बच्चों के साथ​ खिलवाड़, पोषण आहार का ठेका फिर एमपी एग्रो को

- शिवराज सरकार जैसी व्यवस्था ही वापस लागू,
— पोषण आहार घोटाले के बाद बदली थी व्यवस्था

By: harish divekar

Updated: 27 Nov 2019, 10:26 PM IST

प्रदेश में 6 महीने से 3 साल तक के बच्चे व गर्भवर्ती-गर्भधात्री को पोषण आहार देने के नाम पर फिर खिलवाड़ शुरु हो गया है। महिला स्व—सहायता समूहों को पोषण आहार खिलाने का दिया गया ठेका वापस लेकर एक बार फिर एमपी एग्रो के हाथों में पहुंच गया है। कमलनाथ सरकार ने बुधवार को कैबिनेट में इस फैसले को हरी झंडी दे दी। इस फैसले के जरिए इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को उलटने की राह निकाली गई है। इसके तहत आजीविका मिशन के सातों पोषण आहार उत्पादन प्लांट एमपी एग्रो इंड्रस्टीज के पास जाएंगे। एमपी एग्रो ही इनका संचालन करेगा। दरअसल, पिछली शिवराज सरकार के समय 1200 करोड़ का पोषण आहार घोटाला हुआ था। तब, तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने महिला स्व-सहायता समूहों से इसका संचालन कराने का ऐलान किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया था।

तब, इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि महिला स्व-सहायता समूहों से ही इसका संचालन कराया जाए। इसके बाद महिला स्व-सहायता समूहों के फेडरेशन बनाकर सात प्लांट बनाना तय किए गए थे। अब सात में से पांच प्लांट से उत्पादन और आपूर्ति होना शुरू हो गई है, जबकि दो प्लांट से दिसंबर में उत्पादन व आपूर्ति शुरू होना है। ऐसे मौके पर सरकार ने प्लांट को एमपी एग्रो को सौंपने का ऐलान कर दिया है।

सरकार ने इसे बनाया आधार-

सरकार ने प्लांट्स को एमपी एग्रो को देने का आधार ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट को बनाया है, जिसमें ग्रामीण विकास विभाग ने आजीविका मिशन के तहत इन प्लांट्स के संचालन में अक्षमता दर्शाई है। इसमें तकनीकी व अधोसंरचना संबंधित कारणों का हवाला देकर पोषण आहार की आपूर्ति इन प्लांट्स से करने में दिक्कत बताई थी। यह प्लांट्स देवास, धार, होशंगाबाद, मण्डला, सागर, शिवपुरी और रीवा में बने हैं।

दरअसल, 2016 में कुपोषण से शिवपुरी सहित दूसरे जिलों में बच्चों की मौत के बाद कुपोषण घोटाला सामने आया था। तब, तत्कालीन सरकार ने इस पर तत्कालीन मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने भी महिला स्व-सहायता समूहों से काम कराने की रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद महिला स्व सहायता समूहों का फेडरेशन बनाकर प्लांट्स का निर्माण शुरू किया गया था।
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सहायक प्राध्यापकों की भर्ती होगी शुरू-

कैबिनेट में एमपी-पीएससी से चयनित सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व खेल अधिकारी की नियुक्ति का मसला भी उठा। पिछली शिवराज सरकार के समय से ये चयनित प्राध्यापक पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। इस पर सीएम ने इनकी नियुक्ति शुरू करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री को कहा। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इनकी पदस्थापना जल्द शुरू की जाएगी।

करीब 2650 चयनित उम्मीद्वार को पदस्थापना मिलना है। इनकी पदस्थापना में देरी हाईकोर्ट में इनसे संबंधित 18 प्रकरणों के विचाराधीन होने के कारण हुई है। अब इनकी पदस्थापना के लिए आनलाइन व्यवस्था की गई है। इसमें रैंकिंग के हिसाब से पदस्थापना मिलेगी।

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