निगम का खजाना खाली, जनहित के 500 से अधिक काम अटके

खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है

By: pankaj shrivastava

Published: 04 Jan 2018, 11:26 AM IST

भोपाल। निगम के पास पैसा नहीं होने से पूरे शहर में 500 से अधिक काम ठप पड़े हैं, खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। बानगी के तौर पर गणेश मंदिर से बोर्ड ऑफिस के बीच निर्माणाधीन बीआरटीएस सर्विस रोड ही लें तो पता चलता है इसका काम तीन माह से ठप है। ठेकेदार का कहना है कि उसका १.५७ करोड़ रुपए का बिल निगम के पास दो माह से रखा है, जब तक पास नहीं होता काम बंद रहेगा। निगम पैसे नहीं होने की बात कह रहा है।

निगम और ठेकेदार के बीच सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जिनके लिए ये रोड उपयोगी है। बीआरटीएस के जानलेवा टै्रफिक से बचने जो सर्विस रोड की उम्मीद लगाए हैं। सर्विस रोड का काम अधूरा है, इससे इसके किनारे रहने और कामकाज के लिए आने वालों की परेशानी बढ़ गई है। इस तरह हर वार्ड में आमजन की सुविधा के छोटे-बड़े तीन से चार काम हैं जो बंद पड़े हुए हैं। निगम का ठेकेदारों पर करीब १३० करोड़ रुपए बकाया है, इस वजह से ही काम बंद किए हुए हैं।

आमजन की सुविधा के ये काम भी रुके

नूतन गल्र्स कॉलेज का काम, ऑरा मॉल से मनीषा मार्केट तक आदर्श मार्ग, बैरागढ़ में प्रेमचंदानी आदर्श मार्ग, लालघाटी पर सौंदर्यीकरण काम, शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के श्मशान घाट का काम, अशोका गार्डन दशहरा मैदान को विकसित करने का काम, डेयरी विस्थापन के अलावा दर्जनों काम बंद है।

 

निगम की कंगाली के कारण
शासन चुंगी क्षतिपूर्ति के तौर पर निगम को मासिक 15 करोड़ रुपए दे रहा है, जबकि यहां वेतन पर ही 25 करोड़ रुपए मासिक खर्च हो रहा है। 185 करोड़ रुपए संपत्तिकर में से 60 फीसदी की ही वसूली हो पा रही है।
10 करोड़ रुपए की अनुमानित आय वाले होर्डिंग से निगम ने पूरे साल में एक रुपया तक नहीं कमाया।

25 लाख रुपए मासिक कमाई वाली स्मार्टपार्किंग शुभारंभ के सात माह बाद भी शुरू नहीं हुई। नगर निगम 25 करोड़ रुपए सालाना जलदर से वसूली करता है और 75 करोड़ रुपए बिजली के बिल के तौर पर कंपनी को जमा कर देता है।

 

आय बढ़ाने की इनपर जिम्मेदारी

प्रियंकादास, निगमायुक्त हैं। सारे विभाग इन्हीं के निर्देशन में काम करते हैं।
प्रदीप जैन, अपर आयुक्त राजस्व। वसूली से जुड़ी तमाम योजनाएं इन्हें बनाना है।

अर्चना शर्मा, संपत्तिकर प्रभरी, संपत्तिकर की पूरी वसूली का जिम्मा इनका है।
राहल सिंह राजपूत, उपायुक्त होर्डिंग, होर्डिंग का पंजीयन कर उनसे राजस्व वसूलने का जिम्मा है।

एक्सपर्ट कमेंट

रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी केएस शर्मा का कहना है कि निगम जैसी संस्थाओं में राजस्व बढ़ाने का सबसे बड़ा उपाय लीकेज रोकना है। प्रशासनिक ईमानदारी बढ़ते ही टैक्स और वसूली बढ़ जाएगी। संपत्तिकर के पूरे खाते और पूरी वसूली, होर्डिंग, तहबाजारी, पार्र्किंग में राजस्व का लीकेज रोकने के पुख्ता इंतजाम से कमाई दोगुना तक बढ़ सकती है।

 

...और इधर उधार और उम्मीद पर करोड़ों के टेंडर
- 6.67 करोड़ रुपए में दस ट्रांसफ र स्टेशन पर स्टेटिक कॉम्पेक्टर यूनिट इंस्टॉलेशन

- 1.38 करोड़ रुपए में अमराई पार्क को विकसित करना
- 2.04 करोड़ रुपए में गुलाब पार्क विकसित करना

- 30 लाख रुपए में बाग मुगालिया पार्क का विकसित
- 1.96 करोड़ रुपए में मिनी गारबेज टिपर खरीदी

- 2.16 करोड़ रुपए में टिपर खरीदी
- 3.54 करोड़ रुपए में डंपर खरीदी

- 105 करोड़ रुपए में बड़ा तालाबए छोटा तालाब व शाहपुरा तालाब के आसपास सीवेज को रोकने के लिए काम
- 109 करोड़ रुपए भोजवेट लैंड के तहत मौजूदा सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करना

- 14.51 लाख रुपए में आरआरएल तिराहा से बाग सेवनियां थाने तक सेंटर वर्ज के पौधों का रखरखाव
- 24.56 लाख रुपए में बड़ा तालाब किनारे उद्यानों का रखरखाव

- 21 करोड़ रुपए भारत माता मंदिर परिसर

 

निगम की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। समीक्षा कर रहे हैं। वसूली के लिए हम सब सड़क पर उतरेंगे और काम शुरू कराएंगे।

- आलोक शर्मा, महापौर

मैने सर्विस रोड का काम छह करोड़ रुपए में लिया था। एक करोड़ का ही भुगतान हुआ। 1.57 करोड़ का बिल दो माह से रखा है। जब तक ये मंजूर नहीं होगा, काम शुरू नहीं करेंगे।
- राकेश शर्मा, शर्मन इंडिया कंस्ट्रक्शन कंपनी

 

pankaj shrivastava Zonal Head
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