नेलिंग से जुड़ सकेंगी टूटी पसलियां, महज दो सेंटीमीटर के कट से होगा ऑपरेशन

नेलिंग से जुड़ सकेंगी टूटी पसलियां, महज दो सेंटीमीटर के कट से होगा ऑपरेशन
नेलिंग से जुड़ सकेंगी टूटी पसलियां, महज दो सेंटीमीटर के कट से होगा ऑपरेशन

Sumeet Pandey | Updated: 12 Oct 2019, 06:10:02 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

ऑर्थोपेडिक्स वर्क शॉप में आए देश विदेश के हड्डी रोग विशेषज्ञ

भोपाल. क्या आपको कभी किसी दुर्घटना में छाती पर चोट लगी है? कभी ऐसा हुआ हो कि दुर्घटना में कार की स्टीयरिंग व्हील से आपकी छाती में सीधी चोट लगी हो और जीवनभर पसली के दर्द के साथ रहना पड़ा हो। डॉक्टर भी कहते हैं कि टूटी हुई पसलियों को जोडऩे के लिए कोई सटीक उपचार नहीं है। लेकिन अब नई तकनीक से टूटी हुई पसलियों को भी छोटे से ऑपरेशन से जोड़ा जा रहा है।

यह बात लंदन से आए डॉ. सुभाष हलदर ने कही। वे मिंटो हॉल में आयोजित तीन दिवसीय नेलकॉल वर्कशॉप में बोल रहे थे। वर्कशॉप में हड्डियों के जटिल ऑपरेशन को लाइव भी दिखाया गया। इस दौरान डॉ. हलदर ने कहा कि विश्व के कई देशों मे नेलिंग पद्धति से पसलियों को जोड़ा जा रहा है। इसमें महज दो सेंटीमीटर छेद कर बायोमैकेनिकल रॉड पसलियों पर स्क्रू से फिट की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत में रोड एक्सीडेंट के मामले बहुत ज्यादा होते हैं, एेसे में यह तकनीक यहां बहुत कारगर है।

लाइव ऑपरेशन में दिखाई नई तकनीक
वर्कशॉप के दौरान हमीदिया अस्पताल में एक बुजुर्ग के कूल्हे की सर्जरी की गई और इसका लाइव डेंमोस्ट्रेशन मिटों हॉल में किया गया। बुजर्ग के कुल्हे के नीचे ज्वाइंट टूट गया गया था जिसे हेली प्लेक्स नेल तकनीक से जोड़ा गया। ऑपरेशन करने वाले महाराष्ट्र के डॉ. वासुदेव गडग़ांव ने बताया कि सामान्य तौर पर इस ऑपरेशन के लिए हड्डी को स्क्रू से टाइट किया जाता है। नई तकनीक से स्क्रू में से तीन तार डाले जाते हैं जो हड्डियों को तीन तरफ से पकड़ कर रखते हैं।

छोटे से चीरे से जोड़ दिए दोनों पैर
वर्कशॅाप में दोपहर को एक युवती का ऑपरेशन किया गया। युवती के दोनों पैर घुटने से नीचे टूट गए थे। लाइव ऑपरेशन के दौरान छोटे से चीरे से सुप्रा एस्पर पटलेर नेलिंग एप्रोच तकनीक से ऑपरेशन किया गया। हमीदिया अस्पताल में हुए इस ऑपरेशन में नए चिकित्सकों को बिना चीरफाड़ के जटिल ऑपरेशन के बारे में बताया गया।

मरीज की दो दिन में हो जाती है छुट्टी
देश के ख्यात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. दिलीप तन्ना ने बताया कि नेलिंग पद्धति के आने के बाद हड्डी के ऑपरेशन बहुत सुविधाजनक हो गए है। उन्होंने बताया कि नई तकनीक में ब्लड लॉस नहीं होता। इसके साथ ही संक्रमण की आंशका भी बहुत काम हो जाती है। यही नहीं मरीज को दो दिन में ही छुट्टी भी मिल जाती है।

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