नाइजीरियन गैंग मामले में बड़ा खुलासा, इंदौर में की 20 लाख की हैकिंग, भोपाल में पकड़े गए थे हैकर्स

sanjana kumar

Publish: Oct, 12 2017 04:07:08 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
नाइजीरियन गैंग मामले में बड़ा खुलासा, इंदौर में की 20 लाख की हैकिंग, भोपाल में पकड़े गए थे हैकर्स

नाइजीरियन गैंग मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सायबर पुलिस के पास राजधानी समेत प्रदेश के अन्य शहरों से भी अलग-अलग करीब 6 शिकायतें पहुंची हैं।

 

भोपाल। नाइजीरियन गैंग मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। सायबर पुलिस के पास राजधानी समेत प्रदेश के अन्य शहरों से भी अलग-अलग करीब 6 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें से फिलहाल इंदौर की ही जानकारी सामने आई है कि यहां 20 लाख रुपए की हैकिंग की गई है। आपको बता दें कि राज्य सायबर पुलिस इन आरोपियों की तलाश कर रही है। वहीं बुधवार को सायबर पुलिस की गिरफ्त में आए अपराधियों में से दो अब भी फरार हैं, पुलिस ने इन पर इनाम की घोषणा भी की है।

जानें पूरा मामला

संदिग्ध नाइजीरियनों के गिरफ्त में आते ही राज्य सायबर पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की धरपकड़ की कार्रवाई तेज कर दी है। जानें कैसे पकड़े गए नाइजीरियन और अब ऐसे की जा रही है तफ्तीश...

मंडीदीप की एक फर्म के खाते को हैक कर लाखों रुपए निकालने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह को साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल ने गिरफ्तार किया है। गैंग के करीब ६ सदस्यों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। साइबर क्राइम ने इन आरोपियों से कड़ी पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये अपराधी नाइजीरियन के साथ मिलकर भारतीयों को लूट रहे हैं। खुद नाइजीनियन ही इस साइबर क्राइम चैन का मास्टर माइंड है। पूरे भारत के कई शहरों में अपराधियों की पूरी चेन इस तरह के अपराधों को अंजाम दे रही है। पूरी एक नाइजीरियन गैंग किस तरह कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के भारतीयों के साथ मिलकर भारतीयों को लूट रही है...पढ़ें पूरी खबर...

नाइजीरियन है मास्टरमाइंड

साइबर क्राइम ब्रांच भोपाल ने मंडीदीप फर्म अकाउंट हैक के मामले में जांच की तो सामने आया कि नाइजीरियन भारतीयों को लूट रहे हैं। कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के भारतीय निवासी ही उनका साथ दे रहे हैं। इसके साथ ही भारत में साइबर अपराधों को अंजाम देने वाली इस अंतरराष्ट्रीय गैंग का मास्टर माइंड भी नाइजीरियन ही है। भारतीय अपराधी चंद रुपयों के खातिर भारतीयों के खाते के पासवर्ड और आईडी नाइजीरियन्स को आसानी से उपलब्ध करवा रहे हैं।

बैंकों का नहीं मिलता सहयोग

खातेदारों के साथ होने वाली इस तरह की धोखाधड़ी के मामलों में पुलिस को बैंकों का सहयोग नहीं मिलता। क्योंकि बैंक के पेमेंट गेटवे इस संबंध में कुछ भी बात करने में रुचि नहीं दिखाते, जिससे इन मामलों में बैंकों की भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाती। यदि धोखाधड़ी के इन मामलों की असलियत पता लगाने के लिए बैंक खुद पहल करे तो इन अपराधों पर लगाम कसी जा सकती है। मंडीदीप की एक फर्म के साथ हुई अकाउंट हैंकिंग की इस घटना में भी बैंक से जो भी जानकारियां मिली वे सभी अलग-अलग थी। इसके अलावा बैंक की टेक्रिकल टीम बुलाने पर भी कई जानकारियां तो उपलब्ध ही नहीं हो सकीं।

ये भी बड़ा सवाल कैसे चोरी हो जाता है पासवर्ड
साइबर पुलिस के सामने ये भी बड़ा सवाल है कि आखिर बैंकों से मिला अकाउंट आईडी और पासवर्ड चोरी कैसे हो जाता है। इस संबंध में भी साइबर पुलिस बैंकों से सवाल करती है, लेकिन बैंक इस मामले में कुछ भी बता पाने में समर्थ नहीं होते कि आईडी और पासवर्ड कैसे और कहां चोरी हुआ।

पूरे भारत में फैले हैं तार

मंडीदीप में हैंकिंग के इस मामले में आरोपियों ने 42 लाख रुपए की जो राशि निकाली थी, उसे भारत के कई राज्यों के शहरों में अलग-अलग खातों में जमा करवाई। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में सामने आए इस सच के बाद आरोपियों की धरपकड़ के लिए साइबर पुलिस की कई टीमें इन प्रदेशों में रवाना की गई। सइबर पुलिस की टीम को इन अपराधियों का पता लगाने के लिए मदुरई(तमिलनाडू), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), दिल्ली, मुंबई(महाराष्ट्र), गुजरात, उत्तर प्रदेश, रीवा(मप्र) आदि राज्यों में २० दिन तक भटकना पड़ा। दिन-रात की मशक्कत के बाद पुलिस को आरोपियों की जानकारी मिली।

नाइजीरियन साइबर फ्रॉड को बना रहे पेशा
अधिकांश बैंक हैकिंग फ्रॉड मामलों में नाइजीरियनों की भूमिका संदिग्ध रहती है। नाइजीरियन विभिन्न वाहनों से भारत आते हैं, जैसे पर्यटक वीजा, शिक्षा वीजा और मेडिकल वीजा। इन वीजा के आधार पर वे भारत में प्रवेश करते हैं। लेकिन वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वे यहीं रुके रहते हैं। अधिकांश नाइजीरियन नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर इस साइबर फ्र्रॉड को ही अपना पेशा बना लेते हैं।

बैंकों में खुले फर्जी खाते होते हैं इस्तेमाल

साइबर पुलिस को मंडीदीप के इस मामले में जांच के बाद यह भी पता चला कि बैंक में रकम ट्रांसफर करने के लिए फर्जी खातों का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह आगे रकम भी इन्हीं फर्जी खातों से निकाली गई। बैंकों में भारी रकम एक साथ निकाली गई। लेकिन इस बारे में बैंक न तो खातेदार के बारे में कोई जानकारी देते हैं और न ही भारी रकम निकालने के संदर्भ में यहां तक कि जरूरत पडऩे पर बैंक जांच-पड़ताल की इजाजत तो दूर फुटेज तक उपलब्ध नहीं करवाते। पुलिस को संदेह है कि बैंकों का इस तरह पीछे हटना फर्जी खाते खुलवाने की बात को साबित करता है।

कर लेते हैं पैसों का बंटवारा
इस तरह के धोखाधड़ी के मामलेां में निकाली गई राशि का बड़ा हिस्सा नाइजीरियन के हिस्से में आता है। बाकी रकम भारतीय दलालों में बंट जाती है।

भारतीय दलाल ऐसे कर रहे हैं मदद
भारतीय दलाल नाइजीरियन्स को आसानी से किराए के मकान उपलब्ध करवा देते हैं। ज्यादा पैसों या किराए के लालच में भारतीय इन्हेंं बिना किसी पूछताछ के मकान किराए पर दे देते हैं। फर्जी पते पर इनके हर काम आसानी से करवा दिए जाते हैं। उस रकम की नगद निकासी कर अपना हिस्सा लेकर खाता धारक को दे देना भारतीय दलालों का काम है। फर्जी सिम उपलब्ध करवाने के लिए भी भारतीय कुछ विशेष रिटेलर्स की मदद से ऊंचे दामों पर सिम खरीद ली जाती है। इस फर्जी सिम के लिए शहर के बाहर के लोगों को किराए पर बुलाया जाता है। ये फर्जी सिम किराएदार दूसरे शहरों में जाकर सिम बनवाते हैं और इन्हें लाकर दे देते हैं। जिसका नाइजीरियन इस्तेमाल करते हैं।

इन्हें किया गिरफ्तार

* पकड़े गए आरोपियों में एक भोपाल निवासी है। रामसिंह उर्फ राजवीर पिता कोमल उम्र २७ वर्ष नाम यह आरोपी राजीव नगर का रहने वाला है। आरोपी फर्जी सिम बनवाने और कार्ड बैंक खाते बनाने में अहम भूमिका निभाता था।
* शिवेंद्र सिकरवार नामक आरोपी को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर कड़ी पूछताछ शुरू की तो सामने आया कि वह फेक आईडी और सिम बनाने के लिए उसने 50 हजार रुपए लिए और एउक वकील को ३५ हजार रुपए में ठेका दिया।
* इबेजिम पीटर शिकांसों(22) पिता मि. पैरर नामक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसका काम नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर बैंक खाते उपलब्ध करवाना था। जेल में बंद नाइजीरियनों से संपर्क कर मोबाइल नंबर प्राप्त कर उन्हें आगे बढ़ाना था। ताकि नाइजीरियनों की मदद लेकर भारतीय बैंक फ्रॉड करने वालों को ढूंढा जा सके।
* डेविड ऑल्यूतायो फ्रेडेरिक(29) पिता अबलडोन डेविड नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। नाइजीरियनों के जेल में बंद रहने पर उनसे संपर्क करता था। उनके मोबाइल नंबर कलेक्ट कर भारतीय बैंकों में फ्रॉड करने वालों का पता लगाता था।
* एवरेस्ट शिनेडू ओपारेके(27) पिता ओपारेके क्रिश्चियन भी नाइजीरिया में बैठे हैकर्स के साथ मिलकर काम करता था। वह डेविड और इबेजिम की तरह जेलों में बंद नाइजीरियन से संपर्क कर उनके मोबाइल नंबर पता करता और भारतीय बैंकों में फ्रॉड करने वालों से मिलकर हैकिंग को अंजाम देता था।

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