सवालों के घेरे में विधानसभा नियुक्तियां

सवालों के घेरे में विधानसभा नियुक्तियां

Harish Divekar | Publish: Dec, 06 2018 10:41:00 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

अध्यक्ष ने भेजी नियुक्ति की फाइल, अफसरों ने कर दी भर्ती

चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान विधानसभा में की गई नियुक्तियां सवालों के घेरे में आ गई हैं।

इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है कि विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने चुनाव से खाली होते ही नियुक्ति से जुड़ी फाइल विधानसभा सचिवालय भेजी थी।

जिसपर आनन-फानन में आदेश जारी कर पांच ड्राइवरों की भर्ती कर दी गई। रिटायर जज की नियुक्ति और एक अतिरिक्त सचिव की सेवाएं मर्ज किए जाने का भी आदेश निकाल दिया है।
दरअसल नियुक्तियों की यह फाइल अगस्त २०१८ की ही है।

जिसे लेकर भारी विवाद हुआ था। विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिंह के विरोध और लिखित आपत्ति के बाद इन्हें स्थगित कर दिया गया था।

तब से फाइल विधानसभा अध्यक्ष के पास ही थी।

 

 

करीब पांच माह से ठंडे बस्ते में पड़ी ४० कर्मचारियों की भर्ती की इस फाइल को चुनाव आचार संहिता के बीच निकालने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि जिन पदों के लिए इंटरव्यू कर लिए गए थे, उन्हें ही नियुक्त किया गया है।

उधर, सूत्रों का कहना है कि यह नियुक्ति आदेश विरोध को परखने के लिए किया गया है। अगर विवाद नहीं बढ़ा तो अगस्त २०१८ में लंबित रखी गई सभी नियुक्तियों को फाइनल कर दिया जाएगा।

दिखावे के विज्ञापन, रिश्तेदारों की भर्ती

विधानसभा में हुई नियुक्तियों में नेताओं, अफसरों के नाते रिश्तेदारों को मौका मिलने के कारण इन पर सवाल उठते रहे हैं।

केवल दिखावे के लिए पद विज्ञापित किए जाते हैं। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा इटारसी के हैं। आरोप है कि यहां हुई नियुक्तियों में इटारसी, होशंगाबाद और आस-पास जिलों के लोगों को महत्व मिला।

 

अगस्त में भी दिखावे के लिए पदों के लिए विज्ञापन बुलाया गया और रोजगार कार्यालय से नाम मंगाए गए थे।

जबकि, इंटरव्यू में विधानसभा सचिवालय में कार्यरत कार्यभारित कर्मचारियों को ही शामिल किया गया।
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पहले प्रतिनियुक्ति फिर कर दिया मर्ज
चहेतों को सीमित समय के लिए प्रतिनियुक्ति पर लिया जाना और फिर विधानसभा सचिवालय में मर्ज किए जाने का तरीका पुराना है। वीरेंद्र कुमार के साथ ही ऐसा ही हुआ है। उनकी सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेकर अतिरिक्त सचिव का काम सौंपा गया। जब प्रतिनियुक्ति अवधि बीतने को आई तो अब विधानसभा संवर्ग का अधिकारी बना दिया गया। इससे पहले भी ऐसा ही किया गया।

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