100 रुपये में बिजली मिलना मुश्किल! 8000 करोड़ बकाया, वेतन देने का भी नहीं है फंड

100 रुपये में बिजली मिलना मुश्किल! 8000 करोड़ बकाया, वेतन देने का भी नहीं है फंड

KRISHNAKANT SHUKLA | Updated: 15 Sep 2019, 12:44:04 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

शासन से राशि नहीं मिलने से बिजली कंपनी को अगस्त महीने का वेतन देने में आई दिक्कत

देवेंद्र शर्मा, भोपाल. बिजली कंपनी की शासन पर लेनदारी लगातार बढ़ती जा रही है। मार्च से अभी तक करीब 8000 करोड़ रुपए की राशि बकाया है। ये संबल योजना के 200 रुपए के बिजली बिल की सब्सिडी की राशि है। गौरतलब है कि राशि नहीं मिलने से कर्मचारियों को अगस्त माह का वेतन देने की दिक्कत हो गई थी। बिजली कंपनी के डायरेक्टर (फायनेंस) राजीव सक्सेना ने पावर मैनेजमेंट कंपनी को पत्र लिखकर वेतन की अदाएगी के लिए 22.62 करोड़ रुपए अतिरिक्त राशि की मांग की है। विद्युत वितरण कंपनी वेतन पर प्रतिमाह 72.62 करोड़ रुपए खर्च करती है।

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राज्य शासन अब 100 रुपए में बिजली देने जा रही है। कंपनी को डर है कि यदि इसमें दी जाने वाली सब्सिडी की स्थिति पूर्ववत रही तो दिक्कत और बढ़ेंगी। वर्तमान में बिजली कंपनियों का पूरा जमीनी काम आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे हैं। यही वजह है कि अप्रशिक्षित कर्मचारी कई बार बिजली आपूर्ति समय पर बहाल नहीं कर पाते। मालूम हो कि बिजली कंपनी में करीब 33 हजार आउटसोर्स कर्मचारी हैं जबकि कुल कर्मचारियों की संख्या तकरीबन 55 हजार है।

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ये मिलेगा लाभ

जानकारों के अनुसार 150 यूनिट तक की पात्रता से बिजली बचत में लाभ मिलेगा। जो लोग 170 या इससे अधिक यूनिट खर्च करते हैं, वे सब्सिडी के लिए बिजली बचत शुरू कर सकते हैं। यदि प्रति उपभोक्ता 20 से 30 यूनिट बिजली भी एक महीने में बचाई गई तो 10 लाख उपभोक्ताओं से ढाई करोड़ यूनिट से अधिक बिजली की बचत होगी। ये बचत 2.5 लाख परिवारों को एक माह की बिजली का इंतजाम कर देगी।

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आशंका ये भी हैं

  • 150 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ता फ्लोर के आधार पर नए बिजली कनेक्शन लेंगे, ताकि उन्हें सब्सिडी का लाभ मिल सके।
  • परिजनों, किराएदार के नाम पर नए कनेक्शन लेने वालों की पड़ताल और रोकथाम मुश्किल होगी। ये ठीक वैसा ही है, जैसे एक ही घर में कई नाम से गैस कनेक्शन लिए गए हैं।
  • सब्सिडी का लाभ कम लोगों को देना पड़े, इसके लिए बिजली कंपनी की ओर से नए मीटर के नाम पर तेज रफ्तार वाले मीटर लगाए जा सकते हैं।
  • ऑटोमेटिक ऑपरेङ्क्षटग मीटर में यूनिट तेज कर खपत को 150 के पार लेे जाने की तकनीकी कोशिश हो सकती है। मीटर के तेज चलने की लगातार शिकायत अभी भी हैं।

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प्रति उपभोक्ता औसतन 550 रु. की सब्सिडी

नई योजना के तहत पहले 100 यूनिट के लिए उपभोक्ता से 100 रुपए और अतिरिक्त प्रति यूनिट के लिए औसत सात रुपए के हिसाब से चार्ज किया जाएगा। यानी 150 यूनिट पर 450 रुपए से अधिक का बिल नहीं आएगा। अभी के टैरिफ के हिसाब से इतनी यूनिट का बिल लगभग एक हजार रुपए बनता है। अब शासन को 150 यूनिट खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के नाम पर 550 रुपए की सब्सिडी देनी होगी।

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बिजली कंपनी को शासन से सब्सिडी लेना है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि योजना को लागू करने में पीछे हटेंगे। हम पूरी क्षमता के साथ इस दिशा में काम कर रहे हैं।
- विशेष गढ़पाले, एमडी, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

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