कर्ज लेगी MP सरकार: हर माह औसत 1500 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद अब फिर दो हजार करोड़ रुपए का लोन

कर्ज लेगी MP सरकार: हर माह औसत 1500 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद अब फिर दो हजार करोड़ रुपए का लोन
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Deepesh Tiwari | Updated: 02 Sep 2019, 11:07:26 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

प्लानिंग में 16 हजार करोड़ का कर्ज और लिया जाना...

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन सितंबर को 2000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। सरकार दिसंबर 2018 से हर महीने औसत 1500 करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है। अभी तक 12600 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है।

सरकार की प्लानिंग में 16 हजार करोड़ का कर्ज और लिया जाना है। पिछली सरकार पर कर्ज को लेकर सवाल उठाने वाली कांग्रेस इस कर्ज को विकास के लिए लेना बता रही है, लेकिन इससे आम आदमी पर टैक्स का बोझ बढ़ता जा रहा है।

सरकार पर अभी कर्ज की स्थिति...
1.87 लाख करोड़ का कर्ज (कैग रिपोर्ट)
1.05 लाख करोड़ खुले बाजार से
17137 करोड़ केंद्र से कर्ज व अग्रिम
12200 करोड़ वित्तीय संस्थानों से
22741 करोड़ केंद्रीय सुरक्षा व अन्य
7501 करोड़ पॉवर बांड सहित अन्य

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कब-कब लिया कर्ज
1000 करोड़, 11 जनवरी 2019
1000 करोड़, 01 फरवरी 2019
1000 करोड़, 08 फरवरी 2019
1000 करोड़, 22 फरवरी 2019
1000 करोड़, 28 फरवरी 2019
1000 करोड़, 08 मार्च 2019
600 करोड़, 25 मार्च- 2019
500 करोड़, 05 अप्रेल 2019
500 करोड़, 30 अप्रेल 2019
1000 करोड़, 03 मई 2019
1000 करोड़, 30 मई 2019
1000 करोड़, 07 जून 2019
1000 करोड़, 10 जुलाई 2019
1000 करोड़, 06 अगस्त 2019
2000 करोड़, 03 सितंबर 2019 अब
(कर्ज रुपए में।)

कई चुनौतियां सामने
कांग्रेस सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती कर्जमाफी है। सरकार ने 21 लाख किसानों का कर्ज माफ कर दिया है, लेकिन इसी वित्तीय सत्र में छह लाख किसानों का कर्ज और माफ किया जाना है। उस पर बारिश ने सड़कों की हालत खराब कर दी है।

इतना ही नहीं एक रुपए यूनिट में 150 यूनिट तक बिजली देने की योजना से भी आर्थिक बोझ बढ़ा है। उस पर वचन-पत्र के वचन पूरे करने के लिए भी राशि की जरूरत है।

इधर, वन अमले के लिए खुशखबरी: उधरसरकार पर आएगा 75 करोड़ का अतिरिक्त भार...

वहीं दूसरी ओर पुलिस की तर्ज पर वन सुरक्षाकर्मियों को भी 13 माह का वेतन मिलेगा। इससे सरकार पर हर साल करीब 75.63 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। सुरक्षाकर्मियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन देने के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके आदेश वित्त विभाग की सहमति के बाद जारी किए जाएंगे।

वन सुरक्षाकर्मियों का तर्क है कि वे पुलिस के समान पूरे समय फील्ड में ड्यूटी करते हैं। उन्हें छुट्टियां भी नहीं मिलतीं, ऐसे में उन्हें भी एक माह का अतिरिक्त वेतन दिया जाना चाहिए। इसे लेकर वनकर्मी पिछले साल 14 दिन हड़ताल पर रहे थे। तब संरक्षित क्षेत्रों से लेकर सामान्य वनमंडलों में व्यवस्था चरमरा गई थीं।

इनकी हड़ताल को देखते हुए तत्कालीन शिवराज सरकार ने ग्रेड-पे से जुड़ी मांगें पूरी की थीं। वहीं, कांग्रेस ने सरकार बनने पर 13 माह का वेतन देने का बिंदु वचन पत्र में शामिल किया था। इस वचन को अब सरकार पूरा कर रही है।

शासन ने वन विभाग से इसे लेकर प्रस्ताव मांगा था, जो वनमंत्री उमंग सिंघार की सहमति के साथ भेजा जा चुका है। गौरतलब है कि मैदान में पदस्थापना वाले पुलिसकर्मियों को सरकार जून 1987 से एक माह का अतिरिक्त वेतन दे रही है। पुलिस आरक्षकों को पौष्टिक भत्ता भी दिया जा रहा है।

पौष्टिक भत्ते पर भी जोर
वन कर्मचारियों को पौष्टिक भत्ते पर भी जोर है। इसे लेकर वन कर्मचारी संघ के नेता कई बार मंत्री और विभाग के अफसरों से मिल चुके हैं। हालांकि, इस पर अभी शासन स्तर पर विचार-विमर्श शुरू नहीं हुआ है।

वन अमले की स्थिति
पदनाम : संख्या : वर्तमान में कार्यरत
वनरक्षक : 14024 : 12592
वनपाल : 4194 : 3101
उप वनक्षेत्रपाल : 1258 : 773
वनक्षेत्रपाल : 1194 : 576

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