24 हजार से ज्यादा पदों को है चिकित्सकों का इंतजार, जानिये क्या है मामला

भोपाल। एम्स को दिल्ली के साथ हर भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में डॉक्टर्स व चिकित्सा संकाय की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

By: दीपेश तिवारी

Published: 07 Aug 2017, 02:15 PM IST

जानकारी के अनुसार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 24 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यसभा में दिए जवाब में दी।
देश की सभी नव निर्मित एम्स में डॉक्टर्स के साथ अन्य संकायों में खाली पदों से परेशानी हो रही है। एम्स भोपाल में चिकित्सा एवं अन्य संकाय के स्वीकृत पदों की संख्या 305 है। इनमें से 58 पदों पर भर्ती की गई है, जबकि 247 पद रिक्त थे, इन पर भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है। न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण चयन को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका।

डॉ. रविकांत होंगे नए प्रभारी निदेशक -
इधर भोपाल एम्स के प्रभारी निदेशक डॉ. नितिन एम नागरकर का कार्यकाल खत्म हो रहा है, एेसे में नए निदेशक की खोजबीन शुरू हो गई है। हालांकि दो बार प्रयास करने के बावजूद अब तक पूर्णकालिक निदेशक नहीं खोजा जा सका है। एेसे में एक बार फिर प्रभारी निदेशक ही भोपाल एम्स की कमान संभालेंगे। जानकारी के मुताबिक ऋषिकेश एम्स के प्रभारी निदेशक डॉ. रविकांत को भोपाल का प्रभार दिया जा सकता है। उनका कार्यकाल भी इसी सप्ताह खत्म होने जा रहा है। गौरतलब है कि डॉ. रविकांत पहले भोपाल एम्स में ही पदस्थ थे। तत्कालीन डॉयरेक्टर डॉ. संदीप कुमार के कारण उन्होंने भोपाल एम्स छोड़ दिया था।जोधपुर में सबसे ज्यादा खाली पद
जोधपुर एम्स में 4346 पद खाली हैं। यह संख्या किसी भी एम्स से ज्यादा है। भोपाल एम्स में ३८८२ पद खाली हैं। इनमें में ११६ डॉक्टरों ने हाल ही में ज्वाइन किया है। नई दिल्ली एम्स में भी १४९८ पद रिक्त हैं।

यह है स्थिति...
एम्स पद खली
भोपाल - 3882
भुवनेश्वर - 3637
जोधपुर - 5356
पटना - 3844
रायपुर - 3801 
ऋषिकेश - 3418 
नई दिल्ली - 1498
कुल - 24426

इधर, गौर ने सीएम को लिखा पत्र...:
मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की लेटलतीफी पर सरकार को मानसून में घेरने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने एक बार फिर सरकार को चेताया है। मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री को पत्र लिखकर गौर ने इस बार मेट्रो मैन कहलाने वाले ई श्रीधरन को एमपी मेट्रो रेल कार्पोरेशन की बागडोर सौंपने की पैरवी की है। गौर ने सरकार को सलाह दी है कि भोपाल एवं प्रदेश के बाकी शहरों में ट्रैफिक के मद्देनजर स्वदेशी मेट्रो रेल डिजाइन ज्यादा सफल होगा, जबकि नगरीय प्रशासन संचालनालय के अफसर विदेशी मॉडल के इंजन और डिब्बे यहां दौड़ाना चाहते हैं। हर बार की तरह इस बार भी सत्ता और संगठन ने गौर के प्रस्ताव को तवज्जो नहीं दी है।

babulal gaur
babulal gaur IMAGE CREDIT: google

सत्ता और संगठन की नाराजगी की परवाह किए बगैर गौर ने मुद्दे पर कहा कि प्रोजेक्ट लेट होने की वजह पूछना अब जरूरी हो गया है। गौर ने कहा नगरीय प्रशासन मंत्री रहते उन्होंने भारत के मेट्रो मेन ई श्रीधरन के साथ मिलकर प्रस्ताव केंद्र से मंजूर कराया था। श्रीधरन इंडियन स्टाइल मेट्रो चलवाने के पक्ष में थे, लेकिन अफसर चाइना और जापान जैसी मेट्रो रेल चलवाने की जिद पर अड़ गए।
उल्लेखनीय है कि गौर की विधानसभा से दावेदारी करने वाले रोज नए बयान दे रहे हैं। संगठन भी गौर को बदलने की मंशा जता चुका है। इन सबके बीच गौर अब भी खुद की दावेदारी मजबूती के साथ पेश कर रहे हैं साथ ही सत्ता और संगठन को हर स्तर पर इसका अहसास भी करवा रहे हैं।

Show More
दीपेश तिवारी
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned