दिल और किडनी के गंभीर मरीजों को फिर से बीएमएचआरसी में मिलेगा इलाज

21 विभागों में हुए कंसलटेंट के इंटरव्यू : हार्ट और किडनी सहित 21 विभागों में होगी भर्ती...

भोपाल. बीएमएचआरसी में फिर हार्ट, किडनी और ब्रेन के गंभीर मर्ज से जूझ रहे मरीजों का इलाज हो सकेगा। साथ ही कैंसर के मरीजों को अब दूसरे अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा।

इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने एक बार फिर विशेषज्ञों की खोज शुरू कर दी है। सोमवार को 21 विभागों के लिए कंसलटेंट और जूनियर रेसीडेंस के इंटरव्यू लिए गए। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो दो से तीन दिन में चयनित चिकित्सकों की सूची विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी।

बार-बार इंटरव्यू के बावजूद चिकित्सकों की भर्ती नहीं हो पा रही है। इसके चलते प्रबंधन ने इस बार चिकित्सकों का वेतन एक लाख रुपए महीना कर दिया है। इससे पहले इस पद के लिए 75 हजार रुपए वेतन दिया जाता था। मालूम हो कि बीएमएचआरसी के हालात को लेकर पत्रिका लगातार खबरे प्रकाशित करता रहा है।

नहीं मिल रहे नियमित कंसलटेंट
यहां डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए अभी तक भर्ती नियम नहीं है। यही वजह है कि नियुक्ति के के लिए आठ बार विज्ञापन जारी किए गए। लेकिन पद नहीं भरे जा सके। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि भर्ती नियम का काम अंतिम चरण में है।

इन विभागों में आएंगे नए विशेषज्ञ
यूरोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन, ऑप्थेलमोलॉजी, सीटीवीएस, जीआई सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्र ोलॉजी, निश्चेतना, जीआई मेडिसिन, पेथोलॉजी, रेडियोलॉजी, माइक्रोबायलॉजी, न्यूोरोलॉजी, साइकेट्री, सर्जिकल ऑंकोलॉजी।


कब-कब निकले आवेदन
07 नवंबर 18: लैब टेक्निशियन
30 जून 18: लैब टेक्निशियन
09 जून 18: कंसलटेंट मेडिकल
10 अप्रैल 18: रेडियोलॉजिस्ट
10 अप्रैल 18: सीनियर रेसीडेंस
24 फरवरी 18: सीनियर रेसीडेंस
13 फरवरी 18: कंसलटेंट
02 फरवरी 18: रेडियोलॉजिस्ट

ये हैं समस्याएं
- फैकल्टी के आधे से ज्यादा पद खाली।
- एक दर्जन से ज्यादा विभागों में एक भी विशेषज्ञ नहीं।
- लगभग सभी उपकरण हुए पुराने, बार बार खराब होते हैं ।
- नए फैकल्टी नहीं ले रहे रुचि।
- पीजी इंस्टीट्यूट बनाने के लिए बीयू से अभी तक नहीं मिली सम्बद्घता।

सप्ताह में 2 ऑपरेशन भी मुश्किल
मौ जूदा हालात में अस्पताल के अधिकतर विभाग जूनियर रेसीडेंस के हवाले हैं। जिन विभागों में कंसलटेंट हैं वहां भी ऑपेशन नहीं हो पा रहे हैं।

दरअसल एनेस्थीसिया विभाग में डॉक्टरों की कमी के चलते सप्ताह में सिर्फ दो ऑपरेशन हो रहे हैं। यहां चार विशेषज्ञ हैं, जबकि अलग-अलग डिपार्टमेंट में हर दिन कई सर्जरी होती हैं। यूरोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन, ऑप्थेलमोलॉजी, सीटीवीएस, जीआई सर्जरी, न्यूरो सर्जरी सहित अन्य विभागों में भी विशेषज्ञ नहीं होने से कई गैस पीडि़त इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जा रहे हैं।

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दीपेश तिवारी
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