मंत्री हारे, भाजपा का वोट बैंक भी घटा, बसपा ने बढ़ाई मुश्किल

दमोह लोकसभा सीट के समीकरण हाल के विधानसभा चुनाव से बदल गए

By: harish divekar

Updated: 19 Jan 2019, 08:36 PM IST

 

भाजपा के गढ़ दमोह लोकसभा सीट के समीकरण हाल के विधानसभा चुनाव से बदल गए हैं।

वित्त मंत्री रहे दिग्गज भाजपा नेता जयंत मलैया की हार और बगावत से भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रहलाद पटेल दो लाख से अधिक वोटों से जीते थे। लेकिन अब भाजपा-कांग्रेस के बीच महज 16 हजार वोट का अंतर रह गया है।

दमोह जिले की एक सीट पर बसपा की महिला विधायक की जीत ने सांसद पटेल की मुश्किल बढ़ा दी है। उनके लिए राहत की बात यही है कि इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस के पास बड़ा चेहरा नहीं है।
दमोह, सांगर और छतरपुर की आठ सीटों को मिलाकर गठित दमोह लोकसभा सीट पर बीते 30 साल से भाजपा का कब्जा है।

यहां उसके प्रत्याशी एकतरफा जीत दर्ज करते रहे हैं। लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरण बदले हैं।

 

दमोह से चार बार के सांसद डॉ रामकृष्ण कुसमारिया हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा से विद्रोह कर दिया था।

दमोह और पथरिया सीटोंसे निर्दलीय उतरे। अधिक वोट तो कुसमारिया नहीं जुटा सके। पर भाजपा की भारी फजीहत करा दी।

इस विद्रोह के चलते दमोह सीट से पूर्व वित्त मंत्री मलैया की हार हुई और पथरिया से बसपा ने जीत दर्ज की।

भाजपा के लिए चिंता का विषय पार्टी नेताओं में टकराव है। सांसद पटेल, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और मलैया की राह अलग ही रही है। उनके मतभेद का असर हाल के विधानसभा चुनाव में साफ नजर आया जब पहली बार वोटों का गणित भाजपा के खिलाफ हुआ है।

--------------------
सदन में मुखर, क्षेत्र में उपलब्धियां कम

अटलबिहारी बाजपेयी कैबिनेट में राज्यमंत्री रह चुके प्रहलाद पटेल संसद में खासे सक्रिय रहे हैं।

सदन में 94 प्रतिशत उपस्थिति के साथ ही 180 डिबेट में हिस्सा लिया और 443 प्रश्न लगाए।

 

उन्होंने 12 प्राइवेट बिल भी पेश किया।

उनकी इस मुखरता का अधिक लाभ दमोह क्षेत्र को नहीं मिला।

रुक्मिणी प्रतिमा का मामला सदन में उठाया, उड़द का मामला शून्यकाल में उठाया।

गौ-अभयारण्य व भारत-तिब्बत सीमा पुलिस हथियारों का प्रशिक्षण केंद्र की सौगात दमोह को दिलाई।

सांसद ग्राम गोद लेने की बारी आई तो भाजपा के आठों विधानसभा के पदाधिकारियों से वोटिंग कराई।

इसके बाद प्रसिद्ध बांदकपुर जागेश्वरनाथधाम तीर्थ को गोद लिया और विकास कार्य मंजूर कराए।

पांच साल में अपनी सांसद निधि के माध्यम से 593 कार्य पूर्ण कराए। हालांकि नजर दौड़ाओ तो ऐसा बड़ा कार्य नजर नहीं आता जो मील का पत्थर साबित हो सके।

harish divekar
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned