सीरियल से सीखा लाश को ठिकाने लगाने का तरीका और कर डाला यह क्राइम

हत्या करने के बाद धड़ को पातरा नाले में फेंका, पैर घर पर कमरे के अंदर एक थैली में पैक रखे हैं। सिर और दोनों हाथों को मोतिया तालाब में फेंक दिया।

By: Juhi Mishra

Published: 18 Aug 2017, 08:02 AM IST

 भोपाल। निर्दयी और निर्मम तरीके से प्रॉपर्टी ब्रोकर अजीम मोहम्मद की हत्या करने वाले आरोपी के शातिर दिमाग को पुलिस 40 घंटे बाद पढ़ पाई। आरोपी ने सुनियोजित तरीके से हत्या को अंजाम दिया। उसने हत्या कर लाश ठिकाने लगाने का तरीका टीवी पर आने वाले एक क्राइम सीरियल से लिया था। खुद को थाने में सरेंडर करने के बाद से वह पुलिस को तमाम तरह की दलीलें पेश करता रहा, पुलिस उसकी हर बात पर विश्वास करती रही। चूंकि पुलिस को धड़ के साथ सिर, हाथ और पैर बरामद करने थे। धड़ मिलने के बाद पुलिस दिनभर नाले की खाक छानती रही, लेकिन नहीं मिली।

 

एएसपी धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि आरोपी को पुलिस ने गुरुवार को न्यायालय में पेश कर चार दिन के रिमांड पर लिया। रिमांड के दौरान उसने कहा कि हत्या करने के बाद धड़ को पातरा नाले में फेंका, पैर घर पर कमरे के अंदर एक थैली में पैक रखे हैं। सिर और दोनों हाथों को मोतिया तालाब में फेंक दिया। पुलिस की टीम घर पहुंची तो पैर बरामद कर लिए। देर शाम एक टीम मोतिया तालाब से सिर और दोनों हाथ बरामद कर पीएम के लिए मरचुरी भेज दिए।

 

बिना सिर हाथ-पैर के वह धड़ को लेकर क्या करेंगे
बुधवार दोपहर बाद पुलिस ने धड़ का पीएम करा दिया था, लेकिन परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया था। परिजनों का कहना है कि बिना सिर हाथ-पैर के वह धड़ को लेकर क्या करेंगे। इस लिहाज से पुलिस ने धड़ का मरचुरी के फ्रिजर में रखवा दिया है। गुरूवार देर शाम सिर और हाथ बरामद करने के बाद पुलिस ने उन्हें भी मरचुरी भेज दिया। अब पुलिस शुक्रवार को सभी अंग परिजनों के सुपुर्द करने का दावा कर रही है।

 

जवान से हुई थी मारपीट, दर्ज होगा हत्या का मामला
भोपाल में संदिग्ध अवस्था में घायल मिलने केबाद मंगलवार दोपहर ग्वालियर में दम तोडऩे वाले एसएएफ के जवान मनीष त्रिपाठी के साथ मारपीट हुई थी। इस बात की पुष्टि शॉर्ट पीएम में हो गई है। एसएएफ जवान की हत्या किए जाने की पुष्टि होते ही पुलिस मुख्यालय सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने एसएएफ की ई-कम्पनी के अधिकारियों से जबाव-तलब किया। अधिकारियों ने पक्ष रख भी दिया है, लेकिन इससे स्थिति स्पष्ट होने के बजाए उलझ गई है। ग्वालियर में मंगलवार दोपहर जवान की मौत के बाद परिजनों ने उसके साथ भोपाल में एसएएफ के साथियों की ओर से मारपीट का आरोप लगाया था।

 

एसएएफ के अधिकारियों से सम्पर्क करके जानकारी ली, लेकिन तथ्य स्पष्ट नहीं हुए। बुधवार को प्रारंभिक जांच में मारपीट की पुष्टि हुई तो अधिकारियों ने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू कर दी। जवान की तैनाती वाली ई-कम्पनी के अधिकारियों को मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की गई। पूछताछ में अधिकारियों ने बताया कि जवान पहले से छुट्टी पर था, और इसके बाद उसका किसी से विवाद हुआ। कम्पनी ने अपने पक्ष में यह कहा कि मृतक मंगलवार को होटल में मां के साथ था, और मां के फोन करने पर ही मनीष के इलाज की व्यवस्था के लिए एक जवान साथ में ग्वालियर भेजा गया था।

 

० प्रारंभिक रिपोर्ट में जवान के शरीर पर चोटें होना पाई गई हैं। रिपोर्ट के आधार पर हत्या की धाराएं लगाकर मामला भोपाल पुलिस को सौंपा जाएगा। गंभीर आरोपों को देखते हुए मुख्यालय स्तर पर भी कम्पनी अधिकारियों से पक्ष मांगा गया। उन्होंने अपना पक्ष रखा है। दोनों ओर से अलग-अलग तथ्य पेश किए गए है, इसलिए अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। मामले की विस्तृत जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
मकरंद देउस्कर, आईजी, लॉ एंड आर्डर

Juhi Mishra
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