प्रदेश के लिए मंत्री लगा रहे दिल्ली दौड़, कहीं पैसे की किल्लत, तो कहींं विकास की फिक्र

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- पैसे और योजनाओं की मांग लेकर दिल्ली फेरे बढ़े
- एक महीने में करीब एक दर्जन मंत्री दिल्ली हो आए
- केंद्रीय अंश की किस्तें भी नहीं मिली, राहत भी बाकी
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Jitendra Chourasiya, भोपाल। प्रदेश में विकास योजनाओं और पैसे की मांग को लेकर सरकार के मंत्रियों को दिल्ली दौड़ लगाना पड़ रही है। दरअसल, कोरोना संकट के कारण आर्थिक व्यवस्था गड़बड़ाई है, जिसके चलते मंत्रियों को केंद्रीय मदद के लिए बार-बार गुहार लगाना पड़ी है। केंद्र की योजनाओं में राशि आने में दिक्कत हैं, जिसके चलते कई मंत्रियों को दिल्ली जाना पड़ा। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं में भी केंद्रीय अंश की जरूरत है। इस कारण बीते एक महीने में करीब दर्जनभर मंत्री दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से विभिन्न मांगों को लेकर मिले हैं। इनमें कोई अपने विधानसभा या जिले में विकास को लेकर मांग कर रहा है, तो कोई अटकी हुई किस्तों का तकाजा कर रहा है। बहरहाल, सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी सभी मंत्रियों और अफसरों को केंद्र से ज्यादा से ज्यादा आर्थिक मदद लेने के लिए कहा है। इसके तहत विभिन्न योजनाओं की बची राशि का तकाजा किया जा रहा है।
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चुनावी गणित सामने-
दरअसल, करीब ढ़ाई साल बाद विधानसभा चुनाव होना है। उसके पहले मंत्रीगण अपने जिले, विधानसभा और विभाग की विकास योजनाओं को पूरा करना चाहते हैं। ताकि, चुनाव के वक्त उन योजनाओं का सियासी लाभ मिल सके। योजनाओं के क्रियान्वयन में भी समय लगना है, इस कारण अटकी राशि के तकाजे बढ़े हैं। साथ ही क्षेत्रीय विकास की नई मांगें भी बढ़ी हैं।
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तुलसी सिलावट, मंत्री, जल संसाधन-
01 व 02 सितंबर को दौरा। केंद्रीय मंत्री जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात। केन बेतवा योजना व वित्तीय मुद्दों पर चर्चा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, धमेंद्र प्रधान व नितिन गडकरी से मुलाकात की। इन सभी मंत्रियों से इंदौर की विकास योजनाओं को लेकर चर्चा की।
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भूपेंद्र सिंह, मंत्री, नगरीय प्रशासन-
08 व 16 सितंबर को दौरा। आठ सितंबर को केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्यक्रम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की। पीएम आवास, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन की बची राशि मांगी। करीब 973 करोड़ की मांग। 16 सितंबर को केंद्रीश शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान से खुरई में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग को लेकर मुलाकात।
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प्रद्युम्र सिंह तोमर, मंत्री, ऊर्जा विभाग-
14 अगस्त और 07 सितंबर को दिल्ली दौरा। पहले दौरे में केंद्रीय विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह से मुलाकात। अटकी 7206 करोड़ की राशि की मांग की। बिजली की अन्य योजनाओं पर भी चर्चा की। इसके बाद दूसरे दौरे में अन्य मंत्रियों से मुलाकात। क्षेत्र की विकास योजनाओं पर भी इन दोनों में चर्चा की।
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गोपाल भार्गव, मंत्री, लोक निर्माण विभाग-
दिल्ली दौरे में लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। इसमें विभिन्न सडक़ों के प्रोजेक्ट व राशि पर चर्चा। इसके अलावा इससे पूर्व के अन्य दौरे में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व प्रहलाद पटेल से भी मुलाकात की थी।
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कमल पटेल, मंत्री, कृषि विभाग-
26 अगस्त कृषि अनुसंधान परिषद की बैठक में शिरकत और केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात। प्रदेश की कृषि योजनाओं पर चर्चा की। इससे पूर्व 06 अगस्त को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात।
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इन मंत्रियों ने भी किया है दिल्ली दौरा-
बीते दो महीने में प्रदेश के मंत्रियों में ओमप्रकाश सखलेचा, जगदीश देवड़ा, महेंद्र सिंह सिसौदिया, गोविंद सिंह राजपूत और उषा ठाकुर ने भी दिल्ली दौरा किया है। ये सभी मंत्री अलग-अलग कारणों से दिल्ली गए। कोई बजट व योजना को लेकर तो कोई विभागीय बैठकों के लिए दिल्ली पहुंचा। इन सभी ने विभागीय योजनाओं पर बात की।
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केंद्रीय हिस्सा भी अभी बाकी-
केंद्र से मिलने वाले केंद्रांश की किस्तें भी अभी अटकी है। दरअसल, कोरोना के कारण केंद्र के राजस्व पर भी असर आया है। इसलिए राज्यों की किस्तों में देरी हुई है। प्रदेश को केंद्रांश से करीब 52 हजार करोड़ रुपए मिलते थे, लेकिन बीते साल यह घटकर करीब 44 हजार करोड़ रह गए हैं। विभिन्न कटौती के कारण राशि घटी थी। यह राशि अभी मिलना बाकी है।
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केंद्रीय राहत भी अभी है बाकी-

केंद्रीय मुआवजे की राशि भी मिलना अभी बाकी है। दरअसल, ग्वालियर-चंबल बाढ़ के समय आपदा कोष से राशि को खर्च कर दिया गया। इसके करीब साढ़े सात सौ करोड़ की किस्त अभी मिलना बाकी है। राज्य सरकार ने इस राशि को जल्द देने का तकाजा किया है। इसके अलावा बाढ़ से हुए नुकसान का फायनल आकलन करके उसका मुआवजा भी मांगा जाएगा। अभी इसमें भी कोई राशि नहीं मिल पाई है।
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शिवराज भी जा चुके हैं दिल्ली-
सीएम शिवराज सिंह चौहान भी बीते महीने राज्य की बकाया किस्तों की मांग को लेकर दिल्ली जा चुके हैं। दिल्ली दौरे में शिवराज ने भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सहित अन्य मंत्रियों से बकाया किस्तों की मांग की थी। शिवराज भी आधा दर्जन मंत्रियों से राज्य की विकास योजनाओं व अटकी राशि को लेकर मुलाकात कर चुके हैं। 11 जुलाई को दौरे में शिवराज ने केंद्रीय कृषि और सामाजिक न्याय विभाग की योजनाओं में प्रदेश के लिए विभिन्न योजनाओं में करोड़ों मांगे थे। इसके अलावा केंद्र-राज्य के अंश में केंद्रांश बढ़ाने की मांग की थी। 27 जुलाई को दौरे में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात कर राशि व योजनाओं पर चर्चा की।
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जीतेन्द्र चौरसिया Reporting
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