सतना लोकसभा: जातिगत समीकरण को कैसे साधेगी कांग्रेस? सिद्धार्थ ने बढ़ाई राजाराम की मुश्किलें

सतना लोकसभा: जातिगत समीकरण को कैसे साधेगी कांग्रेस? सिद्धार्थ ने बढ़ाई राजाराम की मुश्किलें

Pawan Tiwari | Publish: Apr, 23 2019 12:03:52 PM (IST) | Updated: Apr, 23 2019 12:12:46 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

सतना लोकसभा: जातिगत समीकरण को कैसे साधेगी कांग्रेस? सिद्धार्थ ने बढ़ाई राजाराम की मुश्किलें

भोपाल. मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। सतना विधानसभा सीट से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने खुद को लोकसभा चुनाव से अलग कर लिया है। सिद्धार्थ कुशवाहा के लोकसभा चुनाव से अलग होने के कारण कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम त्रिपाठी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हाल ही में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की 15 साल बाद सरकार बनी है। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस का प्रदर्शन विंध्य क्षेत्र में अच्छा नहीं रहा था। रीवा जिले की आठों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है जबकि सतना जिले की सात सीटों में से पांच पर भाजपा को जीत मिली है जबकि कांग्रेस के खाते में केवल दो सीटें आई हैं।

 

क्या कहा था सिद्धार्थ कुशवाहा ने
सिद्धार्थ कुशवाहा का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो कह रहे हैं कि, मैं पार्टी में उस वक्त शामिल हुआ था, जिस वक्त पार्टी बुरे दौर से गुजर रही थी। उस वक्त पार्टी नेतृत्व ने वादा किया था कि आपके समाज के लोगों को पूरा सम्मान दिया जाएगा। 2018 विधानसभा चुनाव में समाज के तीन लोगों को टिकट दिया गया, जिनमें दों लोगों ने चुनाव जीतकर विधानसभा भी पहुंचे। इसके अलावा पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भी समाज के लोगों को टिकट देने का वादा किया था, लेकिन टिकट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को टिकट नहीं मिलने से लोग नाराज हैं, ऐसे में हम इस चुनाव से दूर रहेंगे और किसी के लिए प्रचार नहीं करेंगे।

सिद्धार्थ की नाराजगी कांग्रेस के लिए मुश्किल क्यों?
सतना लोकसभा सीट से कांग्रेस ने इस बार राजाराम त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है। सतना सीट पर आखिरी बार कांग्रेस को 1991 में जीत मिली थी। अर्जुन सिंह ने यहां 1991 में चुनाव जीता था। उसके बाद ये यहां कांग्रेस जीत के लिए उम्मीदवार बदलती रही पर जीत नहीं मिली। सिद्धार्थ कुशवाहा सतना में कुशवाहा जाति के बड़े नेता हैं। उनके पिता खुशलाल कुशवाहा भी समाज के बड़े नेता थे। सतना जिले में करीब 1 लाख 13 हजार कुशवाहा वोटर्स हैं। ऐसे में अगर सिद्धार्थ कुशवाहा राजाराम त्रिपाठी के प्रचार के लिए मैदान में नहीं आते हैं तो कुशवाहा वोटरों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ जाती है। बसपा ने अच्छेलाल कुशवाहा को टिकट दिया है। वहीं, विंध्य की रीवा और सतना सीट पर बसपा का अच्छा प्रभाव है।

 

सतना के जातिगत समीकरण
सतना लोकसभा में करीब 1 लाख क्षत्रिय, 1 लाख 23 हजार पटेल, 65 हजार वैश्य, अनुसूचित जाति के 1 लाख 47 हजार, अनुसूचित जन जाति के 1 लाख 37 हजार वोटर्स हैं। ब्राह्मणों की संख्या 3.50 लाख के करीब है। सतना से राजाराम त्रिपाठी को मैदान में उतारकर ब्राह्मण को साधने की कोशिश की है। वहीं, भाजपा ने क्षत्रिय और पटेल वोटों को साधने के लिए सतना सीट से एक बार फिर से गणेश सिंह को मैदान में उतारा है।

कौन हैं सिद्धार्थ कुशवाहा
सिद्धार्थ कुशवाहा 2015 मे कांग्रेस में शामिल हुए थे। 2018 विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर सतना से चुनाव लड़ा और चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। सिद्धार्थ कुशवाहा पूर्व सांसद सुखलाल कुशवाहा के बेटे हैं। सुखलाल कुशवाहा ने 1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को चुनाव हराया था।

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