6 माह में भी सारी रिपोर्ट नहीं दे पाया शासन, हम मामले को कैसे आगे बढ़ाएं

एनजीटी ने केरवा से कलियासोत के बीच हुए निर्माण संबंधी शासन की अधूरी रिपोर्ट पर जताई नाराजगी

केरवा से कलियासोत डैम के बीच हुए निर्माण कार्यों संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने शासन के प्रति नाराजगी जताई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पिछले 6 माह से शासन ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी। जो रिपोर्ट दी वह भी आधी-अधूरी दी। अब कहा जा रहा है कि और रिपोर्ट देंगे। एनजीटी ने शासन को 5 फरवरी तक सभी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कोई रिपोर्ट नहीं ली जाएगी।

एनजीटी सेंट्रल जोनल बेंच में मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से बताया गया कि केरवा से कलियासोत के बीच हुए निर्माण कार्यों की रिपोर्ट सौंप दी गई है। इसमें 15 साल पहले की गूगल इमेज और वर्तमान के आधार पर पूरे निर्माण बताए गए हैं। वर्तमान में करीब 158 हेक्टेयर क्षेत्र में नॉन फॉरेस्ट एक्टिविटीज चल रही हैं। इसी बीच शासन की ओर से बताया गया कि उन्हें अभी मामले में एक रिपोर्ट और सबमिट करना है। यह रिपोर्ट पिछली रिपोर्ट का ही हिस्सा है। इस पर ट्रिब्यूनल के जस्टिस रघुवेन्द्र एस राठौर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शासन पिछले 6 माह से पूरी रिपोर्ट ही जमा नहीं कर पाया। मामला आगे खिंचता जा रहा है। आवेदक को इस संबंध में क्या जवाब देंगे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी। इसके पहले सभी संबंधित रिपोर्ट शासन सौंप दे।

टीएंडसीपी लैंडयूज ऐसा तय करे कि जंगल को नुकसान न हो
आवेदक की ओर से एडवोकेट संभव सोगानी ने सुनवाई के दौरान बताया कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट सही है। आवेदक भी उससे सहमत है। उन्होंने एनजीटी से मांग की कि केरवा से कलियासोत डैम के बीच वन क्षेत्र में जो निर्माण किए जा रहे हैं उन्हें तत्काल रोका जाए। यहां किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं मिले। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग भी इस क्षेत्र में ऐसा लैंडयूज तय करे कि वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाला किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य यहां नहीं हो सके। इसके लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं मिल सके।

परिषद की बैठक का हवाला देकर एनजीटी से ननि ने बढ़वा ली तारीख, बैठक में प्रस्ताव आया ही नहीं


एनजीटी से स्लॉटर हाउस शिफ्टिंग के मामले में नगर निगम ने यह कहते हुए कुछ समय और ले लिया कि निगम परिषद की बैठक चल रही है। उसमें यह प्रस्ताव पास हो जाएगा। जबकि हकीकत में मंगलवार को हुई परिषद की बैठक हंगामे के बीच ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। परिषद के समक्ष स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव ही पेश नहीं हो पाया। एनजीटी सेंट्रल जोनल बेंच में मंगलवार को विनोद कुमार कोरी की याचिका पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई। इस दौरान नगर निगम की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि स्लॉटर हाउस को शिफ्ट करने के लिए आदमपुर छावनी में ही दूसरी जमीन दी जा रही है। जमीन का संबंधित कंपनी के साथ चयन का काम चल रहा है। एनजीटी ने निगम से मंजूरी की बात पूछी तो बताया गया कि अभी निगम परिषद की बैठक चल रही है। उसमें प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। पूरा जवाब पेश करने के लिए कुछ समय और चाहिए। जबकि निगम परिषद में स्लॉटर हाउस का न तो प्रस्ताव पेश हो पाया और न उस पर कोई चर्चा हो पाई। एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी को तय की है। तब तक जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।

 

सुनील मिश्रा
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