दिग्विजय सिंह से भिड़कर भी झारखंड में संभाला मोर्चा, राहुल गांधी के हैं करीबी सिंघार, परिणाम अच्छे आएं तो बढ़ेगा 'कद'

राहुल की सभाओं को लेकर सिंघार झारखंड में खुद रहते हैं एक्टिव

भोपाल/ कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह से खुलेआम भिड़कर उनकी ऐसी-तैसी करने वाले मध्यप्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है। उस जिम्मेदारी को संभालने के लिए उमंग सिंघार झारखंड में कैंप किए हुए हैं। सिंघार झारखंड में चुनाव के सह प्रभारी हैं। अपनी टीम के साथ करीब एक महीने से वह वहीं कैंप किए हुए हैं।

ऐसे में कहा जा रहा है कि दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता से भिड़ने के बाद भी पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है। अगर झारखंड के चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो राष्ट्रीय फलक पर सिंघार का कद और बढ़ेगा। सिंघार की गिनती पहले से ही राहुल गांधी की करीबियों में होती है। हालांकि झारखंड चुनाव के स्टार प्रचारकों की सूची में ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी था। लेकिन दो चरण के चुनाव संपन्न होने के बाद भी वह वहां प्रचार के लिए नहीं गए हैं।

5_1.jpg

राहुल के करीबी हैं सिंघार
झारखंड चुनाव में अभी तक राहुल गांधी कई सभा कर चुके हैं। सोमवार को भी रांची से सटे बड़कागांव में राहुल गांधी की चुनावी सभा थी। वहां भी उमंग सिंघार पूरी तरह से एक्टिव दिखे हैं। सिंघार राहुल की सभा से पहले वहां की तैयारियों का जिम्मा भी संभाले हुए थे। झारखंड चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जो कोर टीम तैयार की है, उसमें सिंघार की भूमिका अहम है। वहां वह प्रभारी आरपीएन सिंह के साथ मिलकर तमाम रणनीति पर काम कर रहे हैं।

3_4.jpg

झारखंड में पांच चरणों में होने हैं चुनाव
आदिवासी बहुल झारखंड में पांच चरणों में चुनाव होने हैं। अभी तक दो चरणों में चुनाव संपन्न हो गए हैं। झारखंड में राजद, जेएमएम और कांग्रेस के बीच गठबंधन है। झारखंड के 81 में से 31 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए सिंघार खूब चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस इस बार प्रदेश में बारह से पंद्रह सीट जीतेगी। और कांग्रेस गठबंधन की ही सरकार बनेगी।

1_4.jpg


एमपी का इस्तेमाल झारखंड में
वन मंत्री उमंग सिंघार मध्यप्रदेश से अपनी टीम के साथ गए हैं। वहां कमलनाथ की सरकार के द्वारा आदिवासियों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं का भी खूब जिक्र करते हैं। उनमें सबसे ज्यदा आदिवासियों के लिए औषधि खेती और पेड़ों की कटाई के नियम सरल किए जाने की बात कर रहे हैं।

2_3.jpg

दिग्विजय सिंह से भिड़ गए थे सिंघार
दरअसल, पिछले दिनों दिग्विजय सिंह के द्वारा मंत्रियों को चिट्ठी लिखे जाने के बाद वन मंत्री उमंग सिंघार ने मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि उन्हें चिट्ठी लिखने की क्या जरूरत है, पर्दे के पीछे से सरकार वहीं चला रहे हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश में हंगामा मच गया था। फिर दोनों का विवाद केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा उसके बाद सिंघार शांत हुए।

झाबुआ से रखा गया दूर
सिंघार मध्यप्रदेश में आदिवासियों के बड़े नेता हैं। लेकिन झाबुआ उपचुनाव में उन्हें वहां से दूर रखा गया। वो भी तब जब झाबुआ आदिवासी बहुल इलाका है। दिग्विजय सिंह के साथ विवाद के बाद सीएम कमलनाथ ने भी कभी उमंग सिंघार के साथ मंच शेयर नहीं किया। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। उसके बाद सिंघार ने वहां जाकर मोर्चा संभाल लिया था।

4_3.jpg

नतीजे अच्छे आए तो बढ़ेगा कद
अगर झारखंड चुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए तो उमंग सिंघार का कद पार्टी में बढ़ सकता है। क्योंकि जब प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चा चल रही थी। तो उस रेस में उमंग सिंघार का भी नाम था। कहा जा रहा था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस इस बार आदिवासियों को साधने के लिए आदिवासी चेहरे पर दांव लगा सकती है। ऐसे में सभी को इंतजार झारखंड चुनाव के नतीजे के ही हैं।

Show More
Muneshwar Kumar
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned