कैबिनेट विस्तार: केन्द्रीय नेतृत्व करेगा कौन बनेगा मंत्री, सीएम आज कर सकते हैं दिल्ली दौरा

Shivraj Singh Chauhan Cabinet Expension पर अंतिम मुहर केन्द्रीय नेतृत्व लगाएगा।

By: Pawan Tiwari

Published: 24 Jun 2020, 12:25 PM IST

भोपाल. राज्यसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से मध्यप्रदेश में कैबिनेट विस्तार ( Cabinet Expension in MP ) को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा कार्यालय में कैबिनेट विस्तार को लेकर लगातार मंथन जारी है। सूत्रों का कहना है सीएम शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट में कौन-कौन शामिल होगा इस पर अंतिम निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व ( BJP ) करेगा। बताया जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान ( Shivraj Singh Chauhan Cabinet Expension ), प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा आज दिल्ली का भी दौरा ( CM Shivraj Delhi Visit ) कर सकते हैं। दिल्ली दौरे में कैबिनेट विस्तार ( Cabinet Expansion News Updates ) पर फाइनल मुहर लगेगी।

कैबिनेट विस्तार: केन्द्रीय नेतृत्व करेगा कौन बनेगा मंत्री, सीएम आज कर सकते हैं दिल्ली दौरा

कैबिनेट विस्तार को लेकर कई बैठकें
मध्यप्रदेश में शिवराज कैबिनेट विस्तार को लेकर कई बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक नामों को लेकर पार्टी और संगठन में सहमति नहीं बनी है। बुधवार को भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के बीच बैठक हो रही है। माना जा रहा है कि शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है।

क्यों हो रही है मुश्किलें
शिवराज कैबिनेट विस्तार लंबे समय से प्रस्तावित है। लेकिन नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। नामों में सहमति नहीं बनने का प्रमुख कारण है ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेता। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी का क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण बिगड़ गया है। उपचुनाव को देखते हुए माना जा रहा है कि शिवराज कैबिनेट में सिंधिया समर्थक करीब 8 नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है। शिवराज सिंह चौहान के सामने सबसे बड़ी मुश्किल है ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक नेताओं का पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाना। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के दो नेता तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं। माना जा रहा है कि सिंधिया खेमे के अभी 8 नेताओं का मंत्री बनाया जाना तय है। ऐसे में भाजपा का समीकरण बिगड़ रहा है। मध्यप्रदेश में 34 मंत्री बन सकते हैं।

चंबल-ग्वालियर में जहां पार्टी को 16 उपचुनाव का सामना करना है, वहां से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, अरविंद भदौरिया की कैबिनेट में एंट्री से असहमत हैं। ऐसे समीकरण कमोबेश हर संभाग में बन रहे हैं। कुछ जिलों में सियासी और जातीय समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। शिवराज कैबिनेट के विस्तार की एक बड़ी चुनौती है जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण। सागर जिले से पार्टी से 4 बड़े नेता दावेदार हैं। गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह और प्रदीप लारिया जबकि गोविंद सिंह राजपूत पहले ही मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में किस नेता को कैबिनेट में जगह दी जाए और किसे नहीं पार्टी के सामने मुश्किलें हैं। इंदौर से कई दावेदार हैं। फिलहाल इंदौर जिले से तुलसी सिलावट मंत्री हैं। तुसली सिलावट के अलावा ऊषा ठाकुर, रमेश मैंदोला और मालिनी गौड़ प्रमुख दावेदार हैं। रमेश मैंदोला, कैलाश विजयवर्गीय के करीबी हैं।

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सूत्रों का कहना है कि शिवराज कैबिनेट के विस्तार की एक बड़ी समस्या है नेताओं द्वारा अपने-अपने पसंद का विभाग मांगना। कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने खेमे के नेताओं के लिए उनके पसंदीदा मंत्रालय का दवाब बना रहे हैं। वहीं, पार्टी के कई पुराने नेता एक फिर उस विभाग के लिए दावेदारी कर रहे हैं जो विभाग उनके पास पहले से था। ऐसे में किसे कौन सा विभाग दिया जाए यह भी शिवराज सिंह चौहान और संगठन के लिए एक बड़ी मुश्किल है।

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