शत्रु सम्पत्ति के मामले में नवाब बेगम के 43 साल पुराने पत्र से खलबली

- सामने आया कथित पत्र 2 मई 1977 को कराची पाकिस्तान से लिखा जाना बताया जा रहा है, इस आधार पर प्रधानमंत्री से लेकर कलेक्टर तक के यहां की हुई शिकायत

भोपाल. 43 साल पहले नवाब हमीदुल्लाह खान की बेगम आफताब जहां की तरफ से सम्पत्ति को लेकर लिखे गए कथित पत्र सामने आने से एक बार फिर शत्रु सम्पत्ति का मामला खड़ा हो गया है। ईदगाह हिल्स, जहांगीराबाद, ऐशबाग, कोहेफिजा, हलालपुर, लालघाटी, बोरबन, बेहटा, लाऊखेड़ी, बैरागढ़ की दो तिहाई आबादी के क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों की सम्‍पत्तियां शत्रु सम्पत्ति की जद में आ सकती हैं। सुल्तानिया रोड निवासी मधुदास बैरागी ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री से लेकर भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कलेक्टर के यहां शिकायत की है। पत्र में मांग की है कि नवाब भोपाल की जूनियर बेगम आफताब जहां के नाम से भोपाल, रायसेन और सीहोर में जहां भी संपत्तियां हैं उन्हें शत्रु संपत्ति घोषित करते हुए केंद्र सरकार अपने आधीन ले। अगर ऐसा होता है तो करीब 15 हजार करोड़ मूल्य से अधिक की सम्पत्ति शत्रु सम्पत्ति घोषित हो सकती है।

इस मामले को लेकर शिकायत करने वाले ने आवेदन में बताया है कि ये पत्र तत्कालीन केंद्र सरकार के सचिव और ऑफिसर इंचार्ज कस्टोडियन एनीमी प्रॉपर्टी, केंद्रीय गृह मंत्रालय को 2 मई 1977 को कराची पाकिस्तान से लिखा गया है। उस समय इस पर अमल नहीं हो पाया और इधर भू माफिया सक्रिय हो गए, काफी जमीनें बेच दी गईं, पत्र को दबा दिया गया। लेकिन दो महीने पहले जून-जुलाई में केंद्रीय सरकार का एक दल पत्र की कॉपी लेकर भोपाल आया और आफताब जहां के नाम की संपत्तियां की जानकारी की। इसके बाद ये मामला एक बार फिर गरमा गया। मधुदास बैरागी ने सोमवार को

ये कहता है शत्रु संपत्ति कानून
जिन लोगों ने भारत से जाकर पाकिस्तान या चीन की नागरिकता ली हैं या ले चुके हैं उनकी संपत्तियों को भारत सरकार ने अपने अधीन करने के लिए 1967 शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया। इसमें दुश्मन देश में जाकर बसने वाले भारतीय नागरिकों की संपत्तियों को शत्रु संपत्तियांं घोषित करने का प्रावधान है। जूनियर बेगम पाकिस्तान चली गईं थी, इस उनकी सम्पत्ति शत्रु सम्पत्ति की जद में आ सकती है। ये पत्र काफी पहले लिखा है, लेकिन उजागर अब हो रहा है।

वर्जन

ये पत्र इतने सालों से क्यों सामने नहीं आया, अभी दो माह पहले ही क्यों आया। इस पत्र की वैधानिकता कितनी है ये भी क्लीयर नहीं है। जरूरत पडऩे पर हम इसका विरोध करेंगे।
जगदीश छावानी, घर बचाओ संघर्ष समिति के उप संयोजक

प्रवेंद्र तोमर Reporting
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