मतदाता की खामोशी ने बढ़ाई बेचैनी, दोनों दलों में छायी खामोशी

मतदाता की खामोशी ने बढ़ाई बेचैनी, दोनों दलों में छायी खामोशी

Harish Divekar | Publish: Dec, 04 2018 05:00:00 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

पार्टियों की यह बैचेनी उनके नेताओं और दफ्तरों पर साफ नजर आती है

इस बार के चुनाव में वोटिंग से पहले नेता जितना ज्यादा बोले मतदाता उतना ही खामोश रहा।

चुपचाप नेताओं को सुनता रहा और इवीएम की बीप में अपनी आवाज छिपाकर चला आया।

वोटरों की इसी खामेशी ने अब सियासी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है।

पार्टियों की यह बैचेनी उनके नेताओं और दफ्तरों पर साफ नजर आती है।

भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के दफ्तर सूने पड़े हैं। नेता जीत का खुद दावा कम कर रहे हैं, पूछने पर कहते हैं हमारी सरकार बनेगी।

भाजपा और कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में क्या रहा सोववार का नजारा, लाइव रिपोर्ट।

भाजपा कार्यालय से लाइव
दोपाहर के दो बजे हैं। आम तौर पर कॉडर बैस भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में यह वक्त गहमा-गहमी का होता है। नेता अपने कक्षों में नजर आते है और समर्थकों की चहल-पहल बनी रहती है। लेकिन मतदान के बाद से ही उलट नजारा जारी है।

 

मंगलवार को भी प्रदेश अध्यक्ष राकेश ङ्क्षसह का कक्ष सूना पड़ा नजर आता है। वे मतदान के बाद से ही भोपाल नहीं पहुंचे हैं।

उनके कक्ष के साथ ही प्रथम तल पर मोर्चा-प्रकोष्ठों के भी कक्ष हैं। यहां भी ताले लटके हैं। मीडिया कक्ष में दो कर्मचारी बैठे नजर आते है।

नीचे भूतल पर भी यही नजारा है। मीडिया प्रभारी और कार्यालय मंत्री के कक्ष पर ताला है।

चुनाव आयोग सेल के लिए बनाए गए कमरा खुला तो लेकिन वहां एक कर्मचारी के अलावा कोई नजर नहीं आता। दोपहर बाद तीन प्रवक्ता राजपाल सिसोदिया, राकेश शर्मा और राजो मालवीय प्रदेश कार्यालय पहुंचेते हैं।

लेकिन बाकी कमरे गुलजार नहीं होते ।

राकेश शर्मा कहते हैं हमारी टीम जमीन पर तैनात है। मतगणना की तैयारी हर जिले में चल रही है। फिर तर्क देते हैं, आज गैस त्रासदी की बरसी है इसलिए छुट्टी है।

 

 

कांग्रेस मुख्यालय से लाइव
भोपाल के कांग्रेस मुख्यालय में प्रवेश करते ही सबसे पहले जिनसे सामना होता है उनमें एक है सन्नाटा और दूसरा है सवाल, क्या ये हंगामे के पहले की शांति है।

कांग्रेस में हंगामा तो तय है, चुनाव परिणाम उसके पक्ष में आए या फिर खिलाफ।

रविवार को मेन गेट में लगा बड़ा ताला सोमवार को खुल गया, अंदर प्रवेश करते ही सन्नाटे को तोड़ती इधर-उधर से आ रही आवाजों से चंद नेताओं की मौजूदगी का अहसास होता है।

ये आवाजें उस कमरे आ रही थीं जहां पर मीडिया का प्रवेश वर्जित है यानी यहां पर पार्टी के दस्तावेज तैयार होने का काम होता है।

अधिकांश कक्षों में उपर नेमप्लेट है तो नीचे ताला लटका है। मीडिया विभाग का कमरा खुला था जहां इस विभाग से जुड़े तीन नेता टीवी पर राजनीतिक गतिविधि देख रहे थे।

 

 

तीसरे माले पर संगठन के कामकाज से जुड़े नेता चुनाव का डाटा इक_ा कर रह ेथे और छह तारीख को होने वाले मीटिंग की व्यवस्था की चर्चा भी हो रही थी।

हैरानी इस बात की थी कि चुनाव परिणाम आने में एक सप्ताह बाकी है फिर सरकार बनाने का दावा करने वाली कांग्रेस के दफ्तर में इतना सन्नाटा क्यों है।

इसके जवाब में मीडिया विभाग में मौजूद दुर्गेश शर्मा कहते हैं कि सारे कार्याकर्ताओं की ड्यूटी स्ट्रांग रुम में लगाई गई है इसलिए यहां पर उनकी आवाजाही कम नजर आ रही है, सभी नेता चुनाव परिणाम की तैयारियों में व्यस्त हैं, कांग्रेस की सरकार बनेगी और उस दिन जश्न का हंगामा होगा जिससे पहले की ये शांति है।

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