MP ने राजस्व कमी को दूर करने के लिए बनाया नया फॉर्मूला,इस रास्ते जुटाएंगे पैसा

नियम बनने के बाद अगले माह से लगेगा टैक्स, कर निर्धारण का अधिकार परिषद को होगा, अधिकतम सीमा सरकार तय करेगी।

By: दीपेश तिवारी

Published: 26 Jan 2018, 03:29 PM IST

भोपाल| MP में सरकार ने अपना राजस्व बढ़ाने के लिए एक नया फार्मूला इजाद कर लिया है। इसके द्वारा सरकार राजस्व कमी को दूर करने की कोशिश करेगी। अभी कुछ ही समय पहले सरकार ने पेट्रोल पर सेस का एलान कर उससे मिलने वाले पैसों को सड़क के लिए लगाने का ऐलान किया था, अब सरकार फिर एक नया प्लान तैयार कर राजस्व बढ़ाने में जुटने जा रही है।

इस नए प्लान के तहत अब मध्य प्रदेश में मल्टीप्लेक्स, सिनेप्लेक्स व केबल टीवी से मनोरंजन कर अब नगरीय निकाय वसूल करेंगे। 1 जुलाई 2017 से मनोरंजन कर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने के बाद मनोरंजन कर अधिनियम समाप्त हो गया था, लेकिन सरकार ने राजस्व कमी को दूर करने के लिए रास्ता निकाल लिया है।
दरअसल 73वें और 74वें संविधान संशोधन के बाद नगरीय निकाय और पंचायतराज संस्थाओं के लिए बने कानून में निकायों को मनोरंजन सहित अन्य कर लगाने का अधिकार दिया गया है। इस अधिकार के तहत अब शहरी क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतें मनोरंजन कर वसूल करेंगी।

शहरी क्षेत्र के लिए नगरपालिका एक्ट में संशोधन प्रस्ताव को शनिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल सकती है। इसके बार नियम बनाए जाएंगे। प्रस्ताव के मुताबिक कर निर्धारण का अधिकार नगर निगम और नगर पंचायतों की परिषदों को होगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा राज्य सरकार तय करेगी।
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार मनोरंजन कर का स्लैब तय करने का अधिकार नगर निगम और नगर पालिका की परिषद को होगा। वे अपने शहर में प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से कर का निर्धारण करेंगे, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा राज्य सरकार तय करेगी। इसके लिए नियम बनाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। ऐसा माना जा रहा है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह से मनोरंजन कर की वसूली शुरु हो जाएगी।

125 करोड़ रुपए का छह माह में नुकसान
बताया जा रहा है कि जीएसटी लागू होने से पहले प्रदेश में मल्टीप्लेक्स व सिनेप्लेक्स से 20 और केबल टीवी व अन्य मनोरंजन के साधनों से 10 प्रतिशत कर वाणिज्यिक कर विभाग वसूलता था। जीएसटी लागू होने के बाद राज्य की मनोरंजन कर के जरिए होने वाली आय समाप्त हो गई है। इससे पिछले छह माह में सरकार को 125 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

ये राज्य लागू कर चुके हैं व्यवस्था
गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा अपने अधिनियमों में संशोधन कर निकायों को मनोरंजन कर लगाने का अधिकार दे चुके हैं। प्रदेश को मनोरंजन कर समाप्त होने से करीब 100 करोड़ रुपए सालाना का नुकसान होगा। सरकार को नई व्यवस्था से इसकी भरपाई की उम्मीद है।

इधर, 10 हजार मकानों की एमबी गायब :-
केंद्र सरकार की योजना जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शहर में बने 10 हजार मकानों की फाइलों से मेजरमेंट बुक (एमबी) गायब है। इन मकानों की लागत 1600 करोड़ रुपए है, जिनका निर्माण वर्ष 2010 से 2015 के बीच हुआ था।
एमबी गायब होने से मकानों के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि एमबी बुक ही ऐसा सबूत होता है, जिसमें रोजाना काम और निर्माण कार्य की गुणवत्ता दर्ज होती है।

ऐसी आशंका है कि इंजीनियरों व कांट्रेक्टर्स के गठजोड़ से ऐसा हुआ, ताकि भ्रष्टाचार उजागर होने पर यदि जांच हो तो कोई दस्तावेजी प्रमाण न मिल पाएं। केवल इस योजना के तहत बने मकानों की ही एमबी गायब नहीं है, बल्कि पिछले चार साल में हुए सड़क और नाली निर्माण कार्यों की 120 फाइलों में एमबी नहीं है।

11 फाइलें सीएम इंफ्रा प्रोजेक्ट से संबंधित...
नगर निगम के सूत्रों का कहना हैं कि सीएम इंफ्रा से संबंधित 11 फाइलें ऐसी हैं, जिसमें एमबी नहीं हैं। इसको लेकर नगर निगम आयुक्त प्रियंका दास ने पिछले दिनों समीक्षा बैठक में नाराजगी जताई थी और संबंधित असिस्टेंट इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। लेकिन इस मामले में अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।

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दीपेश तिवारी
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