MP के मेडिकल कॉलेजों में होगी IIT जैसी पढाई, फीस भी होगी कम, ये है PLAN

MP के मेडिकल कॉलेजों में होगी IIT जैसी पढाई, फीस भी होगी कम, ये है PLAN
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यदि प्रबंधन की व्यवस्था डीन के हाथ में आती है, तो अब प्रबंधन को लंबे इंतजार के कारण आने वाली परेशानियां नहीं उठानी पड़ेगी।

भोपाल। अब जल्द ही मेडिकल कॉलेज आईआईटी प्रबंधन की तर्ज पर काम किया जाएगा। प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप के कारण कई बार भारी परेशानी झेल रहे मेडिकल कॉलेजों  में प्रबंधन की सारी व्यवस्था कॉलेज डीन के हाथ में ही आ जाएगी।दरअसल गांधी मेडिकल कॉलेज करीब 16 साल से 15 करोड़ की लीनियर एक्सीलरेटर मशीन खरीदी का प्रयास कर रहा है। यह कभी सरकारी मंजूरी तो कभी टेंडर प्रक्रिया अटकने के चलते बाधित ही है। यानी इन पर सरकारी तंत्र हावी है। इससे मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चाहकर भी काम नहीं कर पाता। पर यदि प्रबंधन की व्यवस्था डीन के हाथ में आती है, तो अब प्रबंधन को लंबे इंतजार के कारण आने वाली परेशानियां नहीं उठानी पड़ेगी।







जानें मेडिकल कॉलेजेस में प्रबंधन के ये फैक्ट

* चिकित्सा शिक्षा विभाग मेडिकल कॉलेजों में आईआईटी की तर्ज पर कॉर्पोरेट बॉडी बनाना चाहता है। 
* रविवार को स्वास्थ्य आयुक्त मनीष रस्तोगी और डायरेक्टर डॉ. उल्का श्रीवास्तव के बीच एक बैठक आयोजित की गई थी।
* रस्तोगी के मुताबिक इस मामले में फिलहाल प्रारंभिक स्तर की बातचीत ही हुई है।
* अभी इसके फायदे-नुकसान पर भी चर्चा की जाएगी, उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
* अब तक इन कॉलेजों में प्रबंधन को 50 लाख से ज्यादा की खरीदारी के लिए शासन से मंजूरी जरूरी होती है।


* नई मशीन, कोर्स या अन्य सुविधाओं को शुरू करने की प्रक्रिया लंबी है।
* निर्णय लेने के लिए कई अधिकारी, ऐसे में काम लंबे समय तक अटका रहता है।
* यदि नई व्यवस्था होती है, तो सभी अधिकार डीन के पास होंगे। 
* डॉक्टरों, कर्मचारियों की भर्ती आसान हो जाएगी।
* छोटी से लेकर बड़ी से बड़ी जरूरतों के लिए खुद निर्णय लेंगे।


* उपकरणों की खरीदी आसान होगी।
* कॉलेज के पास फंड की कमी नहीं होगी, अपनी तरह से इस्तेमाल कर सकता है।
* वर्तमान में मेडिकल कॉलेजों में ऑटोनोमस बॉडी के साथ सरकारी तंत्र भी हावी रहता है। 
* सरकार ने जांच और मरीजों से लिए जाने वाले सारे शुल्क खत्म कर दिए। सरकार पैसे देती है तो दखल भी देती है।

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