MP Corona Update : 50 जिलों के 464 गांवों में पहुंचा कोरोना वायरस, अब तक 32 की मौत, 951 संक्रमित

प्रदेशभर के 29, 881 ग्रामीणों की जांच में 951 संक्रमित मिले हैं।

By: Pawan Tiwari

Updated: 17 Jun 2020, 12:16 PM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के मामले भले ही कम आ रहे हों लेकिन कोरोना वायरस के कारण स्थिति भयावह होती जा रही है। मध्यप्रदेश के 52 जिलें कोरोना वायरस की चपेट में हैं। वहीं, कोरोना वायरस अब शहरों की सीमाएं लांघकर गांवों में भी दस्तक दे चुका है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से फैला रहा है। प्रदेश में 50 जिलों के 464 गांव कोरोना संक्रमण की जद में हैं। यहां अब तक 951 मरीज मिल चुके हैं। इसका खुलासा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की एक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेशभर के 29, 881 ग्रामीणों की जांच में 951 संक्रमित मिले हैं। इनमें से 32 की मौत हो चुकी है।

बैतूल के घोडाडोंगरी तहसील के कतिया कोयलारी गांव में कोरोना का मरीज मिलने से लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। खेती और मनरेगा के काम बंद हो गए। गांव के बाहर नहीं जाने के कारण खाद, बीज नहीं मिलने से खेती का काम रुका पड़ा है। 21 मई को प्रदेश के 186 गांव में संक्रमित मिले थे, लेकिन अगले 22 दिनों में 462 गांवों तक संक्रमण फैल गया। विभागीय जानकारी के अनुसार प्रदेश में 14 लाख 82 हजार श्रमिकों की वापसी हुई है। इनमें 12 लाख लोगों को अलग-अलग जगहों पर क्वॉरंटीन किया गया। प्रदेश में 11 हजार पॉजिटिव मिल चुके हैं, जबकि 476 लोगों की मौत हो चुकी है।

ज्यादा प्रभावित गांव इंदौर जिले के
प्रदेश के इंदौर जिले में आने वाले ग्रामीण क्षेत्र कोरोना संक्रमण से ज्यादा प्रभावित हैं। यहां के बांसगांव में 22 पॉजिटिव मिले, जबकि छह की मौत हुई। वहीं बड़ोदिया खान में 19 मरीज मिले। नीमच के उम्मेदपुरा में 34 संक्रमित और एक की मौत हुई। खरगोन के शाहपुरा में 16 मरीजों में दो की मौत हो चुकी हैं। रायसेन के अल्ली गांव में 19 लोग वायरस की चपेट में आए, जबकि धार के डेहरी में 16, छतरपुर के कालापानी में 14, डिंडोरी के शहपुरा में 12, सीधी के कोल्हूडीह में 11, मुरैना के पिपरीफुट में 11 और दमोह के रसूलपुर में 10 मरीज मिले।

गांवों में कोरोना पहुंचना खतरनाक
डॉ. जीवन सिंह मीणा, प्राध्यापक, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण ज्यादा खतरनाक हो सकता है। शहरी क्षेत्रों में ज्यादा सैंपलिंग और बेहतर चिकित्सा सुविधा होती है, ऐसे में मरीज जल्द सामने आता है। ग्रामीण क्षेत्रों से जानकारी बहुत देर बाद आती है। एक मरीज के संक्रमित होने के बाद जब तक हेल्थ टीम वहां पहुंचेगी तब तक कई और लोग संक्रमित हो चुके होंगे।

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