हैं। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज चौराहा तक के मार्ग का चौड़ीकरण नहीं किया जा सका है। क्षेत्र में जर्जर सड़कें परेशानी बनी हुई हैं।

सुरेंद्रनाथ सिंह, भाजपा

ताकत
विधायक होने से क्षेत्र में पकड़ मजबूत की। कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क। मिलनसार व्यक्तित्व। स्थानीय कार्यक्रमों के जरिये जनता से जुड़ाव। युवाओं की टीम। सोशल मीडिया के जरिये युवाओं में बनाई पैठ।पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का साथ।


कमजोरी

क्षेत्र में गुमटियों और अतिक्रमण को बढ़ावा देने की छवि।
अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं में अपेक्षाकृत कमजोर पकड़। एमपी नगर में अव्यवस्थाओं से व्यापारी वर्ग की नाराजगी। विकास का एजेंडा और विजन नहीं।


आरिफ मसूद, कांग्रेस
ताकत
अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं में पैठ।सक्रिय नेता और क्षेत्र के तकरीबन सभी क्षेत्रों में पकड़। क्षेत्रीय मु्द्दों की समझ। जन आंदोलन आदि में भीड़ जुटाने में सक्षम।
धरना-प्रदर्शन आदि के चलते लगातार चर्चा में बने रहते हैं।

कमजोरी
तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़े, पर जीत नहीं मिली।
वर्ग विशेष के वोट बैंक पर फोकस करना। पूर्व के पुलिस प्रकरणों के कारण जनता में नकारात्मक छवि। कांग्रेस के एक धड़े का सहयोग नहीं मिलना।

गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र....
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में बंद होते उद्योग। बुनियादी सुविधाओं का अभाव। क्षेत्र में भेल, एम्स जैसे संस्थान हैं, पर रोजगार के अवसर नहीं होना। शहरी बस्तियों में सड़क-पानी-बिजली की समस्या।

कृष्णा गौर, भाजपा
ताकत
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की परंपरागत सीट विरासत के रूप में मिली। पुराने कार्यकर्ताओं का मजबूत संगठन। मिलनसार व्यक्तित्व। महापौर रहते हुए क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का लाभ। क्षेत्र में चार साल से सक्रियता।

कमजोरी

पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रही हैं। पार्टी के कई नेताओं का विरोध। परिवारवाद एवं बाबूलाल गौर के दबाव में टिकट दिए जाने के आरोप। गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र समेत बस्तियों में विकास कार्य नहीं किए जाना।
रूठों को मनाने में सफलता नहीं मिलना।


गिरीश शर्मा, कांग्रेस
ताकत

दो बार से पार्षद। क्षेत्रीय मुद्दों पर पकड़। जनता से संपर्क।
युवा चेहरा। केबल ऑपरेटर होने से क्षेत्र के अधिकतर घरों में सीधी पहुंच। तेजतर्रार छवि। जमीन से जुड़ाव और युवाओं की बेहतर टीम। पार्टी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क।

कमजोरी
पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से 40 साल से कांग्रेस प्रत्याशी नहीं जीता। समाज के अन्य वर्गों में संपर्क कम होना। क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ठोस एजेंडा नहीं होना। क्षेत्र की सभी बस्तियों में संपर्क नहीं।

उत्तर विधानसभा क्षेत्र

घनी आबादी वाले क्षेत्र में अतिक्रमण बड़ी समस्या है। कई क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। ट्रैफिक जाम से निजात नहीं मिल सकी है। बस्तियों में पेजयल संकट। पुराने शहर के लिए डवलपमेंट प्लान नहीं होना।

फातिमा सिद्दिकी, भाजपा

ताकत
युवा चेहरा। राजनीतिक परिवार से होने का मिलेगा फायदा।पिता रसूल अहमद सिद्दिकी द्वारा क्षेत्र में किए गए कार्य।
अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर पकड़। पहली बार चुनावी मैदान में होने से निर्विवाद छवि।

कमजोरी
कार्यकर्ताओं में स्वीकार्यता को लेकर असमंजस। क्षेत्र और क्षेत्रीय मुद्दों पर कमजोर पकड़। संगठन में सक्रियता नहीं होने से कार्यकर्ताओं से संपर्क नहीं होना। संगठन के भरोसे चुनाव मैदान में। क्षेत्र के लिए नया चेहरा।

आरिफ अकील, कांग्रेस
ताकत

पांच बार से विधायक। क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की टीम। लगातार चार बार से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं में गहरी पैठ का मिलता है फायदा।बस्तियों में विकास कार्यों को प्राथमिकता। सराय में लोगों के बीच उपलब्धता।

कमजोरी
अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं को अपने पक्ष में करने में अपेक्षाकृत कमजोर। क्षेत्रीय समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने के आरोप। नगरीय निकाय चुनाव में बेटे को जिताने में नाकाम रहना। कुछ क्षेत्रों पर ही ध्यान होने से अन्य क्षेत्रों के रहवासियों में नाराजगी।

बैरसिया विधानसभा क्षेत्र....

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाना। सौर ऊर्जा पम्प दिलवाने में क्षेत्र पिछड़ा। ग्रामीण मार्गों की जर्जर स्थिति। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट से निजात नहीं मिल
सकी है।

विष्णु खत्री भाजपा

ताकत
युवा चेहरा। पार्टी ने दूसरी बार क्षेत्र से बनाया प्रत्याशी।
शहरी क्षेत्र के मतदाताओं पर पकड़। संबल योजना का दिलाया लाभ। युवाओं को रोजगार से जोडऩे के लिए कार्य करना। पांच साल तक बिना किसी विवाद के जनता के बीच मौजूदगी।

कमजोरी
पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर की बगावत से नुकसान की आशंका।ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत पहुंच कम। विकास कार्य नहीं होने के आरोप। भोपाल में निवास होने से क्षेत्र में निरंतर उपलब्धता नहीं होना। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होना।


जयश्री हरिकरण, कांग्रेस

ताकत
पूर्व सांसद सुरेंद्रसिंह ठाकुर का समर्थन। पांच साल से क्षेत्र में सक्रियता। क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में उपस्थिति। लोगों से संपर्क। ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पकड़। संगठन के सभी नेताओं में स्वीकार्यता। महिला संगठनों में सक्रियता।

कमजोरी
पहली बार चुनावी मैदान में। बाहरी उम्मीदवार होने का आरोप। मुकाबले के लिए संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की चुनौती। सुरेंद्र सिंह ठाकुर के सहयोग के बगैर वजूद का संकट। क्षेत्रीय मुद्दों पर पकड़ कमजोर होना।

 

 

 

 

 

 

भोजपुर विधानसभा क्षेत्र....
क्षेत्र मे तकनीकी और कृषि महाविद्यालय नहीं होना। सड़क हादसों में तत्काल राहत के लिए सिविल अस्पताल, ट्रामा सेंटर की कमी। सुविधायुक्त खेल मैदान की कमी। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का अभाव।

सुरेंद पटवा, भाजपा

ताकत
पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की राजनीतिक विरासत के वारिस, क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क।बूथ लेवल तक संपर्क, योजनाओं का लाभ जनता को दिलाने का सतत प्रयास। लगातार दो बार से विधायक रहने से लोगों से संपर्क। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन।

कमजोरी
क्षेत्र का मतदाता नहीं होने से बाहरी प्रत्याशी होने के लगते रहे हैं आरोप।संगठन के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर नहीं कर पाना। पार्टी के स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर विश्वास नहीं, अनदेखी के आरोप।
क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण नहीं कराने के आरोप।


सुरेश पचौरी, कांग्रेस

ताकत
भोजपुर विधानसभा क्षेत्र का स्थानीय प्रत्याशी होना।एक साल से क्षेत्र को सेक्टरों में बांटकर कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करना। पार्र्टी में गुटबाजी को दूर कर वरिष्ठ एवं युवाओं को बढ़ावा देना। आदिवासी बेल्ट में सक्रियता, छोटे कार्यकर्ताओं तक पहुंच।

कमजोरी
अब तक विधानसभा और लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाना। विधानसभा चुनाव हारने के बाद चार साल तक क्षेत्र से दूरी बनाए रखना। केंद्रीय मंत्री रहते हुए क्षेत्र में विकास में अनदेखी के आरोप। क्षेत्र में बूथ लेवल तक के कार्यकर्ताओं की कमी।

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