scriptNemavar massacre case, His Excellency did not meet the victims | नेमावर नरसंहार का मामला फिर गरमाया, राज्यपाल से मिलने पहुंचे पीडि़तों से नहीं मिले महामहिम | Patrika News

नेमावर नरसंहार का मामला फिर गरमाया, राज्यपाल से मिलने पहुंचे पीडि़तों से नहीं मिले महामहिम

नारेबाजी और राज्यपाल पर टिप्पणी से गरमाई सियासत

भोपाल

Published: January 12, 2022 12:57:19 am

भोपाल। देवास जिले के नेमावर नरसंहार का मामला छह माह बाद फिर से गरमा गया है। हत्याकाण्ड के आरोपियों को सजा दिलाने, कार्यवाही की मांग को लेकर एक जनवरी से शुरू हुई न्याय यात्रा 11वें दिन मंगलवार को भेापाल पहुंची। न्याय यात्रा में शामिल परिजन राज्यपाल से मुलाकात करना चाह रहे थे, लेकिन राज्यपाल ने इनसे मुलाकात नहीं की। इसको लेकर वहां मौजूद लोगों ने राज्यपाल पर ही टीका टिप्पणी कर दी। इससे राजनीति गरमा गई। राजभवन तक पहुंचे लोगों के साथ कांग्रेस नेता भी शामिल रहे। इनमें राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पीसी शर्मा, कांतिलाल भूरिया सहित अन्य नेता शामिल रहे।
नेमावर नरसंहार का मामला फिर गरमाया, राज्यपाल से मिलने पहुंचे पीडि़तों से नहीं मिले महामहिम
नेमावर नरसंहार का मामला फिर गरमाया, राज्यपाल से मिलने पहुंचे पीडि़तों से नहीं मिले महामहिम
न्याय यात्रा की खबर भेापाल आते ही पुलिस प्रशासन सतर्क हुआ। नेमावर आदिवासी परिवार नरसंहार में जिंदा बची परिवार की एकमात्र सदस्य भारती कास्डे से दिग्विजय सिंह, सज्जन सिंह वर्मा, पीसी शर्मा सहित अन्य लोगों ने मुलाकात की। यहां से अन्य कांग्रेसी भी इनके साथ हो लिए। वे राजभवन की ओर कूच करते इसके पहले ही पुलिस ने इन्हें पीसीसी के पास ही रोक लिया। यहां न्याय यात्रा में शामिल लोगों और पुलिस के बीच हुज्जत भी हुई। आखिरकार पुलिस ने दिग्विजय ङ्क्षसह समेत न्याय यात्रा शामिल लोगों को पुलिस वाहन से राजभवन तक पहुंचाया।
राजभवन पहुंचते ही बिगड़ गया मामला -
पुलिस ने सभी को राजभवन के बाहर उतार दिया। लेकिन उन्हेंं राजभवन में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इस पर दिग्विजय बोले, हम प्रशासन को पूरा सहयोग कर रहे हैं। पीडि़त परिवार के लोग न्याय मांगने आए हैं। फिर भी मुलाकात नहीं कराई जा रही है। यह अन्याय है। दिग्विजय ने कहा कि 10 लोगों को मुलाकात के लिए बुलाया था। यह हुज्जत चल रही थी, इसी बीच संदेश आया कि पांच लोगों की मुलाकात हो जाएगी। कुछ लोगों को राजभवन जाने दिया गया लेकिन वहां कोरोना संक्रमण का हवाला देते हुए राज्यपाल से मुलाकात नहीं कराई गई।
ऐसे गहराया विवाद -
राज्यपाल से मुलाकात नहीं होने पर सज्जन सिंह वर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि हमें गर्व था कि आदिवासी व्यक्ति को राज्यपाल बनाया गया है। हमें ये क्या पता था कि कोरोना से डरने वाले राज्यपाल जो कोरोना के डर से अपने वर्ग को न्याय नहीं दिला सकता, ऐसी जिंदगी से मौत भली। इस पर वहां मौजूद लोगों ने राज्यपाल के खिलाफ टिप्पणी करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया कि कांग्रेस के नेता धैर्य ही नहीं, विवेक भी खोते जा रहे हैं। संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर ऐसी ओछी टिप्पणी न केवल राजनैतिक मर्यादाओं को हनन है, अपितु सबके कल्याण की कामना करने वाली भारतीय परंपरा का भी अपमान है। आपकी यह टिप्पणी ह्दय प्रदेश के ह्दय पर आघात है।

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