एवरेस्ट फतह करने के बाद यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को किया फतह

18511 फीट पर तिरंगा फहराकर एमपी के पहले माउंट एल्ब्रुस ट्रैवर्स बने रत्नेश पांडेय

Vikas Verma

September, 1301:12 PM

Bhopal, Madhya Pradesh, India

भोपाल। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट फतह करने वाले मप्र के सतना जिले के रत्नेश पांडेय ने 7 अगस्त को यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (18511 फीट) पर तिरंगा फहराकर लौटे हैं। रत्नेश ने 6 दिन के अंतराल में एल्ब्रुस की ईस्ट-वेस्ट दोनों चोटियों को एक साथ फतह कर रिकॉर्ड बनाया है। ईस्ट चोटी की ऊंचाई 5642 और वेस्ट चोटी की ऊंचाई 5621 मीटर है। दावा किया जा रहा है कि ऐसा करने वाले रत्नेश मप्र की पहले माउंट एल्ब्रुस ट्रैवर्स बन गए हैं। रत्नेश इससे पहले माउंट एवरेस्ट पर मप्र गान और राष्ट्रीय गान गाकर चर्चा में आ चुके हैं।

तिरंगे ने बढ़ाया आत्मविश्वास
रत्नेश ने बताया कि चढ़ाई के दौरान तापमान -&0 डिग्री तक पहुंच गया था। 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही बर्फीली हवा ने भी कई बार रास्ता रोका, लेकिन तिरंगे का शान का ध्यान आते ही मेरा आत्मविश्वास और बढ़ जाता था। चढ़ाई के बाद पूरी तरह थक चुके थे लेकिन चोटी पर जैसे ही तिरंगा फहराया हाथ खुद ब खुद सलामी देने के लिए उठ गए।

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इंडिया-पाक, साथ-साथ
रत्नेश ने इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में आवाहन सामाजिक संस्था के तत्वाधान में 'कीप द माउंटेन क्लीनÓ का संदेश दिया तिरंगे के साथ-साथ खेल और युवा कल्याण विभाग, मप्र का झंडा भी फहराया। वहीं दिल जोड़ो अभियान के तहत, भारत-पाकिस्तान की मित्रता का भी संदेश दिया। इस चढ़ाई में उनके साथ लाहौर, पाकिस्तान के मोहम्मद समीर और रशिया के ऑलिग भी साथ थे।

पाकिस्तान के 6 पर्वत फतह करने की चाहत
रत्नेश ने बताया कि 8000 मीटर की ऊंचाई के विश्व में कुल आठ पर्वत हैं इनमें से 6 पाकिस्तान में शामिल हैं। इन पर्वतों पर चढ़ाई के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं मगर भारतीय पर्वतारोहियों को सिक्योरिटी इश्यूज की वजह से इसकी चढ़ाई नहीं करने दी जाती। मेरी दोनों देशों की सरकार से गुजारिश है कि वह भारतीय पर्वतारोहियों को भी इसका मौका दें।

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5100 मीटर से वापस 3600 मीटर पर लौटे
भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के प्रोफेशनल माउंटेनियर रत्नेश बताते हैं कि चढ़ाई के दौरान मैने अपने खाने पीने का बहुत ख्याल रखा क्योंकि मैं वेजीटेरियन हूं तो मुझे वहां बहुत Óयादा कुछ खास नहीं मिल पाता था मैं ग्रीन वेजीटेबल्स के साथ चीज या सलाद ही लेता था। वहीं पानी हमेशा थोड़ा-थोड़ा पीते रहता था ताकि बॉडी हाईड्रेट रहे। रत्नेश ने बताया कि हम जब 5100 मीटर पर थे तो हम वहां से वापस &600 मीटर पर लौट आए, फिर दोबारा चढ़ाई शुरू की और फिर 5642 मीटर की चढ़ाई तय की। एक बार ऊपर जाकर नीचे आने से हमें Óयादा ऊपर जाने की प्रेरणा मिलती है।

विकास वर्मा
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