तकनीक ने बदली तस्वीर, केंद्रीय जेलों के बाद जिला जेलों में शुरु हुई ई-कोर्ट पेशी

- बीएसएनएल की फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए सभी जेलों पर रखी जा रही राज्य स्तरीय कंट्रोल रुम से नजर
- तीन महीने में सभी 73 उप जेलों में शुरु होगा सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम

By: Radhyshyam dangi

Published: 06 Jan 2020, 10:30 AM IST

भोपाल/ जेल विभाग के ई-कोर्ट पेशी प्रोजेक्ट ने प्रदेश की केंद्रीय जेलों के बाद सभी 40 जिला जेलों की तस्वीर ही बदल दी। सभी जिला जेलों को जिला अदालतों से लिंक कर दिया गया है। इसके कारण अब जिला जेलों में बंद कैदियों को भी पेशी पर लाने-ले-जाने का झंझट खत्म हो गया। ई-कोर्ट पेशी के जरिए सभी जिला जेलों के बंदियों की पेशियां वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) के जरिए हो रही है।

जिला जेलों और जिला अदालतों को यह सुविधा देने बीएसएनएल की फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए जोड़ा गया है। इससे बंदियों को जितनी भी बार पेशी पर उपस्थित होना हो, वह सिर्फ वीसी के जरिए अदालत/जज के सामने पेश हो जाता है। ई-कोर्ट पेशियां लागू होने से जहां अदालतों के स्टाफ की रोजाना की परेशानियां खत्म हो गई, वहीं सबसे अहम बिंदु सुरक्षा का खतरा खत्म हो गया।

जिला जेलों में भी कई संगीन अपराधों के कैदी है, जिन्हें कोर्ट में पेशी के दौरान परिवहन करने में खतरा होता था। वहीं, दूसरा सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का हुआ है। जेल विभाग में इस तरह का पहली बार प्रयोग किया गया है। अदालतों को जेलों से जोडऩे के लिए एनआईसी के स्वान प्रोजेक्ट की मदद ली गई है।

उप जेलों की भी बनेगी योजना

जेल विभाग के अधिकारियों ने केंद्रीय और जिला जेलों के बाद प्रदेश की 73 उप जेलों (तहसील स्तर की) को भी ई-कोर्ट पेशी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। जेलों में यह प्रोजेक्ट लागू होने के बाद केस के निष्पादन में भी जेल और कोर्ट दोनों को फायदा होने लगा। सूचनाओं का आदान-प्रदान रुक गया। सामान्यत: पेशियों के दौरान आरोपियों-कैदियों के परिजनों/मिलने वाले कोर्ट में पहुंचते थे। इससे वे संपर्क में भी आ जाते थे। इसके कारण गोपनीयता भंग होती थी, लेकिन अब इसकी गुंजाइश ही खत्म हो गई।

हाई टेक्नोलॉजी का उपयोग जेलों में भी किया जा रहा है। सभी जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशियां शुरु कर दी गई हैं। इससे हमारे लिए सुरक्षा और समय की सबसे बड़ी चुनौती खत्म हो गई। अब जहां समय की बचत हुई वहीं कैदियों को बार-बार कोर्ट लाने के दौरान असुरक्षा का भाव भी खत्म हो गया। - संजय चौधरी, डीजी, जेल

Radhyshyam dangi Reporting
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