नए नियम से राजधानी में सालाना बिकेंगे 12 करोड़ के हेलमेट

नए नियम से राजधानी में सालाना बिकेंगे 12 करोड़ के हेलमेट

Pushpam Kumar | Publish: Jun, 14 2019 07:51:00 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

दोपहिया वाहन के साथ दो हेलमेट खरीदने की अनिवार्यता के आदेश पर उठ रहे हैं सवाल

भोपाल. दो पहिया वाहन के साथ दो हेलमेट खरीदने की अनिवार्यता के आदेश पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि राजधानी और आसपास के क्षेत्र में हर साल 60 हजार दोपहिया वाहन खरीदे जाते हैं। हेलमेट की औसत कीमत एक हजार रुपए मानी जाए तो हर साल एक लाख बीस हजार हेलमेट की बिक्री होगी । 12 करोड़ रुपए का गणित बैठता है। इससे आम उपभोक्ता की जेब पर बोझ पडेग़ा तो हेलमेट निर्माता कंपनियों और वाहन डीलर की चांदी हो जाएगी। वाहन डीलर और परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश का कंपनियां अपने लाभ के लिए उपयोग करेंगी।

दावा है-पीछे बैठने वाला भी होगा सुरक्षित
इधर, परिवहन विभाग का मत है कि दुर्घटना के दौरान पीछे बैठे व्यक्ति को भी खतरा रहता है। नए नियम में बड़ी गफलत है कि अगर किसी के पास पहले से हेलमेट है तो क्या होगा। विभाग के अधिकारी कहते हैं कि ऐसे लोगों को गाड़ी खरीदते समय हेलमेट की रसीद देनी होगी। मतलब यह है कि लोगों को दो हेलमेट खरीदने ही पड़ेंगे।


वाहनों की बिक्री में हर साल 15 फीसदी की वृद्धि
वाहन डीलरों की मानें तो राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में वाहन बिक्री लगातार बढ़ रही है। डीलरों के मुताबिक राजधानी में हर साल दो पहिया वाहनों की बिक्री में 15 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इससे हेलमेट निर्माता कंपनियों और वाहन डीलर की कमाई भी हर साल बढ़ेगी।

परिवहन विभाग का आदेश समझ से परे है। हेलमेट खरीदने की अनिवार्यता से पहले दुर्घटनाओं के असली कारणों को खोजने और विभाग की खामियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए। यह फैसला वाहन डीलरों को फायदा पहुंचाएगा। यह उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है।


प्रकाश अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता


हाइकोर्ट के 2 जनवरी 2018 को आए आदेश में दो हेलमेट खरीदने जैसा कुछ नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार ने जवाब फाइल किया है कि सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में मामला (डब्लूपी क्रंमाक 235/2012, 295/2012) चल रहा है, जिसमें मप्र शासन को पार्टी बनाया है। हाईकोर्ट से यह केस डिस्पोज कर दिया गया था।
डॉ. एके वाजपेयी, याचिकाकर्ता

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