हाईटेक जालसाज नाइजीरियन गिरोह मामले पर बोले एक्सपर्ट बैंक करें ये एक काम तो बंद हो जाए हैकिंग

sanjana kumar

Publish: Oct, 13 2017 12:41:06 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
हाईटेक जालसाज नाइजीरियन गिरोह मामले पर बोले एक्सपर्ट बैंक करें ये एक काम तो बंद हो जाए हैकिंग

जब खाताधारक फ्रॉड की सूचना बैंक को देता है, तो उसमें तत्काल कोई एक्शन नहीं होता। नतीजतन, वह खाते से पैसा निकालने में सफल हो जाते हैं...

 

भोपाल। नाइजीरियन ठग गिरोह ने साइबर सेल की पूछताछ में कबूला कि अधिकतर वारदात की जानकारी खाताधारक को मोबाइल फोन पर मैसेज से तुरंत मिल जाती है। जब खाताधारक फ्रॉड की सूचना बैंक को देता है, तो उसमें तत्काल कोई एक्शन नहीं होता। नतीजतन, वह खाते से पैसा निकालने में सफल हो जाते हैं। इतना ही नहीं ठगी गई रकम सप्ताह भर तक उनके खातों में रहती है, फिर भी बैंक रिकवरी करने का कोई एक्शन नहीं लेते। जांच एजेंसी ने नाइजीरियन गिरोह के सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।

मालूम हो कि साइबर सेल ने मंडीदीप के व्यापारी आनंद जैन के बैंक खाते को हैक कर ४२ लाख रुपए ठगने वाले नाइजीरियन गिरोह के छह जालसाजों को गिरफ्तार किया था। जबकि, दो फरार हैं। पुलिस ने उन पर गुरुवार को पांच हजार का इनाम घोषित किया है।

फूटी कौड़ी नहीं दी
साइबर सेल प्रदेशभर में हुई ऑनलाइन ठगी के जनवरी से अब तक करीब ५० लाख रुपए वापस करा चुकी है। जबकि बैंक ठगी के शिकार एक भी बैंख खाताधारक की रकम नहीं वापस कराई। जनवरी से अब तक प्रदेशभर में २० करोड़ से अधिक की ठगी की आशंका है। अकेले भोपाल में ढाई करोड़ से अधिक की ठगी हुई है।

तीन दिन से काट रहे बैंक के चक्कर
10 अक्टूबर को मेरे बैंक अकाउंट से 93 हजार रुपए जालसाजों ने निकाल लिए। इसका खुलासा तब हुआ जब मेरे मोबाइल में ट्रांजेक्शन का मैसेज आया। दो मिनट के अंदर मैंने आईसीआईसीआई के हेल्प लाइन कॉल सेंटर में जालसाजी की सूचना दी। 20 मिनट बाद बैंक पहुंचकर खाता लॉक कराया। इसके बावजूद बैंक जिस फ्रॉड खाते में रकम ट्रांसफर हुई उसे नहीं बता सकी। न ही फ्रॉड अकाउंट का ट्रांजेक्शन रोका गया। तीन दिन से बैंक के चक्कर काट रहा हूं। कोई यह बताने को तैयार नहीं कि आखिर वारदात कैसे हुई। किसके खाते में रकम गई। वारदात में मुझे बैंकों की भूमिका संदिग्ध लग रही है।
- अमरलाल वाधवानी, ठगी के शिकार

10 दिन में रकम वापस करनी होगी

छह जुलाई २०१७ को आरबीआई ने ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के लिए सर्कुलर जारी किया था। जिसके मुताबिक यदि ग्राहक 3 दिन के भीतर ऑनलाइन बैंकिंग से संबंधित धोखाधड़ी की जानकारी बैंक को दे देते हैं तो उन्हें कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। 10 दिन के
ठगी की पूरी रकम उसके खाते में लौटाई जाएगी। इसके साथ ही तय समय में बैंक को सूचना नहीं देने, बैंक खाते ही की डिटेल देने पर हुए नुकसान की जिम्मेदारी खाताधारक की होगी।

जांच एजेंसी को भी नहीं देते जानकारी

बैंकिंग फ्रॉड की जांच करने जब साइबर सेल, पुलिस की अन्य एजेंसियां बैंकों से जानकारी मांगती हैं तो उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती। कई मामलों में जानकारी नहीं मिलने से जालसाज नहीं पकड़े गए। साइबर सेल के अधिकारियों का कहना कि बैंकमुख्यालय से जानकारी लेने की बात कहकर टाल देते हैं।

एक्सपर्ट व्यू

सूचना मिलने के बाद यदि बैंक जालसाजों के बैंक खाते को तुरंत ब्लाक कर दें तो अधिकतर वारदात नहीं हो पाएंगी। रिकवरी भी हो जाएगी। बैंक को डिटेल तुरंत मिलती हैं। बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया जाता। ठगी का शिकार खाताधारक परेशान होता है। कई मामलों में बैंक साइबर सेल तक की मदद नहीं करते।
शैलेन्द्र सिंह चौहान, एसपी साइबर सेल

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned