scriptmakar sankaranti news bhopal | सूर्य ने किया मकर राशि में प्रवेश, संक्रांति का विशेष पुण्यकाल आज, होगी सूर्यदेव की आराधना,तीर्थों में होगा स्नानदान | Patrika News

सूर्य ने किया मकर राशि में प्रवेश, संक्रांति का विशेष पुण्यकाल आज, होगी सूर्यदेव की आराधना,तीर्थों में होगा स्नानदान

- मकर संक्रांति आज शुक्रवार से शुरू हो गया सक्रांति का उल्लास, पूजन

 

-अनुष्ठान शुरू, भगवान को लग रहा तिल गुड़ के व्यंजनों का भोग

 

- ज्योतिषी, पंडितों के अनुसार शनिवार को सूर्योदय से लेकर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा विशेष पुण्यकाल

भोपाल

Published: January 15, 2022 12:47:11 am

भोपाल. सूर्यदेव की आराधना, स्नानदान और शुभ कार्यों के प्रारंभ का शंखनाद लेकर आ रहा खुशियों का पर्व मकर संक्रांति भले ही शनिवार को मनाया जाएगा लेकिन पर्व का उत्साह और उल्लास शुक्रवार से ही प्रारंभ हो गया। ज्योतिषियों के अनुसार मकर संक्रांति शनिवार सुबह से विशेष फलदायी होगी। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को रात्रि आठ बजे के बाद हो गया है। मकर संक्रांति पर श्रद्धालु उत्तरायण सूर्य को अघ्र्य देकर आराधना करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही मकर संक्रांति का आगमन माना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना के साथ तीर्थ स्थलों पर दान पुण्य करने का विशेष महत्व है। पं. विष्णु राजौरिया के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात्रि 8 बजकर 41 मिनट पर होगा। इसलिए इसका विशेष पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 की रात्रि में हुआ है, इसलिए इसका विशेष पुण्यकाल 15 को सूर्योदय से लेकर रहेगा। मंदिरों में होगी विशेष पूजा अर्चना शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थ स्थलों पर पवित्र स्नान करने पहुंचेंगे। मंदिरों और घरों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भगवान को तिल गुड़ के व्यंजन, खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा, और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगेगी। साथ ही इस दिन तिल का उबटन लगाकर स्नान और तिल से बने व्यंजनों का भी विशेष महत्व बताया गया है। शहर के गुफा मंदिर, बड़वाले महादेव मंदिर, बांके बिहारी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दिन भर खुला रहेगा बिड़ला मंदिर लक्ष्मीनारायण बिड़ला मंदिर मकर संक्रांति पर्व के चलते 15 जनवरी को दिन भर खुला रहेगा। मंदिर के प्रबंधक केके पांडेय ने बताया कि संक्रांति पर्व पर मंदिर के पट सुबह 6 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक खुले रहेंगे। संक्रांति पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होगी और भगवान को तिल के पकवान अर्पित किए जाएंगे। अगर 14 जनवरी को मंदिर में दर्शनार्थी ज्यादा आते हैं, तो 14 को भी मंदिर के पट दिन भर खुले रखे जाएंगे। धार्मिक और प्राकृतिक महत्व का पर्व मकर संक्रांति पर्व का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही प्राकृतिक महत्व भी है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना ही मकर संक्रांति कहलाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। इस दिन स्नान, दान, तप, जप और अनुष्ठान का अत्यधिक महत्व है। इसके साथ ही इस दिन तिल का उबटन लगाकर स्नान और तिल गुड़ के बने पकवान खाने का भी विशेष महत्व है। उत्तरायण सूर्य के साथ धीरे-धीरे दिन बड़े और रात छोटी होने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस दिन तिल और गुड़ का सेवन इसलिए किया जाता है कि तिल में कार्बोहाइड्रेट,कैल्शियम तथा फॉस्फोरस पाया जाता है। इसमें विटामिन बी और सी भी काफी मात्रा में होता है। मौसम का भी धीरे-धीरे परिवर्तन शुरू होता है, लिहाजा इस समय अपाच्य की शिकायत अधिक रहती है, और तिल गुड़ यह पाचक, पौष्टिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्य रक्षक है। गुड़ में भी अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ होते हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन और विटामिनों भरपूर मात्रा में होता है। गुड़ जीवन शक्ति बढ़ाता है। शारीरिक श्रम के बाद गुड़ खाने से थकावट दूर होती है और शक्ति मिलती है। गुड़ खाने से ह्दय भी मजबूत बनता है और कोलेस्ट्रॉल घटता है।ऐसा होगा संक्रांति का स्वरूप - वाहन- बाघ -उपवाहन- अश्व- वस्त्र- पीत वस्त्र - गदा लिए हुए- चांदी का पात्र - खीर का भक्षण- कुमकुम लेपन - नाग जाति - मोती के आभूषण - पर्ण की कंचुकी - कुमारी अवस्था - आसन पर बैठे हुए- दक्षिण में गमन किस राशि के लिए कैसे होगी संक्रांति और क्या करेमेष- धन हानि, सावधानी रखे वृषभ-मांगलिक कार्य में व्यतता रहेगीमिथुन- कार्य सिद्धि से आत्म संतोषकर्क- आर्थिक लाभ के कार्यो में सफलतोसिंह- विवाद से बचे कन्या- सांस्कृतिक, साहित्य में कार्य में अभिरूचि तुला-यश और सम्मान की प्राप्ति वृश्चिक- राजकीय क्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ेगीधनु- अज्ञात भय रहेगा संयम रखे मकर- धार्मिक कार्यों को सम्पन्न करेंगे कुंभ- रूके हुए कार्य सम्पन्न होंगे मीन- कोर्ट कचहरी और अन्य क्षेत्र में विजय प्राप्त होगी इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी और कंबल का दान करना विशेष फलदायी माना गया है। पं. विष्णु राजौरिया
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