मिशन उपचुनाव : हारे बूथों पर फोकस, मंडल स्तर तक नेटवर्किंग

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- दूसरी पंक्ति के नेताओं को भी मैदान में उतारना शुरू, हारे बूथों की लिस्टिंग, बैठकों में सियासी रंग
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[email protected]भोपाल। प्रदेश में उपचुनावों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा चुनावी मोड में आ गई है। भाजपा ने प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों पर चुनावी व्यूहरचना शुरू कर दी है। इसके तहत 13 मंत्रियों को तीन विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर जिम्मेदारी देने के बाद अब मंडल स्तर तक की बैठकों पर फोकस करना तय किया गया है। इसके अलावा भाजपा पिछले चुनावों में हारे हुए बूथों पर विशेष तौर पर ध्यान दे रही है। जिन बूथों पर पिछले चुनाव में शिकस्त मिली थी, उन सभी बूथों का डाटा-बेस तैयार किया जा रहा है। हर जगह भौगोलिक व सियासी मापदंडों के आधार पर चुनाव की रणनीति बनाई जाएगी। इसके लिए संबंधित मंत्रियों और उनके संगठन के सहयोगी नेताओं की रिपोर्ट के आधार पर काम होगा।
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दरअसल, प्रदेश में कोरोना कम होने के साथ यह उम्मीद बंध गई है कि अक्टूबर-नवंबर में उपचुनाव कराए जा सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी इसी हिसाब से तैयार की है। हालांकि फिलहाल निकाय चुनाव छह महीने के लिए टाल दिए गए हैं, लेकिन यदि कोरोना इसी तरह काबू में रहता है तो उपचुनाव कराए जा सकते हैं। इस कारण भाजपा ने अपनी नेटवर्किंग शुरू कर दी है। इसके तहत सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर नेताओं को जिम्मेदारी बांटकर मैदान में उतारना शुरू किया गया है। राज्य स्तर पर मंत्री औरसंगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां देने के बाद जिला और मंडल स्तर पर भी टीमों के गठन पर फोकस किया जाना है। उपचुनाव वाली सीटों पर बकायदा पिछले चुनाव में हारे बूथों की लिस्ट बनाकर काम करना तय किया गया है। कुछ जगह इसका काम भी शुरू हो गया है। जहां ज्यादा वोटों से भाजपा पीछे थी, उन बूथों को प्राथमिकता में रखा गया है। इसके अलावा दूसरी पंक्ति के क्षेत्रीय क्षत्रपों में जिस नेता का जहां प्रभाव है, वहां उसको काम की जिम्मेदारी दी जा रही है।
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मंडल बैठकों में सियासी रंग चढ़ा-
केंद्रीय नेतृत्व ने भाजपा को 31 जुलाई के पहले मंडल स्तर की बैठकें करके रिपोर्ट देने के लिए कहा था। इसके तहत मंडल स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है, लेकिन अब इसमें सियासी रंग चढ़ गया है। अभी पचास फीसदी मंडल स्तर पर भी बैठकें पूरी नहीं हो सकी है। इस कारण केंद्रीय नेतृत्व से इसके लिए अतिरिक्त मोहलत मांगी जाएगी। बहरहाल, अभी उपचुनाव वाली सीटों पर मंडल स्तर की बैठकें पहले करने पर फोकस किया जा रहा है। इन बैठकों में भी चुनाव के हिसाब से प्रबंधन के निर्देश दे दिए गए हैं।
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जीतेन्द्र चौरसिया Reporting
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