211 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट का धंसकने लगा फ्लायओवर, देखें वीडियो

211 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट का धंसकने लगा फ्लायओवर, देखें वीडियो

Deepesh Tiwari | Updated: 31 Jul 2019, 10:16:26 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

एक महीने पहले चालू हुए ब्रिज का लेंटर भी इसी के साथ नीचे की तरफ झुक रहा है...

भोपाल। सरकारों के तमाम प्रयासों के बावजूद निर्माण कार्यों में लापरवाही कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसका एक खास उदाहरण मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में देखा जा सकता है। जहां 211 करोड़ के प्रोजेक्ट के तहत बना लालघाटी से एयरपोर्ट रोड तक का एक्सप्रेस-वे एक बारिश तक नहीं सह पाया। जिसके चलते नवनिर्मित गांधीनगर फ्लायओवर बारिश में धंसकने की कगार पहुंच गया है।

दरअसल लालघाटी से एयरपोर्ट रोड तक बन रहे एक्सप्रेस-वे के नवनिर्मित गांधीनगर फ्लायओवर बारिश में धंसकने की कगार पहुंच गया है। रात भर की बारिश के बाद मंगलवार को ब्रिज की रिटेनिंग वॉल के सीमेंटेंड ब्लॉक्स बाहर की तरफ झूलने लगे। एक महीने पहले चालू हुए ब्रिज का लेंटर भी इसी के साथ नीचे की तरफ झुक रहा है।

 

211 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और दिल्ली की फर्म सीडीएस कंस्ट्रक्शन का काम कर रही है। कंपनी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, जिसके चलते एमपी रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने सीडीएस को ब्लैक लिस्टेड कर दिया था।

एनएचएआई प्रबंधन की गंभीर लापरवाही तब उजागर हुई जब एमपीसीजी हेड विवेक जायसवाल ने इसे मामूली घटना बताते हुए सुधार कार्य कराने की बात कही। एनएचएआई अब प्राइवेट कंपनी के खिलाफ पेमेंट ब्लॉक करने की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। लगभग गिरने की कगार पर पहुंच चुके इस फ्लायओवर से बड़ा हादसा होने की आशंका है।

सुधार करने के लिए कंपनी के इंजीनियर्स को निर्देश दिए हैं। यदि भ्रष्टाचार पाया गया तो कंपनी के भुगतान रोके जाएंगे।
- विवेक जायसवाल, एनएचएआई, एमपी-सीजी हेड

सीडीएस कंपनी के भ्रष्टाचार के मामले
: लालघाटी, सिंगारचोली आरओबी, एयरपोर्ट सिक्सलेन रोड का 211 करोड़ रुपए का काम एनएचएआई ने सीडीएस कंपनी को ही दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट में 21 करोड़ रुपए का ड्रैनेज सिस्टम नहीं बनाकर पैसे बचाए हैं।
: भोपाल से ब्यावरा तक 100 किमी लंबाई में 600 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। एनएचएआई ने ये काम भी दिल्ली की सीडीएस कंपनी को दिया है। टेंडर शर्तों के मुताबिक 100 किमी लंबाई में फोरलेन रूट सीमेंट कॉन्क्रीट से तैयार किया जाना था, लेकिन सीडीएस ने सिर्फ एक रूट सीमेंट से बनाकर लागत बचाने के चक्कर में दूसरे रूट पर डामर बिछा दिया।

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