महारानी कामेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर: यहां बाल स्वरूप में विराजमान हैं जगत जननी, बच्चों की तरह पूरे किए जाते हैं शौक

यहां सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगता है, वह पूरी होती है....

By: Ashtha Awasthi

Published: 11 Oct 2021, 12:33 PM IST

भोपाल। आम्र विहार कोलार रोड स्थित पहाड़ी के ऊपर बना महारानी कामेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। यहां माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां महारानी कामेश्वरी बाल स्वरूप में विराजमान है। इसलिए यहां श्रृंगार के रूप में माताजी के हर शौक पूरे किए जाते हैं। नए कपड़े चप्पल, सेंडिल, चश्मा, घड़ी सहित अन्य सामग्री माता रानी को अर्पित की जाती है। यहां सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगता है, वह पूरी होती है।

 

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1999 में हुई थी मंदिर की स्थापना

इस मंदिर की स्थापना 1999 में हुई थी। मंदिर की देखरेख कर सभी व्यवस्था संभालने ओमप्रकाश महाराज ने ने बताया कि पहले यहां घनघोर जंगल हुआ करता था। यहां दिन में भी आने से लोग डरते थे। इसके बाद 1999 में इस मंदिर की स्थापना की गई। यहां माता रानी बाल स्वरूप में है, इसलिए बच्चों की तरह माता रानी की देखभाल की जाती है, उनके हर शौक पूरे किए जाते हैं और विभिन्न साजो सामान अर्पित कई श्रद्धालु भी विभिन्न सामग्री यहां आकर अर्पित करते हैं। जब सामग्री अधिक हो जाती है तो उसे कन्याओं को बांट दिया जाता है।

मंदिर में न कोई टस्ट समिति है और न ही कोई दानपेटी

अब यह पहाड़ी धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हो चुकी है। पहाड़ी पर मां दुर्गा के अलावा नौ देवियां, मां काली मंदिर, बारह ज्योर्तिलिंग, करवा चौथ का मंदिर, राम दरबार सहित अन्य मंदिर भी है। साल में तकरीबन चार बार यहां जनकल्याण के लिए हवन होते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक ओमप्रकाश महाराज ने बताया कि यहां न तो कोई ट्रस्ट्र समिति है और न ही दानपेटी। श्रद्धालु स्वेच्छा से सामग्री अर्पित करते हैं।

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