कान्हा के पिंजरे में 10 माह से कैद बाघ को छोडऩे को लेकर NTCA और वन विभाग आमने-सामने

- महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र से एक साल पहले सारणी में आया था बाघ

By: Ashok gautam

Published: 05 Jan 2020, 08:39 AM IST

भोपाल। कान्हा नेशनल पार्क के पिंजरे में दस माह से कैद बाघ को जंगल में छोडऩे को लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ( NTCA ) और वन विभाग आमने-सामने हो गया है। एनटीसीए ने बाघ को पिंजरे (इनक्लोजर) से जंगल में छोडऩे के लिए वन विभाग को पत्र लिखा है। वन विभाग के अधिकारी एनटीसीए के इस निर्णय पर तैयार नहीं हो रहे हैं। वाइल्डलाफ के अधिकारियों का कहना है कि बाघ पहले से दो लोगों का शिकार कर चुका है, इससे उसमें अब जंगल में छोडऩा उचित नहीं है।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर क्षेत्र के जंगल से एक साल पहले तडोबा होते हुए बैतूल के सरणी के पावर प्लांट के पास बाघ को पकड़ा गया था। कुछ दिन बाद जंगल में छोड़ा गया, लेकिन वह बैतूल के जंगलों में पहुंच गया था। इसके बाद उसे वहां से पकड़कर कान्हा के गोरेला इनक्लोजर में रखा गया, दो माह बाद जब उसे सतपुड़ा में छोड़ा गया तो वह फिर से बैतूल के सारणी में पहुंच गया। तीसरी बार पकडऩे के बाद उसे पिछले दस माह से कान्हा नेशनल पार्क के पिंजरे में रखा गया है।

इसको लेकर एनटीसीए ने वन विभाग को कहा है कि उसे जंगल में छोड़ दे किसी भी बाघ को लंबे समय तक पिंजरे में रखना उसके सेहत लिए ठीक नहीं है। इसको लेकर वाइल्ड लाइफ शाखा के अधिकारियों ने कहा है कि उसे मध्य प्रदेश के जंगलों में नहीं छोड़ा जा सकता है। उसे दो बार इनक्लोजर से छोड़ा जा चुका है। वह बार-बार सारणी पहुंच जाता है। चूंकि वह दो लोगों को पहले शिकार कर चुका है इसके चलते वह मानव शिकार के भी आदी हो चुका है।


महाराष्ट्र नहीं कर रहा कोई पहल

माहाराष्ट्र सरकारी की तरफ से अभी तक उसे वापस ले जाने के संबंध में कोई पहले नहीं की जा रही है। वन विभाग का अमला उसे यहां इनक्लोजर में बंद कर खाना-पानी दे रहा है। बाघ जवान है, एनटीएसी और महाराष्ट्र सरकार इस पर अगर कोई निर्णय नहीं लेता है तो लंबे समय तक इनक्लेजर में रखकर खाना-पानी देना पड़ेगा। बताया जाता है कि बैठकार खाना-पानी मिलने से उसके शरीर का भार भी बढ़ता जा रहा है।

उड़ीसा ने सुंदरी को वापस भेजने नहीं की कोई पहल

वहीं उड़ीसा सरकार ने भी बाघिन सुंदरी को वापस मप्र में वापस भेजने के संबंधि में तक प्रदेश सरकार से कोई पहल नहीं की है। जबकि इधर वन विभाग का अमला बाघिन सुंदरी को यहां लेने के लिए तैयार है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुंदरी को यहां तक पहुंचाने की व्यवस्था खुद करना पड़ेगा। यहां लाने से पहले उड़ीसा सरकार को इसकी सूचना देना पड़ेगा। डाक्टरों की टीम उसके स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही यहां आब्जर्वेशन में रखने की व्यवस्था की जाएगी।

Ashok gautam
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