एमपी मेें इस साल 10 हजार से अधिक कर्मचारी होंगे रिटायर, अप्रेल से शुरू होगा सिलसिला

- तत्कालीन शिवराज सरकार ने सेवानिवृत्ति आयु 60 से की थी 62 वर्ष

- नई नियुक्तियों के साथ संविदा से रिक्त पदों को भरे जाने की तैयारी

- इसके बाद भी खाली रहेंगे चार हजार पद

भोपाल। तत्कालीन शिवराज सरकार ने राज्य कर्मचारी-अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की थी। इस कारण अब अप्रैल से इनकी सेवानिवृत्ति होना शुरु हो जाएगी। इस एक साल में 10 हजार से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति को देखते हुए सरकार सक्रिय हुई है। प्रयास यही है कि इसका असर सरकारी काम-काज पर न पड़े। वित्त विभाग में खजाने पर आने वाले बोझ से बचने के लिए माथापच्ची शुरू कर दी है। विभाग ने तत्कालिक तौर पर रिक्त होने वाले पदों को संविदा नियुक्तियों से भरने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसी के साथ सीधी भर्ती के पदों पर नई भर्तियां शुरू करने का भी रोस्टर बनाने की तैयारी हो रही है।

31 मार्च को सबसे ज्यादा छह हजार से अधिक अधिकारी कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अधिक हैं। इसको लेकर विभाग अभी से एलर्ट हुआ है। यहां पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सकों के ढाई हजार पदों पर नियुक्ति की तैयारी श्ुारू कर दी गई है। इनमें पैरामेडिकल के 1500 पदों पर नियुक्तियां शामिल हैं। जबकि डॉक्टरों के एक हजार पदों पर नियुक्तियां होना हैं। इनमें से कुछ पद संविदा और कुछ पर नियमित नियुक्तियां होना हैं।

इसी प्रकार की स्थिति पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय निकाय, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, आयुष विभागों की हैं। ऐसे विभिन्न विभागों के करीब छह हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां होना हैं। जबकि इस साल 10 हजार से अधिक पद रिक्त हो रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि इन चार हजार पदों के रिक्त रहने के बाद भी काम-काज सुचारू रूप से चलता रहे। इस दिशा में भी काम शुरू हुआ है।

जहां ज्यादा दिक्कत वहां संविदा का सहारा -

रिक्त पदों पर नियुक्ति मंथन के बीच यह भी प्रयास है कि जहां ज्यादा दिक्कत है, वहां संविदा नियुक्तियां की जाएं। संविदा नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले फण्ड को सरकार तत्काल नहीं देगी। इससे खजाने पर पडऩे वाला बोझ कुछ कम होगा। इस राशि को सरकार अन्य जरूरी कार्यों में खर्च कर सकेगी।

पेंशन भी सरकार के लिए बड़ा बोझ -

राज्य सरकार के लिए अधिकारी-कर्मचारियों की पेंशन बड़ा बोझ है। सरकार को रिटायर कर्मचारियों को पेंशन के तौर पर प्रतिवर्ष 13 हजार करोड़ रुपए खर्च करना पड़ते हैं। जबकि यदि कर्मचारी काम करते रहते हैं तो पेंशन को बोझ नहीं आएगा, बल्कि विभागों में अमले का टोटा भी नहीं होगा। चालू वित्तीय वर्ष की ही बात करें तो सरकार ने पेंशन के लिए बजट में 13617.08 करोड़ रुपए बजट में रखे हैं। जबकि अगले वित्तीय वर्ष में यह बोझ ढाई हजार करोड़ रुपए और बढ़ जाएगा।

दस वर्ष में पांच गुना हुआ पेंशन को बोझ -
2013-14 में 5931.74 करोड़ रुपए

2014-15 में 6836.48 करोड़ रुपए
2015-16 में 7818.69 करोड़ रुपए

2016-17 में 8793.16 करोड़ रुपए
2017-18 में 9290.25 करोड़ रुपए

2018-19 में 12668.66 करोड़ रुपए
2019-20 में 13617.08 करोड़ रुपए

2020-21 में 15931.99 करोड रुपए
2021-22 में 18640.42 करोड़ रुपए

2012-23 में 21809.30 करोड़ रुपए

किसने क्या कहा -


मैं रिटायरमेंट एज बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं हूं। रिक्त पदों पर नए लोगों की भर्ती हो, तो नए लोगों को मौका मिलेगा। जहां तक संविदा पर अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्त किए जाने का सवाल है तो इसके लिए नियम बने हैं।

- डॉ. गोविंद सिंह, सामान्य प्रशासन मंत्री

राज्य के खजाने की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसलिए सरकार का फोकस खर्च कम करने को लेकर है। इसी कड़ी में योजनाओं की समीक्षा भी हो रही है। सिर्फ कागजों में चल रही योजनाएं बंद होंगी। इससे बड़ी बचत होगी। विभागों में नियुक्तियां भी होंगी।
- तरुण भनोत, वित्त मंत्री

कर्मचारियों के रिटायरमेंट को देखते हुए सरकार से आग्रह किया है कि रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए। जहां जरूरत हो वहां संविदा नियुक्ति भी की जा सकती है। निर्णय सरकार को करना है।

- वीरेन्द्र खोंगल, सदस्य राज्य कर्मचारी आयोग

दीपेश अवस्थी Reporting
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