पिता के लिए जनसभाएं और प्रचार करेंगे नकुलनाथ लेकिन पिता कमलनाथ को नहीं देंगे वोट

पिता के लिए जनसभाएं और प्रचार करेंगे नकुलनाथ लेकिन पिता कमलनाथ को नहीं देंगे वोट

 

By: Pawan Tiwari

Published: 10 Apr 2019, 08:29 AM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ ने मंगलवार को अपने बेटे नकुलनाथ के साथ छिंदवाड़ा में नामांकन दाखिल किया। कमलनाथ ने छिंदवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया तो वहीं, उनके बेटे नकुलनाथ ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए छिंदवाड़ा संसदीय सीट के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। यह पहला मौका था जब पिता औऱ पुत्र ने एक साथ नामांकन दाखिल किया। कमलनाथ अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन उनके परिजन उन्हें वोट नहीं दे सकेंगे, जबकि कमलनाथ अपने बेटे नकुल नाथ को वोट दे सकेंगे। कमलनाथ अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं पर उनके परिजन उन्हें वोट नहीं दे सकेंगे।

 

क्यों वोट नहीं दे सकेंगे नकुल नाथ
कमलनाथ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से नौ बार सांसद रहे हैं। मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद अब उनके बेटे नकुलनाथ को कांग्रेस ने छिंदवाड़ा संसदीय सीट से मैदान में उतारा है। नकुलनाथ अपने पिता कमलनाथ के लिए चुनाव प्रचार तो करेंगे पर पिता को वोट नहीं दे पाएंगे जबकि कमलनाथ अपने बेटे को वोट भी देंगे और चुनाव प्रचार भी करेंगे। नकुल नाथ के वोट नहीं देने के पीछे की वजह है कमलनाथ का छिंदवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना। छिंदवाड़ा में कमलनाथ का घर शिकारपुर क्षेत्र में स्थिति हैं। शिकारपुर सौंसर विधानसभा सीट के अंतगर्गत आता है। इसलिए कमलनाथ और उनका परिवार सौंसर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। जबकि कमलनाथ स्वयं छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। इस कारण से कमलनाथ स्वयं अपने लिए भी वोट नहीं दे पाएंगे और नकुलनाथ भी उन्हें वोट नहीं दे पाएंगे। लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए कमलनाथ अपने बेटे नकुल को जरूर वोट देंगे क्योंकि सौंसर विधानसभा सीट छिंदवाड़ा संसदीय सीट के अंतर्गत आती है।

 

nakul nath

पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं नकुलनाथ
नकुलनाथ भी पहली बार चुनावी राजनीति में उतरते हुए अपने पिता की परम्परागत सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। भाजपा ने नकुलनाथ के खिलाफ नत्थन शाह को उम्मीदवार बनाया है।

कमलनाथ का गढ़ है छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा कमलनाथ का गढ़ है। कमलनाथ यहां से कभी आम चुनाव नहीं हारे। एक बार उन्हें उपचुनाव में हार का सामना जरूर करना पड़ा है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से 8 बार सांसद निर्वाचित हो चुके हैं। कमलनाथ को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपना तीसरा बेटा कहती थीं। कमलनाथ के लिए इंदिरा गांधी प्रचार करने भी आइ थीं। कमलनाथ और संजय गांधी की दोस्ती दून स्कूल से शुरू हुई थी। संजय गांधी के कहने पर ही कमलनाथ ने राजनीति में कदम रखा था।

पत्नी भी रहीं सांसद
1980 से चार बार लगातार चुनाव जीतते आ रहे कमलनाथ को सन 1996 का नाम हवाला कांड में आया। जिसके बाद उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। कांग्रेस ने इस बार कमलनाथ की जगह उनकी पत्नी अल्का नाथ को लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया। कमलनाथ की पत्नी अलका नाथ चुनाव जीत भी गईं। हवाला कांड से बरी होने के बाद कमलनाथ ने अपनी पत्नी से इस्तीफा दिलाया और 1997 में उपचुनाव हुए। इस बार कांग्रेस ने कमलनाथ को टिकट दिया हालांकि कमलनाथ अपना चुनाव मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम सुंदर लाल पटवा के हाथों हार गए। छिंदवाड़ा में कमलनाथ के राजनीतिक जीवन की एक मात्र हार है।

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