IMD Bhopal: अब दो सिस्टम और दो द्रोणिका से होगी झमाझम बारिश

शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी से भारी वर्षा की संभावना

By: Hitendra Sharma

Published: 11 Sep 2021, 11:24 AM IST

भोपाल. बूढ़े होते मानसून को फिर से ताकत मिलने लगी है। सीजन में पहली बार मानसून की दोनों ब्रांच, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर एक साथ सक्रिय है। इस बीच दो सिस्टम एक साथ तैयार हो चुके हैं। इनमें एक राजस्थान पहुंचकर तैयार है तो दूसरा बंगाल की खाड़ी में बन चुका है।

शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी से भारी वर्षा की संभावना है। कुल मिला कर मध्य प्रदेश में 20 सितंबर तक मौसम की जोरदार गतिविधियां बनी रहेगी। 15 सितम्बर तक तेज मानसूनी गतिविधियां मौसम विशेषज्ञ शैलेन्द्र नायक का कहना है कि, इन मौसमिक परिस्थितियों के कारण 15 सितम्बर तक प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर बारिश के साथ कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना है। अगले पूरे सप्ताह से प्रदेश में तेज मानसूनी गतिविधियों की संभावना बनती दिख रही है।

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मालवा में नदी नाले उफान पर
मालवा सहित प्रदेश में कुछ जगहों पर मानसून सक्रिय है। शाजापुर-देवास और उज्जैन में है नदी-नाले उफान पर हैं। रतलाम के शिवपुर में कनेड़ नदी पर उफान के दौरान एक बस चालक ने जोखिम लेकर पुलिया पार करने का प्रयास किया तो बस बहाव में लटक गई। बस के 18 यात्री सुरक्षित हैं। इधर, अशोकनगर में 24 घंटे में 40 मिमी और चंदेरी में 33 मिमी बारिश हुई।

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नया सिस्टम बन सकता है सीजन का पहला डिप्रेशन बंगाल की खाड़ी में शनिवार को बनने जा रहा कम दबावा का क्षेत्र, अबदाव के रूप में विकसित हो सकता है। यह अपने रास्ते में भारी बारिश कराता हुआ प्रदेश की ओर आएगा। अनुमान है कि अगले सप्ताह के आखिर तक यह राजस्थान में बने सिस्टम में जाकर मर्ज हो सकता है जिससे गतिविधियां ज्यादा दिनों तक चलेंगी।

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प्रदेश में ज्यादा बारिश दिए बिना पहला सिस्टम राजस्थान की सीमा पर पहुंच गया कम दबाव के क्षेत्र को अब अरब सागर से नमी मिलने लगी है। अब इस सिस्टम से भी उम्मीद है। दूसरा सिस्टम बंगाल की खाड़ी में 11 सितम्बर को बनने जा रहा कम दबाव का क्षेत्र ऊपरी हवा के चक्रवात के रूप आ चुका है। शनिवार को यह कम दबाव का क्षेत्र बन जाएगा।

अरब सागर से गुजरात होते हुए पहली द्रोणिका पूर्वी राजस्थान में बने सिस्टम से गुजरकर मप्र-छग होकर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। यह अरब सागर से नमी ला रही है। वही दूसरी द्रोणिका पूर्वी राजस्थान में बने सिस्टम से टीकमगढ़ और पारादीप से लेकर पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। यह बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रही है।

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