महंगा पड सकता है सीवेज खुले में बहाना, लगा 30 लाख का एनवायर्नमेंट कंपेनसेशन

एनजीटी के समक्ष समिति ने पेश की रिपोर्ट, ट्रिब्यूनल ने कहा एक सप्ताह में दूर करें रहवासियों की समस्याएं

भोपाल। करोंद बायपास स्थित द्वारकाधाम कॉलोनी में सीवेज खुले में बहाने और रहवासियों को गंदा पानी सप्लाई करने के मामले में एनजीटी द्वारा गठित समिति ने 30 लाख रूपए पर्यावरण क्षति जुर्माने का आकलन किया है। समिति ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष पेश कर दी है। हालांकि एनजीटी ने वसूली के संबंध अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने रिटायर्ड मेजर जनरल हरप्रीत सिंह बेदी की याचिका पर बुधवार को ऑनलाइन सुनवाई की। इस दौरान पिछली सुनवाई में गठित सीपीसीबी, एमपीपीसीबी और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अधिकारी वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है।

रिपोर्ट में एनजीटी द्वारा पूर्व में तय किए गए क्राइटेरिया और सीपीसीबी की गाइडलाइन के अनुसार पर्यावरण क्षति जुर्माने का आकलन किया गया है। अनट्रीटेड सीवेज खुले में बहाने के लिए 15 लाख 7 हजार 35 रूपए और पर्यावरणीय अनुमति लिए बिना भूजल का उपयोग करने के लिए 14 लाख 592 रूपए का जुर्माना आकलित किया गया है। इस प्रकार समिति ने कुल 30 लाख दो हजार 55 रूपए का पर्यावरणीय क्षति जुर्माना वसूलने की सिफारिश की है। सुनवाई के दौरान द्वारकाधीश हवेली बिल्डर की ओर से ट्रिब्यूनल द्वारा जारी नोटिस के संबंध में जवाब प्रस्तुत किया गया। बिल्डर की ओर से सफाई दी गई कि जो सीवेज बह रहा है वह उनकी कॉलोनी का नहीं बल्कि पड़ोस की दूसरी कॉलोनी का है। इसके साथ सोसायटी के सदस्यों द्वारा राशि नहीं दिए जाने के चलते साफ पानी की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई और ट्रिब्यूनल को बताया कि इसके पहले कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति मौके का निरीक्षण कर इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि द्वारकाधाम कॉलोनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पड़े हुए हैं और सीवेज खुले मे ंबह रहा है। पीसीबी के अधिकारियों ने भी बताया कि कॉलोनी का विकास करने वाले द्वारकाधीश हवेली बिल्डर ने न तो कंसेंट ली है और न सिया से पर्यावरणीय अनुमति ली है।

एनजीटी ने कहा रहवासियों की समस्याएं दूर करें

एनजीटी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बिल्डर से कहा कि इतनी बड़ी कॉलोनी के सैकड़ों रहवासियों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसलिए सबसे पहले उनकी समस्याओं का समाधान करें। बिल्डर ने पर्यावरणीय क्षति जुर्माना माफ करने की अपील की है। हालांकि ट्रिब्यूनल के एक्सपर्ट मेंबर सत्यवान सिंह गर्बयाल ने पर्यावरण क्षति जुर्माना वसूले जाने पर जोर दिया। लेकिन अभी इसकी वसूली के संबंध में एनजीटी ने आदेश सुरक्षित रखा है। बिल्डर को एक सप्ताह का समय दिया गया है जिसमें रहवासियों को स्वच्छ पानी सप्लाई करने और सीवेज ट्रीटमेंट की व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

सुनील मिश्रा
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