पर्यूषण पर्व की शुरुआत आज से, तपोभूमि में बदलेगा शहर

दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की शुरुआत 26 अगस्त से होगी और पांच सितम्बर तक रहेंगे।

By: Juhi Mishra

Published: 18 Aug 2017, 08:11 AM IST

 भोपाल। श्वेतांबर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की शुरुआत शुक्रवार से होगी। आठ दिवसीय इस महापर्व में श्रद्धालु भौतिक सुख, सुविधाओं से दूर रहकर तपस्या, साधना में लीन रहेंगे और कठिन व्रत रखेंगे। इस दौरान जैन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना, ग्रंथों का वाचन, प्रवचन सहित धार्मिक आयोजन होंगे।

 

शहर में श्वेताम्बर जैन समाज के सात मंदिर हैं, जहां आठ दिनों तक पर्यूषण आराधना की जाएगी। पर्यूषण पर्व के चलते शहर के जैन मंदिरों में आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की गई है। आत्मशुद्धि के इस महापर्व में जैन समाज के श्रद्धालु कठिन साधना, व्रत आदि रखेंगे और आठ दिनों तक कई व्रत और नियमों का पालन करते हुए आधुनिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर भक्ति में लीन रहेंगे।

 

दिगम्बर जैन समाज के पर्यूषण पर्व 11 दिन के
दिगम्बर जैन समाज के पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की शुरुआत 26 अगस्त से होगी और पांच सितम्बर तक रहेंगे। इस बार दिगम्बर जैन समाज के पर्यूषण पर्व दस के बजाय 11 दिनों के होंगे। दशमी तिथि दो दिन पडऩे से इस तरह की स्थिति बन रही है। पर्यूषण पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबी दस धर्मों की आराधना करेंगे।

 

सुबह से लेकर रात तक होंगे कार्यक्रम
मारवाड़ी रोड चौक बाजार स्थित श्वेतांबर मंदिर में आत्मदर्शना श्रीजी महाराज सा., अक्षयनिधि श्रीजी और क्षमा निधि श्रीजी की निश्रा में पर्यूषण पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस मौके पर सुबह विशेष पूजा अर्चना की जाएगी और प्रवचन होंंगे। इस दौरान सुबह 7.30 बजे स्नात्र पूजा, नौ बजे से प्रवचन, रात्रि में आरती और प्रभु भक्ति होगी। इसी प्रकार आदिनाथ जैन मंदिर तुलसी नगर में भी सुबह पर्यूषण आराधना होगी, यहां स्नात्र पूजा सहित विभिन्न आयोजन होंगे।
'निंदा करने में समय व्यतीत मत करोÓ

 

मुनिश्री निर्णय सागर महाराज के बोल...
अगर सुख चाहते हो तो शून्य में विलीन हो जाओ। मुस्कराते रहो, सज्जन लोग गुणीजनों को देखकर सदैव मुस्कराते हैं। कभी रूठना और निंदा करने में समय व्यतीत मत करो, मुस्कराता जीवन सफलता और सुख का पर्यायवाची है। जब ऑक्सीजन की नली लगती है, तब पता लगता है कि सांस कितनी कीमती रहती है, इसलिए अपनी सांसों को निंदा रस लेने में नहीं ज्ञान का रस लेने में खर्च करो। यह बात चातुर्मास आराधना के मौके पर चौक जैन धर्मशाला में चल रहे प्रवचन में मुनिश्री निर्णय सागर महाराज ने कहीं। उन्होंने कहा संसार में दुनिया भर की जानकारी एकत्रित करने के चक्कर में हम स्वयं को भूलते जा रहे हैं। हम स्वयं को जानना भूल गए हैं, हमारी प्रत्येक सांस हमें मृत्यु की ओर ले जा रही है। सूचना और प्रौद्योगिकी के इस युग में जीवन के सत्य को जानना और स्वयं को पहचानना अत्यंत आवश्यक और दुर्लभ है।

संसार को नहीं स्वयं को पहचाने। उन्होंने कहा कि मित्रता समूह और समितियां मनोरंजन के कार्यों के लिए बनाते हो, मित्रता का उद्देश्य जीवन के सत्य की प्राप्ति में एक-दूसरे का समन्वय करने, सहयोग करने, दुखियों का उद्धार करने के लिये बनाना चाहिये। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Juhi Mishra
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